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March 12, 2026

सिलेंडर की किल्लत: 900 वाला अब 1800 में बिक रहा, उत्तराखंड में मेन्यू के 70% फूड आइटम गायब

The CSR Journal Magazine
देशभर में बढ़ती गैस किल्लत के कारण लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका और इजराइल की ईरान के खिलाफ लड़ाई की वजह से LPG गैस की किल्लत हो गई है। इस कारण गैस सिलेंडर लेने के लिए लोगों को लंबी-लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। बिहार में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत ₹1800 तक पहुँच गई है, जबकि मध्य प्रदेश में कॉमर्शियल सिलेंडर बाजार में ₹4000 में बिक रहा है।

ब्लैक मार्केटिंग का गहरा अंधेरा

भोपाल के बरखेड़ा पठानी में गैस एजेंसियों पर ₹4000 में सिलेंडर खुलकर बिक रहा है। जबकि असली कीमत ₹1910 है। सरकारी प्रयासों के बावजूद, कालाबाजारी में कोई कमी नहीं आई है। एजेंसी ऑपरेटर, कर्मचारी और दलाल इस खेल में शामिल हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि समस्या गंभीर है।

कॉमर्शियल सिलेंडर की कमी से समस्याएं

कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी का असर होटल और रेस्टोरेंट्स पर भी पड़ा है। लोग इंडक्शन पर खाना बनाने के लिए मजबूर हो गए हैं। कई होटलों ने मेन्यू से लगभग 70% खाने के आइटम हटा दिए हैं। हालात ये हो गए हैं कि लोगों को अपने रोजमर्रा के काम के लिए भी गैस नहीं मिल रही है।

सरकार का एक्शन प्लान

इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए सरकार ने कुछ उपाय किए हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय ने उच्च स्तरीय समिति बनाई है जो गैस सप्लाई की समीक्षा करेगी। इसके अलावा, आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू किया गया है जिससे कालाबाजारी को नियंत्रित किया जा सके। घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग में भी बदलाव किए गए हैं।

एलपीजी की सप्लाई का संकट

संकट की दो मुख्य वजहें हैं। पहली, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का लगभग बंद होना, जिससे भारत की LPG सप्लाई प्रभावित हो रही है। दूसरी, कतर के LNG प्लांट पर हुए ड्रोन हमलों की वजह से गैस सप्लाई में कमी आ गई है। इस कारण देश में गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं।

लम्बी कतारें और सुविधाओं की कमी

लखनऊ और पंजाब जैसे स्थानों पर लोग दीर्घ रेखाओं में खड़े होकर भी गैस सिलेंडर पाने में सफल नहीं हो रहे हैं। लोग दो-तीन दिन इंतजार करने के बाद भी गैस नहीं मिलने की शिकायत कर रहे हैं, जबकि प्रशासन इसकी कोई समस्या नहीं मानता।

उद्यमिता का नया रास्ता

गैस सिलेंडर की उपलब्धता में कमी के चलते कुछ मेस और हॉस्टल लकड़ी और कोयले की भट्टियों का उपयोग कर रहे हैं। चूंकि गैस का ऑर्डर देने में परेशानी हो रही है, इसलिए इस प्रकार के वैकल्पिक उपाय बढ़ रहे हैं।

भविष्य की संभावना

इंडियन ऑयल के अधिकारी ग्राहकों को धैर्य रखने की सलाह दे रहे हैं। सरकार ने वैकल्पिक कच्चे तेल के स्रोतों की तलाश शुरू कर दी है। उम्मीद है कि समस्या जल्द सुलझ जाएगी। लेकिन, लोगों को इस संकट के बीच अपनी रोजमर्रा की जिंदगी सामान्य करने में कठिनाई हो रही है।
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