मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र से की करतारपुर साहिब कॉरिडोर को पुनः खोलने की मांग

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धार्मिक आस्था राजनीति से ऊपर: मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र से की करतारपुर साहिब कॉरिडोर को पुनः खोलने की मांग

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सिख समुदाय की गहरी धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए केंद्र सरकार से श्री करतारपुर साहिब कॉरिडोर को तुरंत और स्थाई रूप से दोबारा खोलने की पुरजोर वकालत की है। मुख्यमंत्री मान ने स्पष्ट और कड़े शब्दों में कहा कि मानवता और धार्मिक आस्था से जुड़े इस बेहद संवेदनशील मुद्दे को किसी भी प्रकार की राजनीतिक नफा-नुकसान की चौखट पर नहीं तौला जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं के लिए इस पावन गलियारे को निर्बाध रूप से चालू रखना केंद्र की जिम्मेदारी है, ताकि हर एक श्रद्धालु अपने गुरु के चरणों में आसानी से नमन कर सके।

सिख इतिहास में करतारपुर साहिब का बेजोड़ महत्व

श्री करतारपुर साहिब सिख धर्म के संस्थापक, प्रथम गुरु श्री गुरु नानक देव जी का अंतिम विश्राम स्थल है। उन्होंने अपने जीवन के अंतिम लगभग 18 वर्ष यहीं व्यतीत किए थे और यहीं पर ‘किरत करो, नाम जपो, वंड छको’ का शाश्वत संदेश दिया था। यही कारण है कि दुनिया भर में बसने वाले करोड़ों सिखों और गुरु नानक नाम लेवा संगत के लिए यह स्थान सर्वोच्च आध्यात्मिक महत्व रखता है। विभाजन के समय भारत-पाकिस्तान सीमा रेखा खिंचने के कारण यह ऐतिहासिक गुरुद्वारा पाकिस्तान की धरती पर चला गया, जिसके बाद से भारतीय सिख श्रद्धालु दूरबीन के सहारे सीमा से इसके दर्शन करने को मजबूर थे। साल 2019 में जब इस कॉरिडोर का निर्माण हुआ, तो इसे दोनों देशों के बीच शांति और आस्था के एक नए पुल के रूप में देखा गया था।

राजनीति की भेंट नहीं चढ़नी चाहिए आस्था: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने बयान में इस बात पर गहरा दुख व्यक्त किया कि कई बार दोनों देशों के आपसी भू-राजनीतिक तनावों और सुरक्षा कारणों का हवाला देकर इस कॉरिडोर के माध्यम से होने वाली यात्रा को बाधित या सीमित कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव जी की शिक्षाएं सार्वभौमिक हैं और वे किसी एक सीमा, जाति या मजहब में नहीं बंधी हैं। जब एक श्रद्धालु करतारपुर साहिब की यात्रा की योजना बनाता है, तो उसका एकमात्र उद्देश्य अपने गुरु के प्रति अगाध श्रद्धा प्रकट करना होता है। ऐसे में कॉरिडोर के संचालन में आने वाली प्रशासनिक या राजनीतिक बाधाएं श्रद्धालुओं के दिल को ठेस पहुंचाती हैं। मान ने कहा कि सरकारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कूटनीतिक तनावों की आंच कभी भी आम जनता के धार्मिक अधिकारों पर न पड़े।

श्रद्धालुओं के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने की मांग

कॉरिडोर को फिर से पूरी क्षमता के साथ खोलने की मांग के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से इस यात्रा के लिए लागू मौजूदा नियमों और प्रक्रियाओं को भी सरल बनाने का आग्रह किया है। वर्तमान में करतारपुर साहिब जाने वाले श्रद्धालुओं को पासपोर्ट की अनिवार्यता, भारी-भरकम ऑनलाइन पंजीकरण और कभी-कभी सुरक्षा मंजूरी में होने वाली देरी जैसी कई तकनीकी अड़चनों का सामना करना पड़ता है। पंजाब सरकार का तर्क है कि भारत के कई ग्रामीण इलाकों से आने वाले गरीब और बुजुर्ग श्रद्धालुओं के पास पासपोर्ट नहीं होता या वे ऑनलाइन आवेदन करने में सक्षम नहीं होते। इसलिए, सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे बिना पासपोर्ट के भी केवल आधार कार्ड या किसी अन्य वैध सरकारी पहचान पत्र के माध्यम से श्रद्धालु दिन भर की इस धार्मिक यात्रा को पूरा कर सकें।

पंजाब सरकार के प्रयास और क्षेत्रीय विकास

भगवंत मान ने भरोसा दिलाया कि पंजाब सरकार अपनी सीमा के भीतर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हर संभव बुनियादी ढांचा प्रदान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। डेरा बाबा नानक (गुरदासपुर) स्थित भारतीय सीमा चौकी पर श्रद्धालुओं के ठहरने, लंगर, परिवहन और चिकित्सा सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार लगातार काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कॉरिडोर न केवल एक धार्मिक मार्ग है, बल्कि यह पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने का एक बहुत बड़ा जरिया भी है। अगर कॉरिडोर बिना किसी रुकावट के लगातार खुला रहता है, तो इससे सीमावर्ती इलाकों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और बुनियादी ढांचे का भी तेजी से विकास होगा।

एकजुटता और भविष्य की राह

मुख्यमंत्री की इस मांग को पंजाब के सभी राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का भी व्यापक समर्थन मिल रहा है। सिख बुद्धिजीवियों और धार्मिक नेताओं का मानना है कि करतारपुर साहिब का रास्ता हमेशा खुला रहना चाहिए क्योंकि यह कॉरिडोर दशकों की अरदास और दुआओं के बाद खुला था। भगवंत मान ने केंद्र सरकार को एक औपचारिक पत्र लिखकर इस विषय पर तुरंत एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाने और कॉरिडोर के स्थाई व निर्बाध संचालन के लिए पाकिस्तान सरकार के साथ भी आवश्यक समन्वय स्थापित करने की अपील की है। उन्होंने निष्कर्ष में कहा कि आस्था का यह गलियारा दोनों देशों के बीच नफरत की दीवारों को गिराकर शांति और भाईचारे का संदेश फैलाने का सबसे बेहतरीन माध्यम साबित हो सकता है।

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