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February 15, 2026

भस्म से पुष्पवर्षा तक… महाशिवरात्रि 2026 पर शिवमय हुआ भारत, उज्जैन-काशी से गूंजा ‘हर हर महादेव’

The CSR Journal Magazine
महाशिवरात्रि 2026 की भोर ने देशभर में शिवभक्ति की अद्भुत लहर जगा दी। उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में तड़के 2:30 बजे भस्म आरती के साथ 44 घंटे के निर्बाध दर्शन शुरू हुए, तो वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में मंगला आरती और पुष्पवर्षा के बीच श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए। झांझ, मंजीरे और शंखध्वनि के साथ पूरा वातावरण “हर हर महादेव” के जयकारों से गूंज उठा।

उज्जैन: भस्म आरती का दिव्य दृश्य

महाकाल मंदिर में परंपरा अनुसार पहले जलाभिषेक हुआ, फिर केसर-चंदन उबटन, पंचामृत अभिषेक और भांग-सूखे मेवों से श्रृंगार किया गया। जब गर्भगृह की लाइटें बुझीं और दीपों की रोशनी में बाबा महाकाल का दिव्य स्वरूप प्रकट हुआ, तो श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। भस्म अर्पण के साथ हुई आरती ने पूरे परिसर को शिवमय बना दिया। मान्यता है कि महाशिवरात्रि पर भस्म आरती के दर्शन से सभी कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

काशी: मंगला आरती और पुष्पवर्षा

वाराणसी में मंगला आरती के साथ दर्शन का सिलसिला शुरू हुआ। मंदिर प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों से काशी नगरी गूंज उठी। लाखों भक्त कतारबद्ध होकर दर्शन करते दिखे, वहीं सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए गए।

देशभर में शिवभक्ति की झलक

गुजरात के जूनागढ़ से लेकर झारखंड के बाबा बैद्यनाथ धाम तक जलाभिषेक की धारा बहती दिखी। गिर सोमनाथ में सोमनाथ मंदिर के त्रिवेणी संगम घाट पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 108 दीपों से भव्य महाआरती हुई। दिल्ली में आद्या कात्यायनी शक्तिपीठ मंदिर और गौरी शंकर मंदिर में लंबी कतारें लगी रहीं, तो मुंबई के बाबुलनाथ मंदिर में भी श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा।

परंपरा, आस्था और उत्साह का संगम

कहीं हल्दी अनुष्ठान, कहीं जलाभिषेक, तो कहीं शोभायात्रा और रेत कला के माध्यम से शिवभक्ति प्रकट हुई। मंदिरों में विशेष पूजन, रुद्राभिषेक और महाआरती का आयोजन हुआ। डिजिटल स्क्रीन और लाइव प्रसारण के जरिए दूर बैठे भक्तों ने भी दर्शन का लाभ लिया।

क्यों खास है महाशिवरात्रि?

महाशिवरात्रि को भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का पावन पर्व माना जाता है। इस दिन व्रत, रात्रि जागरण और शिवलिंग अभिषेक का विशेष महत्व है। मान्यता है कि श्रद्धा से किया गया पूजन जीवन के कष्टों का नाश करता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। उज्जैन का महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग और वाराणसी का काशी विश्वनाथ मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख स्थान रखते हैं, इसलिए इस दिन इन धामों का आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।
महाशिवरात्रि 2026 पर देशभर में उमड़ी यह आस्था सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि परंपरा, श्रद्धा और सांस्कृतिक एकता का भव्य उत्सव बनकर सामने आई—जहां हर दिशा से एक ही स्वर गूंजा… हर हर महादेव!
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