app-store-logo
play-store-logo
February 12, 2026

कर्नाटक में मुस्लिम दंपति ने हिंदू रीति-रिवाज से गोद लिए बेटे का विवाह कर समाज में एकता का संदेश दिया

The CSR Journal Magazine
कर्नाटक के बस्तावाड़ा गांव में एक मुस्लिम दंपति, महबूब और नूरजन ने एक नई मिसाल पेश की है। उन्होंने अपने परिवार में दो हिंदू अनाथ बच्चों को अपनाया और उनका पालन-पोषण हिंदू रीति-रिवाजों के तहत किया। हाल ही में, उन्होंने अपने दत्तक पुत्र सोमशेखर का विवाह हिंदू विधि-विधान से संपन्न कराया। इस घटना ने समाज में धार्मिक समरसता को प्रोत्साहित किया है।

बचपन की कठिनाइयाँ और नया परिवार

दो भाई, सोमशेखर और वसंत, बचपन में अपने माता-पिता को खो चुके थे। सोमशेखर उस समय केवल चार साल का था। कठिनाईयों का सामना करते हुए, उनके परिवार ने उनकी देखभाल करने से मुँह मोड़ लिया। ऐसे समय में, महबूब और नूरजान ने आगे बढ़कर इन बच्चों को गोद लिया और अपने अन्य पांच बच्चों के साथ मिलकर उनका पालन-पोषण शुरू किया।

हिंदू रीति-रिवाज से विवाह

अब सोमशेखर बड़े हो गए हैं और उनका विवाह हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुआ। इस शादी में महबूब और नूरजान ने माता-पिता की भूमिका निभाई और सभी धार्मिक अनुष्ठान को अदा किया। विशेष बात यह है कि इस समारोह में सभी समुदाय के लोग शामिल हुए, जिससे एकता का संदेश दिया गया।

धार्मिक सहिष्णुता का उदाहरण

जाति और धर्म के नाम पर हो रहे हालात में, महबूब और नूरजान की इस पहल को व्यापक सराहना मिल रही है। लोग कह रहे हैं कि जहां देश में धार्मिक डिवाइड बढ़ाने की कोशिश की जा रही है, वहीं इस दंपति ने एकता का संदेश दिया है। उनकी पहल से यह साफ होता है कि मानवता सबसे ऊपर है।

समाज में बातचीत का विषय

बस्तावाड़ा गांव में इस घटना ने स्थानीय लोगों के बीच बातचीत का विषय बना लिया है। काफी सारे समुदायों के लोग इस बात की प्रशंसा कर रहे हैं कि किस प्रकार इस मुस्लिम दंपति ने न केवल दो अनाथ बच्चों की जिंदगी बदल दी, बल्कि एक बेहतरीन उदाहरण भी पेश किया। यही नहीं, यह घटना विभिन्न धर्मों के बीच भाईचारा बढ़ाने का कार्य भी कर रही है।

नई सोच का आगाज

महबूब और नूरजान की इस पहल ने समाज को एक नई दिशा देने का काम किया है। धार्मिक भेदभाव के वक्त में उनकी सोच मानवता के प्रति एक साहसिक उदाहरण प्रस्तुत करती है। उनकी इस कोशिश ने एक सकारात्मक संदेश दिया है कि किस प्रकार विभिन्न धर्मों को एक साथ लाकर एक अच्छे भविष्य की ओर बढ़ा जा सकता है।

समाज की नई आशा

महबूब और नूरजान की कहानी ने कई लोगों को प्रेरित किया है। ऐसे उदाहरण इस बात का प्रमाण हैं कि जब हम एक-दूसरे के धर्म और संस्कृति का सम्मान करते हैं, तो हम बेहतर समाज की ओर अग्रसर होते हैं। इस प्रकार की पहलें समाज को जोड़ने और एकता के प्रतीक बनकर उभरती हैं।

Latest News

Popular Videos