Kartavya App: कर्नाटक का कर्तव्य ऐप क्या है, कैसे काम करता है, किसके लिए वरदान से कम नहीं?

The CSR Journal Magazine
कर्नाटक सरकार ने सरकारी सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ‘कर्तव्य’ ऐप के माध्यम से अधिकारियों की उपस्थिति को ट्रैक किया जाएगा। यह ऐप सरकारी कर्मचारियों के लिए एक नई व्यवस्था लेकर आया है, जिससे उनकी लोकेशन की निगरानी की जा सकेगी। इससे न केवल कामकाज में सुधार होगा, बल्कि आम जनता को भी बेहतर सेवाएं मिलेंगी।

लोकेशन-बेस्ड नाइट अटेंडेंस सिस्टम

सरकार ने यह फैसला लिया है कि सभी अधिकारी अपने मुख्यालय में ही रहेंगे। अक्सर देखा जाता था कि अधिकारी तैनाती की जगह छोड़कर बड़े शहरों में चले जाते थे। इससे आम जनता को मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। अब इस समस्या का समाधान करने के लिए लोकेशन-बेस्ड नाइट अटेंडेंस सिस्टम लागू किया गया है। इस सिस्टम के तहत, ‘कर्तव्य’ ऐप का उपयोग किया जाएगा, जो अधिकारियों की रात की उपस्थिति को ट्रैक करेगा।

पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत

इस नए सिस्टम की शुरुआत 1 नवंबर से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के जरिए पायलट प्रोजेक्ट के रूप में होगी। पहले चरण में तालुक अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के डॉक्टर्स को इस ऐप के दायरे में रखा जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डॉक्टर रात के समय अपने कार्यक्षेत्र में मौजूद रहें।

इमरजेंसी सेवाओं में सुधार

ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में अक्सर डॉक्टरों की गैर-मौजूदगी की शिकायतें आती थीं। मरीज इमरजेंसी में भटकते रहते थे और स्टाफ मुख्यालय से गायब मिलता था। इस नए कदम से 24 घंटे डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की मौजूदगी सुनिश्चित की जा सकेगी। स्वास्थ्य विभाग में इस पायलट प्रोजेक्ट के नतीजों के बाद, सरकार इसे अन्य विभागों में भी लागू करने की योजना बना रही है।

डॉक्टरों की उपस्थिति की प्रक्रिया

डॉक्टरों को हर दिन रात 9 बजे के बाद ‘कर्तव्य’ ऐप के जरिए अपनी उपस्थिति दर्ज करनी होगी। इसके लिए उन्हें अपने मुख्यालय के रूप में निर्धारित कस्बे, शहर या गांव की भौगोलिक सीमा के भीतर रहना होगा। जो अधिकारी स्वीकृत छुट्टी पर हैं, उन्हें इस नियम से छूट मिलेगी। इसके अलावा, जो अधिकारी अपने मुख्यालय के बाहर आधिकारिक काम कर रहे हैं, उन्हें भी छूट दी जाएगी।

अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान

सरकार ने स्पष्ट किया है कि जो अधिकारी बिना अनुमति के अपने मुख्यालय से दूर पाए जाएंगे, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। आयुक्तों और जिला स्वास्थ्य अधिकारियों को हर महीने रात की उपस्थिति रिपोर्ट की समीक्षा करनी होगी। यह निर्णय उप लोकायुक्त की जांच के बाद लिया गया है, जिसमें पाया गया कि कई सरकारी कर्मचारी अपने निर्धारित मुख्यालय पर नहीं रह रहे थे।

प्रजा सेवा विभाग की पहल

जनहित की रक्षा करने और सेवा नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए, प्रजा सेवा विभाग ने मुख्यमंत्री की मंजूरी से यह प्रणाली लागू की है। प्रजा सेवा विभाग के प्रधान सचिव ने कहा कि पायलट प्रोजेक्ट के नतीजों के आधार पर, सरकार इस उपस्थिति प्रणाली को अन्य विभागों में भी लागू करने की योजना बना रही है।

संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए भी अनिवार्य

सरकार ने संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए भी ‘कर्तव्य’ ऐप के जरिए अपनी उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य कर दिया है। सभी विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे सुनिश्चित करें कि उनके अधीन काम करने वाले संविदा और आउटसोर्स कर्मचारी 25 नवंबर तक ऐप पर अपना पंजीकरण करा लें। 1 दिसंबर से, उनकी उपस्थिति केवल इसी ऐप के माध्यम से दर्ज की जानी चाहिए।

भविष्य की योजनाएं

1 जनवरी 2027 से, संविदा कर्मचारियों का वेतन और आउटसोर्सिंग एजेंसियों द्वारा जमा किए गए बिलों का भुगतान केवल ऐप से तैयार उपस्थिति रिपोर्ट के आधार पर किया जाएगा। भुगतान जारी करने वाले अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि यदि ऐप के जरिए उपस्थिति दर्ज नहीं की गई है, तो वे कोई भी भुगतान जारी न करें। यह कदम सरकारी कामकाज को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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