महाराष्ट्र महायुति में घमासान: वित्त मंत्रालय पर संग्राम, NCP के 6 दिग्गजों ने दिल्ली में अमित शाह से की सीक्रेट मीटिंग
महाराष्ट्र की महायुति सरकार में वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) के पोर्टफोलियो को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के भीतर और सहयोगी दलों के बीच खींचतान चरम पर पहुंच गई है। 2 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में एनसीपी (अजित पवार गुट) के छह सबसे बड़े और कद्दावर नेताओं ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और गोपनीय बैठक की। इस उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल में प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, छगन भुजबल, धनंजय मुंडे, हसन मुश्रीफ और दिलीप वळसे पाटील जैसे वरिष्ठ चेहरे शामिल थे। बैठक का मुख्य एजेंडा महाराष्ट्र सरकार में बेहद शक्तिशाली माने जाने वाले वित्त विभाग को वापस एनसीपी के पाले में लाना है, जो पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के असामयिक निधन के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पास चला गया था। इस बैठक के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े उलटफेर की सुगबुगाहट तेज हो गई है।
दिल्ली में अमित शाह के साथ महा-बैठक: क्या हैं सियासी मायने?
सोमवार सुबह दिल्ली पहुंचे एनसीपी के छह कद्दावर नेताओं ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सामने अपनी बात रखी। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के नेताओं ने यह तर्क दिया कि महायुति सरकार के गठन के समय विभागों के आपसी समझौते के तहत वित्त मंत्रालय एनसीपी के कोटे में था। अजित पवार इस जिम्मेदारी को बखूबी संभाल रहे थे, लेकिन इस वर्ष जनवरी में उनके निधन के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अस्थाई रूप से इस विभाग को अपने पास रख लिया था। एनसीपी के वरिष्ठ नेताओं का साफ मानना है कि प्रदेश का सबसे महत्वपूर्ण माना जाने वाला यह विभाग उनकी पार्टी का स्वाभाविक अधिकार है, जिसे जल्द से जल्द वापस लौटाया जाना चाहिए। महाराष्ट्र में वित्त मंत्रालय वापस पाने के लिए दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलने वाले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रतिनिधिमंडल में शामिल 6 प्रमुख चेहरों में राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष व दिल्ली की राजनीति के मुख्य रणनीतिकार प्रफुल्ल पटेल, प्रदेश अध्यक्ष व सांगठनिक मामलों के प्रमुख सुनील तटकरे, कद्दावर ओबीसी चेहरा व कैबिनेट मंत्री छगन भुजबल, मराठवाड़ा क्षेत्र के मजबूत वरिष्ठ नेता धनंजय मुंडे, पश्चिम महाराष्ट्र के प्रभावशाली नेता हसन मुश्रीफ और पूर्व गृहमंत्री व संसदीय मामलों के गहरे जानकार दिलीप वळसे पाटील शामिल थे, जिन्होंने पार्टी के कोटे का महत्वपूर्ण विभाग वापस लेने के लिए महायुति के शीर्ष नेतृत्व के सामने मजबूती से अपनी बात रखी।
अजित पवार के निधन के बाद उपजा सत्ता संतुलन का संकट
महाराष्ट्र की महायुति (बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी) सरकार में संकट की शुरुआत 28 जनवरी 2026 को हुई, जब एक दुखद विमान हादसे में उपमुख्यमंत्री व वित्त मंत्री अजित पवार का निधन हो गया। अजित पवार के जाने के बाद पार्टी की कमान और उपमुख्यमंत्री का पद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को सौंपा गया। हालांकि, सत्ता संतुलन को बनाए रखने और आगामी बजट सत्र को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने वित्त मंत्रालय का प्रभार अपने नियंत्रण में ले लिया था।
एनसीपी का दावा है कि उस समय यह सहमति बनी थी कि सूखे से निपटने के लिए आवश्यक वित्तीय प्रावधानों और बुनियादी प्राथमिकताओं के तय होते ही यह मंत्रालय वापस कर दिया जाएगा। लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी जब यह विभाग एनसीपी को नहीं मिला, तो पार्टी के भीतर असंतोष की आग सुलगने लगी। कैबिनेट मंत्री हसन मुश्रीफ ने भी हाल ही में कड़े शब्दों में कहा था कि अजित दादा के पास जो विभाग थे, उन पर एनसीपी का हक बिल्कुल स्पष्ट है।
सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार की गैर-मौजूदगी ने खड़े किए सवाल
इस पूरी दिल्ली बैठक में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि एनसीपी की मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष व उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और उनके बेटे सांसद पार्थ पवार इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा नहीं थे। पार्टी के दो सबसे प्रमुख चेहरों की अनुपस्थिति ने राजनीतिक विश्लेषकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या एनसीपी के भीतर नेतृत्व को लेकर भी कोई अंदरूनी कलह या मतभेद चल रहा है। हालांकि, पार्टी के वरिष्ठ सूत्रों ने किसी भी तरह की अंदरूनी फूट (Internal Rift) से साफ इनकार किया है। कुछ दिन पहले ही सुनेत्रा पवार ने विधान परिषद चुनाव में मिली हार के बाद मीडिया से कहा था, “हमारे बीच कोई मतभेद नहीं हैं। चुनाव में जीत-हार चलती रहती है और हमें आत्मनिरीक्षण की जरूरत है।” इसके बावजूद, सुनेत्रा पवार की अनुपस्थिति में छह वरिष्ठ नेताओं का शाह से मिलना पार्टी के भीतर नए शक्ति-केंद्रों के उभरने का संकेत दे रहा है।
नाराजगी की अन्य वजहें: युवा बनाम वरिष्ठ नेता
अमित शाह के साथ हुई इस बैठक में केवल वित्त मंत्रालय की मांग ही नहीं उठाई गई, बल्कि पार्टी के आंतरिक ढांचे को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इन छह वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी के कुछ युवा और नए नेताओं की कार्यशैली को लेकर गृह मंत्री के सामने अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उनका मानना है कि कुछ नए चेहरों के फैसलों की वजह से हालिया विधान परिषद चुनावों में पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा है। नेताओं ने शाह से मांग की है कि आगामी कैबिनेट फेरबदल (Cabinet Reshuffle) में अनुभवी नेताओं को तरजीह दी जाए और एनसीपी कोटे के मंत्रियों के विभागों में बदलाव किया जाए।
मुंबई में शाम को महा-बैठक
दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात का यह दौर खत्म होने के बाद अब गेंद पूरी तरह से भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के पाले में है। अमित शाह से मिलकर लौटे सभी छह नेता मुंबई के लिए रवाना हो चुके हैं, क्योंकि आज ही शाम 4 बजे दिवंगत अजित पवार के आधिकारिक निवास ‘देवगिरी’ पर एनसीपी कोर कमेटी की एक बेहद अहम बैठक बुलाई गई है।
इस मुंबई बैठक की अध्यक्षता खुद उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार करेंगी। दिल्ली में शाह के साथ हुई बातचीत का पूरा ब्योरा इस बैठक में पार्टी के अन्य पदाधिकारियों के सामने रखा जाएगा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शीतकालीन सत्र से पहले महाराष्ट्र कैबिनेट का विस्तार और विभागों का पुनर्संतुलन होना लगभग तय है, और यदि एनसीपी को वित्त मंत्रालय वापस मिल जाता है, तो महायुति सरकार के भीतर का यह घमासान शांत हो सकता है।
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