कन्हैया कुमार: राहुल गांधी के साथ चलने वाले कन्हैया अब कहां हैं?

The CSR Journal Magazine
दिल्ली में राहुल गांधी के नेतृत्व में युवा प्रदर्शन कर रहे हैं। चुनाव आयोग के खिलाफ इंडिया गठबंधन का 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट मार्च हुआ। यह मार्च मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर उठ रहे सवालों को लेकर था। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर पूरा विपक्ष हमलावर है। कांग्रेस और उसके छात्र संगठन युवाओं को जोड़ने की कोशिश में जुटे हैं। लेकिन इसी बीच एक सवाल चर्चा में है कि कांग्रेस की छात्र राजनीति का प्रमुख चेहरा रहे कन्हैया कुमार कहां हैं?

कन्हैया की गैरमौजूदगी पर सवाल

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में एनएसयूआई की करारी हार के बाद कन्हैया कुमार की सक्रियता पर सवाल उठने लगे हैं। हाल ही में दिल्ली स्थित केरला हाउस में कन्हैया कुमार को लेकर विवाद चर्चा में आया था। दिल्ली पुलिस तक बुलाने की नौबत आ गई थी। किसी तरह मामला रफा-दफा हुआ। क्या इन घटनाओं की वजह से राहुल गांधी ने कन्हैया कुमार से दूरी बना ली या फिर इसके पीछे कुछ और वजह है?

राहुल गांधी की समीक्षा बैठक

12 अक्टूबर को राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट प्रोटेस्ट में कन्हैया कुमार नहीं थे, यह उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से पता चल रहा है। 10 अक्टूबर 2026 के बाद कन्हैया कुमार अपने एक्स अकाउंट से एक भी पोस्ट नहीं किया है। जबकि, इससे पहले वह छिटपुट पोस्ट करते रहते थे। यह सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि कन्हैया कुमार एनएसयूआई के संगठन प्रभारी हैं। दिल्ली में जहां युवा सड़क पर राहुल के साथ उतरे, वहां कन्हैया कुमार की गैरमौजूदगी कांग्रेस की किसी रणनीति का हिस्सा या फिर कुछ और?

डूसू चुनाव के नतीजे और कन्हैया का रुख

डूसू चुनाव में संगठन के खराब प्रदर्शन के बाद राहुल गांधी ने कन्हैया कुमार और विनोद जाखड़ के साथ समीक्षा बैठक भी की थी। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव के नतीजे 19 सितंबर 2026 को घोषित हुए थे। इस चुनाव में एबीवीपी ने केंद्रीय पैनल के चार में से तीन पद जीते, जबकि एक पद नर्दिलीय ने जीता। खासकर जो निर्दलीय शख्स जीता, वह एनएसयूआई से ही बागी होकर कैंडिडेट बना था। इस जीत के बाद राहुल गांधी ने कन्हैया कुमार का तलब किया था।

रिश्तों में खटास का संकेत

नतीजों के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने संगठन की रणनीति और उम्मीदवारों के चयन की समीक्षा की। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, राहुल गांधी ने कन्हैया कुमार और विनोद जाखड़ से चुनाव में खराब प्रदर्शन की वजह पूछी। टिकट बंटवारे, असंतुष्ट उम्मीदवारों और संगठनात्मक कमजोरी को लेकर भी सवाल उठे। यह नतीजा कांग्रेस के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण था, क्योंकि पार्टी राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के जरिए युवाओं और छात्रों के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

कन्हैया की भूमिका पर उठते सवाल

12 अक्टूबर को राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ और कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया। इस प्रदर्शन में विपक्षी दलों के नेता, युवा कार्यकर्ता और अन्य संगठन शामिल हुए। ऐसे समय में कन्हैया कुमार की सार्वजनिक भूमिका को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है, खासकर तब जब वह NSUI के प्रभारी हैं और संगठन की चुनावी रणनीति को लेकर पहले ही समीक्षा का सामना कर चुके हैं।

सोशल मीडिया पर कन्हैया की चुप्पी

उपलब्ध समाचार रिपोर्टों में 12 अक्टूबर के मार्च में राहुल गांधी और कई विपक्षी नेताओं की भूमिका का उल्लेख है, लेकिन इनके आधार पर यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि कन्हैया कुमार पूरी तरह राजनीतिक गतिविधियों से दूर हैं या उन्होंने संगठनात्मक काम बंद कर दिया है। लेकिन 10 अक्टूबर के बाद X पर राहुल गांधी या INDIA गठबंधन को लेकर पोस्ट क्यों नहीं? कन्हैया कुमार के सोशल मीडिया व्यवहार को लेकर एक और सवाल उठ रहा है।

कन्हैया की चुप्पी के पीछे क्या है?

हालांकि, सोशल मीडिया पर किसी खास विषय पर पोस्ट नहीं दिखने के कई कारण हो सकते हैं। संगठनात्मक जिम्मेदारियां, दूसरे मुद्दों पर सक्रियता, पोस्ट करने की व्यक्तिगत रणनीति या सोशल मीडिया गतिविधि में बदलाव। इनमें से किसी भी कारण की पुष्टि कन्हैया कुमार के बयान या विश्वसनीय साक्ष्य के बिना नहीं की जा सकती।

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