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March 4, 2026

1400 करोड़ खर्च के बावजूद नहीं सुधरा कुपोषण: MP में आधे बच्चे अब भी गंभीर श्रेणी में

The CSR Journal Magazine
मध्य प्रदेश में कुपोषण की स्थिति को लेकर सामने आए ताजा आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा सभी जिलों से जुटाई गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2025 में छह वर्ष तक के 7.37 लाख बच्चों को अति गंभीर कुपोषित श्रेणी में चिह्नित किया गया। हैरानी की बात यह है कि इनमें से 3.63 लाख बच्चे अब भी सामान्य श्रेणी में नहीं लौट पाए हैं। यानी पहचान और उपचार की प्रक्रिया के बावजूद आधे से अधिक बच्चों की सेहत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

स्थिति सुधरने की जगह और बिगड़ी

मुख्यमंत्री बाल आरोग्य संवर्धन कार्यक्रम के तहत इन बच्चों की पहचान की गई थी। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि हालात बेहतर होने के बजाय और गंभीर हुए हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-5) की 2019-21 रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 35.7 प्रतिशत बच्चे ठिगनापन (स्टंटिंग) के शिकार थे। वहीं केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के पोषण ट्रैकर डैशबोर्ड के जनवरी 2026 के आंकड़ों में यह प्रतिशत बढ़कर 38 हो गया है। ठिगनापन कुपोषण की सबसे गंभीर श्रेणी मानी जाती है, जो बच्चों के शारीरिक ही नहीं, मानसिक विकास को भी प्रभावित करती है।

1400 करोड़ खर्च, फिर भी नतीजे सीमित

राज्य सरकार प्रतिवर्ष करीब 1400 करोड़ रुपये पूरक पोषण आहार पर खर्च कर रही है। इसके बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा। हालांकि दुबलापन (वेस्टिंग) और उम्र के अनुसार कम वजन वाले बच्चों के आंकड़ों में कुछ कमी दर्ज की गई है। एनएफएचएस-5 में कम वजन वाले बच्चों का प्रतिशत 33 था, जो पोषण ट्रैकर के अनुसार 22 प्रतिशत तक आ गया है। इसी तरह दुबलापन 19 प्रतिशत से घटकर सात प्रतिशत हुआ है। फिर भी राष्ट्रीय औसत से तुलना करें तो प्रदेश अब भी पिछड़े राज्यों में गिना जा रहा है। देश में ठिगनापन का औसत 31 प्रतिशत, कम वजन का 13 प्रतिशत और दुबलापन चार प्रतिशत है।

2017 से नहीं बढ़ी पोषण राशि

विशेषज्ञों का मानना है कि आंगनबाड़ी केंद्रों में दिए जाने वाले पूरक पोषण आहार की दरें लंबे समय से स्थिर हैं। सामान्य कुपोषित बच्चे को प्रतिदिन केवल आठ रुपये और अति गंभीर कुपोषित बच्चे को 12 रुपये प्रतिदिन की दर से आहार मिल रहा है। इन दरों में आखिरी बार वर्ष 2017 में बढ़ोतरी हुई थी। बढ़ती महंगाई के बीच यह राशि पर्याप्त मानी जाए या नहीं, इस पर सवाल उठ रहे हैं।

सरकार के प्रयास और 2047 का लक्ष्य

राज्य में अटल बिहारी वाजपेयी बाल आरोग्य एवं पोषण मिशन के तहत जिला स्तर पर कार्ययोजनाएं बनाई जा रही हैं। गंभीर कुपोषित बच्चों का उपचार एम्स के सहयोग से पांच दिन की विशेष चिकित्सा और छह माह के फॉलोअप के साथ किया जाता है। टेक होम राशन और गर्म पका भोजन योजना से 68 लाख से अधिक बच्चों तथा गर्भवती व धात्री माताओं को लाभ मिल रहा है। सरकार ने वर्ष 2047 तक कुपोषण समाप्त करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि यह राह अभी लंबी और चुनौतीपूर्ण है।
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