एक्ट्रेस पर अश्लीलता के आरोपों पर हाई कोर्ट सख्त, बोला—चरित्र पर कीचड़ उछालना ‘सामाजिक हिंसा’

The CSR Journal Magazine
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में महिला अभिनेत्री श्वेता मेनन के मामले पर टिप्पणी करते हुए बेबुनियाद आरोपों की कड़ी निंदा की। कोर्ट ने कहा कि यह आसान होता है किसी व्यक्ति के चरित्र पर ऊँगli उठाना, लेकिन इसके असर का प्रभाव लंबे समय तक रहता है। यह भी कहा गया कि बिना किसी ठोस आधार के किसी महिला के विरुद्ध आरोप लगाना ‘सामाजिक हिंसा का एक घातक रूप’ है। न्यायमूर्ति सी.एस. डायस ने यह टिप्पणियाँ उस FIR को रद्द करते हुए की, जिसमें अभिनेत्री पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने अपनी कुछ पुरानी फिल्मों के अश्लील दृश्यों का प्रकाशन किया था।

सामाजिक हिंसा का घातक रूप

कोर्ट ने कहा कि जब कोई समाज किसी महिला की उपलब्धियों के बजाय उसकी छवि पर ज्यादा ध्यान देता है, तो यह उसकी ‘बौद्धिक दरिद्रता’ को प्रदर्शित करता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह स्पष्ट है कि अभिनेत्री के खिलाफ शिकायत केवल उन्हें मलयालम फिल्म कलाकार संघ के अध्यक्ष पद के चुनाव से रोकने के उद्देश्य से की गई थी। यह शिकायत उस समय की गई जब नामांकन वापसी की अंतिम तिथि नजदीक थी। हाईकोर्ट ने ऐसी शिकायतों का विरोध करते हुए कोई ठोस सबूत न होने पर उन्हें गंभीरता से न लेने की सलाह दी।

दुर्भावनापूर्ण शिकायतों की पहचान

अदालत ने एक अन्य टिप्पणी में कहा कि बिना कोई ठोस सबूत के किसी महिला का बदनामी करना शुद्ध रूप से सामाजिक हिंसा है। इस मामले में न्यायमूर्ति ने जिक्र किया कि यह शिकायत स्पष्ट रूप से दुर्भावनापूर्ण है। अदालत ने 11 मार्च के अपने आदेश में कहा कि किसी महिला के चरित्र को बिना ठोस प्रमाण के बदनाम करना पूरी तरह से अस्वीकार्य है।

अभिनेत्री की पहचान का सम्मान

अदालत ने कहा कि महिलाओं के सशक्तीकरण का मतलब यह नहीं है कि उन्हें कोई भी दायर कर दे। इसके बजाय, उनकी व्यक्तिगत पहचान, आकांक्षाएँ और उपलब्धियाँ को बिना किसी पूर्वाग्रह के मान्यता मिलनी चाहिए। केरल हाईकोर्ट ने पिछले साल अगस्त में इस मामले की जांच को रोका था और कहा कि पुलिस को जांच से पहले रिपोर्ट मंगाना आवश्यक था।

क्या है आरोपों का मूल?

अभिनेत्री श्वेता मेनन के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 और अश्लील व्यापार रोकथाम अधिनियम के तहत FIR दर्ज की गई थी। जब शिकायत दर्ज की गई थी, तब मेनन मलयालम मूवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (AMMA) के अध्यक्ष पद के लिए चुनावी दौड़ में थीं। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि कई साल पहले एक कंडोम के विज्ञापन में और कई फिल्मों में उन्हें कथित रूप से अश्लील दिखाया गया था। हाईकोर्ट की टिप्पणी ने इस विवाद पर एक नई रोशनी डाली है, जिससे इस तरह के आरोपों की गंभीरता पर सवाल खड़ा होता है।
Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!
App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 
Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos