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February 8, 2026

महाराष्ट्र में जिला परिषद चुनाव में नाबालिगों के मतदान से विवाद, कलेक्टर ने जांच के दिए आदेश

The CSR Journal Magazine
महाराष्ट्र में जिला परिषद चुनाव के दौरान दो विवादित घटनाएं सामने आई हैं, जहाँ नाबालिगों के पोलिंग बूथ के भीतर होने के मामले उजागर हुए। सोलापुर जिले के अकलुज स्थित यशवंत नगर मतदान केंद्र पर एक उम्मीदवार अपने 14 साल के बेटे को लेकर पहुंचे और आरोप है कि बच्चे ने EVM का बटन दबाया।

विधायक ने बेटे को मतदान केंद्र में ले जाने का किया दावा

छत्रपति संभाजीनगर जिले में भी एक नाबालिग की मौजूदगी से हंगामा खड़ा हो गया। वहाँ शिवसेना विधायक अपने बेटे को लेकर मतदान केंद्र में पहुंचे। विधायक ने इस बात का दावा किया कि उनका बेटा केवल वोटिंग प्रक्रिया को समझना चाहता था। मतदान अधिकारियों ने इस पर आपत्ति की, लेकिन विधायक ने अनुरोध किया कि बच्चा उनके पास खड़ा रहे। उनका कहना था कि इसमें कोई गलत बात नहीं है।

कलेक्टर ने जांच के निर्देश दिए

छत्रपति संभाजीनगर जिले के कलेक्टर दिलीप स्वामी ने तत्काल कार्रवाई करते हुए इस मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। कलेक्टर ने कहा कि यदि मतदान नियमों का उल्लंघन पाया गया तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वर्तमान में सभी नजरें इस जांच पर टिकी हैं।

मतदान का प्रतिशत रहा शानदार

इस चुनाव में महाराष्ट्र के 12 जिलों में जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव के दौरान कुल 67 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। मतदान सुबह 7:30 बजे शुरू हुआ और शाम 5:30 बजे तक चला। डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार समेत कई प्रमुख नेता अपने मताधिकार का उपयोग करने के लिए पहले पहुंचे।

राज्य में शोक की लहर

गौरतलब है कि यह चुनाव पहले 5 फरवरी को होने वाले थे, लेकिन डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन के बाद ये स्थगित कर दिए गए थे। उनके निधन पर पूरे राज्य में शोक की लहर है। अब यह चुनाव 9 फरवरी को गिनती के बाद अंततः संपन्न होंगे।

मतदान की प्रक्रिया को समझने का एक नया तरीका

इस घटनाक्रम ने यह सवाल उठाया है कि क्या नाबालिगों को मतदान प्रक्रिया में शामिल होना चाहिए या नहीं। क्या मतदान प्रक्रिया को समझने का यह तरीका सही है? कई लोगों का मानना है कि नाबालिगों के लिए यह एक सीखने का अवसर हो सकता है, जबकि कुछ का कहना है कि ऐसा किया जाना गलत है।

नौकरशाही की चूक की जा सकती है भरी कीमत

मतदान को लेकर जो घटनाएं सामने आई हैं, वे लोकतंत्र की गरिमा पर सवाल उठाती हैं। क्या ऐसी चूकें फिर से नहीं होंगी या क्या चुनावी प्रक्रिया को लेकर कोई सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे? कलेक्टर की जांच इन सवालों के जवाब देने में मदद करेगी।

सभी की नजरें चुनाव परिणामों पर

इस समय, सभी की नजरें चुनाव परिणामों पर हैं, जो कि 9 फरवरी को आएंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या नाबालिगों की वोटिंग की घटनाएं चुनावी नतीजों पर कोई प्रभाव डालेंगी या नहीं।

महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल

इन घटनाओं के बाद, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी अपनी प्रतिक्रियाएं देना शुरू कर दिया है। यह देखना होगा कि इन विवादों का महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिति पर क्या असर पड़ेगाI
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