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February 28, 2026

मध्य प्रदेश में अवैध टोल वसूली विवाद पर PWD मंत्री ने बैक डेट अधिसूचना की बात कही

The CSR Journal Magazine
मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) पर नियमों की अनदेखी कर टोल वसूली का गंभीर आरोप लगाया गया है। विधानसभा में हुए एक सवाल-जवाब के दौरान यह मामला सामने आया, जहां पता चला कि कई टोल नाकों पर अधिसूचना जारी होने से पहले ही शुल्क लिया गया। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। अब यह मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है।

टोल वसूली की अवधि में भिन्नता

सरकारी नियमों के अनुसार, किसी भी सड़क पर टोल तभी वसूला जा सकता है जब सड़क का निर्माण पूर्ण हो और उसे सरकार द्वारा अधिसूचित किया गया हो। लेकिन इस मामले में 7 टोल नाकों पर अधिसूचना की तारीख और वसूली शुरू करने की तारीख में लगभग एक साल का बड़ा अंतर पाया गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि नियमों का उल्लंघन किया गया है।

कौन-कौन सी सड़कों पर हुई अवैध वसूली?

आरोप है कि भोपाल बायपास रोड, इंदौर-उज्जैन रोड, और सागर-दमोह रोड जैसी प्रमुख सड़कों पर अवैध रूप से टोल टैक्स वसूला गया है। इन सड़कों के लिए अधिसूचना और वसूली के बीच महीनों का फासला है, जो सीधे नियमों का उल्लंघन दर्शाता है।

वित्तीय आंकड़े क्या बताते हैं?

दिसंबर 2025 तक के आकड़ों के अनुसार, इन टोल नाकों से सैकड़ों करोड़ रुपये की वसूली की गई। अकेले भोपाल बायपास से करीब 284 करोड़ रुपये, इंदौर-उज्जैन रोड से 130 करोड़ रुपये और सागर-दमोह रोड से लगभग 95 करोड़ रुपये की वसूली हुई है। कुल मिलाकर, सरकार ने पिछले 5 वर्षों में 1100 करोड़ रुपये से अधिक कमाए हैं, जिसमें से 500 करोड़ रुपये सड़क की मरम्मत में खर्च हुए हैं।

PWD मंत्री का क्या कहना है?

लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि सरकार बैक डेट में भी अधिसूचना जारी कर सकती है, इसलिए यह कहना गलत होगा कि अवैध वसूली हुई है। उनके अनुसार, सभी फंड सरकार के खजाने में हैं। यह पहला मौका है जब किसी मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि अधिसूचना बैक डेट में भी जारी की जा सकती है। सरकार के इस बयान के बाद सवाल उठता है कि जब ये संभव है, तो आखिरकार इस मामले में ऐसा क्यों नहीं किया गया।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ क्या हैं?

कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल ने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया था और वर्तमान सरकार पर इसी तरह के नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाते हुए सवाल खड़े किए हैं। इसकी वजह से सीधा राजनीतिक विवाद भी उत्पन्न हो गया है, जहां आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

आगे की स्थिति

इस मामले से जुड़ी गतिविधियों पर अब ध्यान केंद्रित किया जाएगा, खासकर कानूनी पहलुओं पर। सभी राजनीतिक दल अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए तैयार हैं और यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मुद्दे पर सरकार क्या कदम उठाएगी।

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