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February 4, 2026

आम बजट 2026 का बड़ा दांव: Madhya Pradesh के 5 शहर बनेंगे मेट्रोपॉलिटन सिटी, शहरों की बदलेगी तस्वीर

The CSR Journal Magazine
आम बजट 2026 में केंद्र सरकार ने शहरी भारत को नई दिशा देने का संकेत दिया है। खास तौर पर पांच लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के सुनियोजित विकास पर जोर रहेगा। इस नीति के तहत मध्य प्रदेश के प्रमुख शहर—इंदौर, भोपाल, जबलपुर, उज्जैन और ग्वालियर—को आधुनिक शहरी ढांचे के साथ विकसित किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य इन शहरों को बेहतर नागरिक सुविधाओं, मजबूत परिवहन और पर्यावरण अनुकूल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ आगे बढ़ाना है।

सिटी-2 और अमृत मिशन से बनेगा प्रदूषण मुक्त शहरी मॉडल

भारत सरकार के सिटी-2 और अमृत प्रोजेक्ट के जरिए स्वच्छ, हरित और प्रदूषण मुक्त शहरों का निर्माण किया जाएगा। इन योजनाओं के तहत जलापूर्ति, सीवरेज, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता मिलेगी। शहरी जीवन की गुणवत्ता सुधारने के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को भी रफ्तार देने की तैयारी है, ताकि शहर रोजगार और निवेश के केंद्र बन सकें।

इंदौर–भोपाल के बाद जबलपुर और ग्वालियर की बारी

इंदौर और भोपाल पहले से ही मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में विकसित किए जा रहे हैं। अब आम बजट 2026 के संकेतों के बाद जबलपुर और ग्वालियर के लिए भी रास्ता साफ होता दिख रहा है। उज्जैन को धार्मिक–पर्यटन के साथ आधुनिक शहरी सुविधाओं से जोड़ने की योजना है। इन शहरों का विस्तार केवल नगर सीमा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आसपास के कस्बों और गांवों को भी विकास की मुख्यधारा में शामिल किया जाएगा।

शहरी विकास के लिए 95,522 करोड़ रुपये का प्रावधान

केंद्र सरकार ने शहरी विकास के लिए 95,522 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है। इसके तहत राज्य सरकारें अपनी योजनाएं बनाकर केंद्र से वित्तीय सहायता लेंगी। मध्य प्रदेश में नगरीय विकास एवं आवास विभाग शहरीकरण की जरूरतों के अनुसार प्रस्ताव तैयार करेगा। प्रदेश का करीब 35 प्रतिशत क्षेत्र पहले ही शहरी है और अनुमान है कि 2047 तक यह आंकड़ा 50 प्रतिशत से अधिक हो जाएगा।

मेट्रोपॉलिटन रीजन एक्ट से मिलेगा नियोजित विस्तार

विकसित और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने मेट्रोपॉलिटन रीजन एक्ट लागू कर दिया है। अब इसके नियम बनाए जा रहे हैं। इस कानून के तहत महानगरों के साथ-साथ आसपास के छोटे शहरों और गांवों का भी समन्वित विकास होगा। इससे अनियंत्रित शहरी फैलाव पर रोक लगेगी और आधारभूत सुविधाएं संतुलित तरीके से पहुंचाई जा सकेंगी।

418 नगरीय निकायों के साथ मप्र की अनोखी पहचान

मध्य प्रदेश देश का सर्वाधिक नगरीय निकायों वाला राज्य है। यहां 16 नगर निगम, 99 नगर पालिकाएं, 298 नगर पंचायतें और पांच छावनी परिषद हैं। कुल मिलाकर 418 नगरीय निकायों के साथ प्रदेश तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ रहा है। वर्तमान में दो करोड़ 70 लाख से ज्यादा परिवार शहरी परिधि में निवास कर रहे हैं, जिससे बुनियादी सुविधाओं की मांग लगातार बढ़ रही है।

2047 के लक्ष्य की ओर शहरी मध्य प्रदेश

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के विजन में शहरों की भूमिका अहम मानी जा रही है। मध्य प्रदेश में प्रस्तावित मेट्रोपॉलिटन विकास न केवल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगा, बल्कि रोजगार, निवेश और जीवन स्तर को भी नई ऊंचाई देगा। केंद्र से अधिक बजट मिलने की उम्मीद के साथ प्रदेश शहरी विकास के एक नए दौर में प्रवेश करता दिख रहा है।
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