KGMU धर्मांतरण केस में STF ने जांच का दायरा बढ़ाया, 100 से अधिक डॉक्टरों और मौलानाओं के संगठित नेटवर्क का खुलासा

The CSR Journal Magazine

KGMU धर्मांतरण केस में STF के सामने खुले कई राज! जांच का दायरा बढ़ा, 100 से अधिक डॉक्टरों का नेटवर्क

KGMU यानी किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में महिला डॉक्टर के यौन शोषण और धर्मांतरण के मामले की जांच कर रही यूपी STF ने अपनी पड़ताल का दायरा आगरा और एटा मेडिकल कॉलेज तक बढ़ा दिया है। इस मामले में मुख्य आरोपित डॉ. रमीजुद्दीन और उसके करीबी डॉ. रिजवान मलिक समेत 100 से अधिक डॉक्टरों और मौलानाओं का एक संगठित नेटवर्क सामने आया है। यह नेटवर्क जकात के नाम पर हर महीने करीब 10 लाख रुपये का फंड जुटाता था, जिसका उपयोग धर्मांतरण के तंत्र को विस्तार देने में किया जाता था।

जकात के नाम पर फंडिंग का खेल

जांच में यह भी पता चला है कि यूपी STF अब इस नेटवर्क से जुड़े बैंक खातों और पैसों के लेनदेन की गहनता से जांच कर रही है। एटा में डॉ. रिजवान की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। रिपोर्ट में डॉ. रमीज, डॉ. रिजवान मलिक और अदनान अंसारी के बीच संपर्कों का ब्योरा मिला है। ‘इस्लामिक मेडिकोज’ नाम के एक सीक्रेट ग्रुप की जानकारी भी सामने आई है, जिसके तहत मेडिकल कॉलेजों में नए छात्रों से संपर्क साधा जाता था।

डॉ. रिजवान की संदिग्ध गतिविधियाँ

डॉ. रिजवान मलिक एटा मेडिकल कॉलेज में करीब 5 साल तक तैनात रहा था। उसके खिलाफ कुछ गंभीर आरोप भी लगे हैं, जिनमें गैर-मुस्लिम छात्रों के परीक्षा परिणाम प्रभावित करने के आरोप शामिल हैं। इसके अलावा, अक्टूबर 2023 में एक असिस्टेंट प्रोफेसर की गाड़ी में तोड़फोड़ के मामले में भी उसका नाम आया था। इन सभी मामलों की जांच जारी है।

धर्मांतरण के लिए निजी कंपनियों का रोल

KGMU परिसर में धर्मांतरण प्रकरण के तार निजी कंपनियों के जरिए खड़े किए गए आर्थिक साम्राज्य से भी जुड़े हुए हैं। आरोप है कि एक डॉक्टर ने विशेष वर्ग से जुड़ी कंपनियों को KGMU में कारोबार दिलाने में मदद की। इसके तहत दवा दुकानों और जांच में काम आने वाली मशीनों को किराए पर लगाने की व्यवस्था की गई। इस कमीशन के जरिए धर्मांतरण और लव ट्रैप की गतिविधियों को आर्थिक मदद मिल रही थी।

हिंदू महिलाओं को फंसाने का खेल

यूपी STF की जांच में खुलासा हुआ है कि KGMU के हॉस्टलों में मौलाना मेडिकल छात्रों और स्टाफ के बीच तकरीरें करते थे। आरोप है कि मौलाना जकात के नाम पर रकम जुटाते थे और छात्रों के मन में अन्य धर्मों के प्रति द्वेष भरने का प्रयास करते थे। नेटवर्क से जुड़े लोग हिंदू महिलाओं का धर्मांतरण कराने का काम मानते थे, जिसके लिए एक स्क्रिप्ट तैयार की जाती थी।

चार्जशीट में चौंकाने वाले तथ्य

बीते साल 2025 के 23 दिसंबर को KGMU की एमडी पैथोलॉजी छात्रा ने डॉ. रमीजुद्दीन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस की ओर से दाखिल 800 से अधिक पन्नों की चार्जशीट में 3 लैपटॉप की फॉरेंसिक जांच से मिला 12 साल का 4TB डेटा और 500 से ज्यादा अश्लील वीडियो शामिल हैं। रमीज के पिता पर भी पूर्व में कई महिलाओं को प्रेमजाल में फंसाकर मतांतरण कराने के आरोप रहे हैं।

पिता-पुत्र के संबंधों की जांच

यूपी STF अब यह पता लगाने में जुटी है कि पिता-पुत्र एक ही सिंडिकेट का हिस्सा थे या अलग-अलग गिरोह संचालित कर रहे थे। इस मामले में जांच की गति तेज हो गई है और कई नए राज खुलने की संभावना है। KGMU प्रशासन से जुड़े 12 मेडिकल स्टाफ और शहर के दो निजी मेडिकल कॉलेजों के निदेशकों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

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