भारत के दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 408 रनों की शर्मनाक हार के बाद भारतीय टेस्ट क्रिकेट की तकनीक, बल्लेबाज़ी और घरेलू क्रिकेट की अनदेखी पर बहस तेज़ हो गई है। 1983 विश्व कप विजेता कप्तान कपिल देव ने इस बहस को और तीखा करते हुए खुलकर सवाल उठाए हैं – “क्या भारत के शीर्ष बल्लेबाज़ अब घरेलू क्रिकेट खेल ही नहीं रहे?”
कपिल देव ने कहा कि पिछले दौर के बल्लेबाज़ स्पिन और मुश्किल परिस्थितियों में टिक पाते थे क्योंकि वे लगातार घरेलू क्रिकेट खेलते थे। “मैं सिर्फ जानना चाहता हूँ कि आज के कितने स्टार खिलाड़ी घरेलू क्रिकेट खेलते हैं? अगर आप गुणवत्ता वाले गेंदबाज़ों का सामना घरेलू सर्किट में नहीं करते, तो टेस्ट में संघर्ष होगा,” कपिल ने कहा।
भारत पिछले दो वर्षों में दो घरेलू टेस्ट सीरीज़—न्यूज़ीलैंड (2024) और दक्षिण अफ्रीका (2025)—हार चुका है। कोलकाता और गुवाहाटी में भारतीय बल्लेबाज़ 200 का आंकड़ा भी नहीं छू सके। कपिल देव के अनुसार यह साफ संकेत है कि भारतीय बल्लेबाज़ी अब मुश्किल पिचों और लंबे फ़ॉर्मेट की तकनीक को भूल चुकी है।

पिचों और मानसिकता पर कड़ी टिप्पणी
कपिल देव ने माना कि पिचों का चयन भी सवालों के घेरे में है।
“ऐसी पिच का क्या मतलब है जहाँ मैच दो–ढाई दिन में खत्म हो जाए और टॉस हारते ही मैच भी हार जाएँ? पांच दिन के टेस्ट का पूरा मज़ा ही खत्म हो रहा है,” उन्होंने कहा।
उन्होंने साफ कहा कि T20 और ODI खेलने की आदत ने भारतीय बल्लेबाज़ों की patience और तकनीक दोनों को कमजोर किया है।
“अब हमारे पास द्रविड़ और लक्ष्मण जैसे बल्लेबाज़ नहीं हैं जो विकेट पर ठहरने का जज्बा रखते थे। टेस्ट बल्लेबाज़ी क्रीज़ पर समय बिताने का खेल है,”
स्पिन खेलने के कौशल में गिरावट
कपिल का मानना है कि तेज़ गेंदबाज़ी से ज्यादा मुश्किल स्पिन खेलना है।
“स्पिन के लिए बेहतर फुटवर्क और धैर्य चाहिए। अगर पिच पर ज्यादा टर्न या उछाल है तो कौशल और भी जरूरी हो जाता है।”
उन्होंने ऋषभ पंत को उदाहरण देते हुए कहा कि हर बल्लेबाज़ का अपना स्वभाव होता है—“आप पंत जैसे खिलाड़ी को 100 गेंद पर 20 रन बनाने को नहीं कह सकते। वह मैच-विनर है और उसी तरह खेलेगा।”


