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February 18, 2026

सिस्टम पर सवाल: न्याय की आस, जमीन के विवाद में घिसटता हुआ कलेक्ट्रेट पहुंचा दिव्यांग युवक

The CSR Journal Magazine
डिंडोरी (मध्य प्रदेश) के कलेक्ट्रेट परिसर में जनसुनवाई के दौरान ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए। न्याय की उम्मीद लेकर पहुंचे एक दिव्यांग युवक ने जब जमीन पर घिसटते हुए अधिकारियों के सामने अपनी फरियाद रखी, तो वहां मौजूद लोग ही नहीं, बल्कि अधिकारी भी स्तब्ध रह गए। यह घटना केवल एक व्यक्ति की पीड़ा नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का प्रतिबिंब बन गई, जहां बार-बार गुहार लगाने के बाद भी आम आदमी को न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ता है।

जनसुनवाई में इंसानियत को झकझोर देने वाला पल

डिंडोरी कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई के दौरान आमतौर पर लोग अपनी समस्याएं लेकर आते हैं, लेकिन इस बार दृश्य कुछ अलग था। शारीरिक रूप से कमजोर युवक जब घिसटते हुए न्याय की मांग करता नजर आया, तो हर किसी की निगाहें उसी पर टिक गईं। उसके चेहरे पर दर्द, आंखों में आंसू और आवाज में बेबसी साफ झलक रही थी। यह केवल एक शिकायत नहीं थी, बल्कि सिस्टम से टकराने की एक आखिरी कोशिश थी।

राजस्व विभाग पर गंभीर आरोप

पीड़ित युवक ने साफ शब्दों में आरोप लगाया कि राजस्व विभाग की लापरवाही के कारण उसे लंबे समय से न्याय नहीं मिल पा रहा है। उसका कहना है कि वह कई बार जनसुनवाई, तहसील और अन्य कार्यालयों के चक्कर काट चुका है, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला, समाधान नहीं। उसकी शिकायतें फाइलों में दबी रहीं और समस्या जस की तस बनी रही। इसी हताशा ने उसे इस हद तक मजबूर कर दिया कि वह घिसटते हुए अधिकारियों के सामने पहुंचा।

जमीनी विवाद बना जीवन की सबसे बड़ी लड़ाई

पीड़ित की पहचान उमेश के रूप में हुई है। उमेश ने बताया कि उसका अपने ही चाचा के साथ जमीनी विवाद चल रहा है। आरोप है कि चाचा ने धोखे से जमीन अपने नाम करवा ली। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण वह इस लड़ाई में खुद को असहाय महसूस करता है। कोर्ट, तहसील और प्रशासनिक दफ्तर—हर जगह उसकी फाइलें पहुंचीं, लेकिन कहीं से उसे ठोस न्याय नहीं मिला। यही कारण है कि उसका भरोसा सिस्टम से उठने लगा है।

अफसरों के सामने फूट पड़ा दर्द

जनसुनवाई के दौरान उमेश ने रोते हुए अपनी पूरी आपबीती अधिकारियों के सामने रखी। उसने कहा कि वह सिर्फ न्याय चाहता है—अगर वह गलत है तो उसे सजा दी जाए, लेकिन अगर अधिकारी या अन्य लोग दोषी हैं, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। उसका यह बयान केवल व्यक्तिगत पीड़ा नहीं, बल्कि व्यवस्था से जवाबदेही की मांग भी थी।

प्रशासन का आश्वासन, जांच का भरोसा

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पंचायत के सीईओ ने पूरे प्रकरण की जांच कर उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया। अधिकारियों ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। हालांकि, यह पहला आश्वासन नहीं था—उमेश पहले भी कई बार ऐसे वादे सुन चुका है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार उसका दर्द कैमरों और लोगों की आंखों तक पहुंच गया।
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