Karwa Chauth 2026 पूजा मुहूर्त: भद्रा का साया नहीं, जानें शुभ मुहूर्त और चांद निकलने का समय

The CSR Journal Magazine
करवा चौथ का पर्व नजदीक आ रहा है और इस बार महिलाओं के मन में भद्रा को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। कुछ महिलाएं व्रत की तारीख को लेकर असमंजस में हैं, जबकि अन्य पूजा के शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय के समय की जानकारी जुटा रही हैं। इस स्थिति में यह जानना जरूरी है कि भद्रा का समय कब है और करवा चौथ की पूजा किस समय करनी चाहिए। ज्योतिष आचार्य के अनुसार, भद्रा को लेकर घबराने की कोई जरूरत नहीं है। भद्रा 28 अक्टूबर की रात को है, जबकि महिलाएं 29 अक्टूबर को करवा चौथ का व्रत रख सकती हैं।

शुभ मुहूर्त की जानकारी

पंडित आरके शर्मा ने बताया कि करवा चौथ सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छी सेहत और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ व्रत रखती हैं। परंपरा के अनुसार, व्रत वाले दिन महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले उठकर सरगी ग्रहण करती हैं। इसके बाद दिनभर उपवास रखा जाता है और शाम को करवा चौथ की पूजा तथा कथा की जाती है। रात में चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य देने के बाद महिलाएं अपना व्रत खोलती हैं।

पूजा का सही समय

करवा चौथ पर पूजा के शुभ समय को लेकर महिलाओं में उत्सुकता बनी हुई है। 29 अक्टूबर को शाम 5 बजकर 48 मिनट से 6 बजकर 56 मिनट तक पूजा करने और करवा चौथ की कथा सुनने का समय बताया गया है। हालांकि, पूजा का सही मुहूर्त स्थानीय पंचांग और स्थान के अनुसार सत्यापित करना जरूरी है। करवा चौथ के व्रत में चंद्रमा के निकलने का इंतजार सबसे खास माना जाता है। रात 8 बजकर 15 मिनट के बाद चांद निकलने की संभावना जताई जा रही है।

पंजाब में करवा चौथ की परंपरा

पंजाब में करवा चौथ की शुरुआत सरगी की परंपरा के साथ होती है। सूर्योदय से पहले, सास अपनी बहू को सरगी देती हैं, जिसमें फल, मिठाइयां और अन्य खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं। महिलाएं सरगी ग्रहण करने के बाद व्रत शुरू करती हैं। शाम के समय सोलह श्रृंगार करके महिलाएं पूजा-अर्चना करती हैं। कई स्थानों पर फेरी की रस्म भी निभाई जाती है, जिसमें महिलाएं एक घेरे में बैठकर पूजा की थाली एक-दूसरे को देती हैं और करवा चौथ की कथा सुनती हैं।

गौर माता की पूजा की परंपरा

उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कई क्षेत्रों में गौर माता की पूजा करने की परंपरा भी प्रचलित है। करवा चौथ पर छलनी से चंद्रमा और फिर पति का चेहरा देखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महिलाएं इस रस्म के माध्यम से अपने पति की लंबी आयु और दांपत्य जीवन की खुशहाली की कामना करती हैं। व्रत खोलते समय पति द्वारा पत्नी को पानी पिलाने और मिठाई खिलाने की रस्म को भी प्रेम, विश्वास और जिम्मेदारी का प्रतीक माना जाता है।

पति-पत्नी के रिश्ते का प्रतीक

इस परंपरा का भाव यही है कि पति-पत्नी जीवनभर एक-दूसरे का ख्याल रखें और उनके रिश्ते में प्रेम तथा मिठास बनी रहे। करवा चौथ केवल उपवास का पर्व नहीं, बल्कि पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक भी है। ऐसे में व्रत रखने वाली महिलाओं को तारीख, भद्रा और पूजा के मुहूर्त को लेकर सही जानकारी हासिल करनी चाहिए, ताकि वे बिना किसी असमंजस के अपनी धार्मिक परंपराएं निभा सकें।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store – https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos