CJI जस्टिस सूर्यकांत ने बताई AI के न्याय व्यवस्था को मजबूत करने में सही उपयोग की महत्ता

The CSR Journal Magazine
CJI जस्टिस सूर्यकांत ने इसकी अहमियत पर जोर देते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का ज्यूडिशियल सिस्टम में इस तरह से इस्तेमाल किया जाए कि यह हमारी व्यवस्था को और मजबूत करे। CJI ने कहा कि AI बड़ी मात्रा में डेटा और रिकॉर्ड को संभालने, पैटर्न पहचानने और सिस्टम में हो रही देरी को कम करने में मदद कर सकता है। लेकिन, उन्होंने स्पष्ट किया कि AI को फैसले सुनाने के काम में दखल नहीं देना चाहिए। इस जिम्मेदारी को इंसानों के हाथों में रहना चाहिए।

सेमिनार में AI पर चर्चा

ये वक्तव्य CJI ने बेंगलुरु में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के राष्ट्रीय सम्मेलन-2026 के दौरान दिए। इस सेमिनार का विषय था ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस- विवादों की रोकथाम और समाधान’। यहां पर AI की मदद से न्यायिक प्रक्रिया को बेहतर बनाने पर चर्चा हुई, जो भारतीय न्यायालयों के लिए महत्वपूर्ण है।

लैंगिक समानता का महत्व

CJI ने कानूनी पेशे में लैंगिक समानता की आवश्यकता को भी उजागर किया। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकारी वकीलों और मुफ्त कानूनी सहायता पैनल में कम से कम 50% महिलाओं को शामिल किया जाना चाहिए। हाल में की गई स्टडीज बताती हैं कि न्यायिक अधिकारियों में 45 से 50% महिलाएं शामिल हैं, और कुछ राज्यों में यह आंकड़ा 60% तक पहुंच गया है।

महिलाओं की करियर में चुनौतियां

हालांकि कानून के क्षेत्र में महिलाओं की संख्या बढ़ी है, लेकिन करियर के अगले चरण में उनकी भागीदारी में कमी आती जा रही है। इसके पीछे कई कारण जैसे अनियमित काम के घंटे, मुवक्किलों का भरोसा नहीं मिलना और आर्थिक अस्थिरता शामिल हैं। यह स्थिति महिलाओं की करियर प्रगति के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।

AI का भविष्य

जस्टिस सूर्यकांत ने AI के विकास और उसके भूमिका को लेकर कुछ खास पहलुओं पर भी बात की। उन्होंने कहा कि तकनीक का सही और प्रभावी उपयोग ज्यूडिशियरी को और अधिक पारदर्शी बना सकता है। CJI के अनुसार, इसका उद्देश्य केवल समय की बचत करना नहीं है, बल्कि न्याय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और यथार्थवादी बनाना है।

न्यायालयों में AI का लाना

AI की बेहतर तकनीक को न्यायालयों में लाने के लिए आवश्यक है कि सभी stakeholders इस दिशा में एकजुट होकर काम करें। CJI की बातें इस ओर इशारा करती हैं कि अगर AI का सही उपयोग किया जाए, तो यह न्यायिक प्रणाली में एक नया आयाम जोड़ सकता है।

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