ड्रोन से हथियार और ड्रग्स तस्करी का बड़ा खुलासा, एनआईए ने दाखिल की तीसरी चार्जशीट

The CSR Journal Magazine
नई दिल्ली/जयपुर: एनआईए ने एक बार फिर सीमा पार बैठे दुश्मनों के नापाक मंसूबों को बेनकाब कर दिया है। एनआईए ने अंतरराष्ट्रीय हथियार और नशीले पदार्थों की तस्करी के एक बड़े मामले में तीसरी चार्जशीट दाखिल की है। यह चार्जशीट 17 अक्टूबर 2026 को जयपुर की एनआईए स्पेशल कोर्ट में पेश की गई। एनआईए की जांच के अनुसार, उत्तर भारत में सक्रिय सिंडिकेट के तार सीधे सीमा पार बैठे आकाओं से जुड़े हुए थे।

ड्रोन का इस्तेमाल, तस्करों की नई तकनीक

ये तस्कर इतने शातिर थे कि वे हथियारों और ड्रग्स की खेप को भेजने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल करते थे। सीमा पार से ड्रोन के जरिए भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास विदेशी हथियार, भारी मात्रा में गोला-बारूद और हेरोइन गिराई जाती थी। जैसे ही आसमान से यह खेप नीचे गिरती थी, भारतीय सीमा के अंदर सक्रिय इस नेटवर्क के गुर्गे तुरंत हरकत में आ जाते थे। वे इन सामानों को उठाकर राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के अलग-अलग इलाकों में सप्लाई करते थे। एनआईए के अनुसार, उत्तर भारत के ये तीन राज्य इस सिंडिकेट के खास ठिकाने बने हुए थे।

चार्जशीट में नए नाम, गिरफ्तारी का सिलसिला जारी

जयपुर कोर्ट में दाखिल की गई इस तीसरी चार्जशीट में एनआईए ने दो नए आरोपियों के नाम शामिल किए हैं। दोनों की पहचान सत्यनारायण मेघवाल और साहिल गोदारा के तौर पर की गई है। इन दोनों को जुलाई में गिरफ्तार किया गया था। एनआईए ने दोनों के खिलाफ यूएपीए, आर्म्स एक्ट, एनडीपीएस एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए हैं। इसके साथ ही, पहले से चार्जशीट में शामिल छह अन्य आरोपियों के खिलाफ भी यूएपीए की अतिरिक्त कई अन्य धाराएं जोड़ी गई हैं।

पिछली चार्जशीट का सिलसिला

बता दें कि इस हाई-प्रोफाइल मामले में एनआईए इससे पहले 14 अगस्त 2025 और 5 फरवरी 2026 को दो चार्जशीट पहले ही दाखिल कर चुकी है। यह दर्शाता है कि एनआईए इस मामले को कितनी गंभीरता से ले रही है और तस्करों के खिलाफ ठोस कार्रवाई कर रही है।

हाई-टेक तस्करी, युवाओं को नशे में धकेलने की साजिश

एनआईए की जांच में खुलासा हुआ है कि सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए ये तस्कर पूरी तरह से हाई-टेक तरीके अपना रहे थे। ये अपनी साजिश को अंजाम देने और एक-दूसरे से बात करने के लिए एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल करते थे। लेकिन एनआईए की पैनी नजर ने इनके हर डिजिटल सुराग को डिकोड कर लिया। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इस सिंडिकेट का असली मकसद सिर्फ अवैध कमाई करना नहीं था, बल्कि नशीले पदार्थों की सप्लाई करके भारत के युवाओं को नशे की दलदल में धकेलना और ड्रग्स की कमाई से देश में अराजकता की स्थिति पैदा करना था।

एनआईए की कार्रवाई जारी

फिलहाल, एनआईए इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने की कोशिश में जुटी हुई है। यह मामला न केवल सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समाज के लिए भी एक गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। एनआईए की तत्परता से उम्मीद है कि जल्द ही इस सिंडिकेट के सभी सदस्यों को गिरफ्तार किया जाएगा।

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