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February 23, 2026

JNU में हालिया हिंसा के बाद प्रशासन ने सख्त चेतावनी दी, ABVP और वामपंथियों के बीच विवाद बढ़ा

The CSR Journal Magazine
दिल्ली: जेएनयू में हाल ही में हुए विवाद ने पूरे कैंपस को हिलाकर रख दिया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। आधी रात को हुए इस झड़प का कारण वाइस चांसलर का बयान बताया गया है, जिसके चलते एबीवीपी और वामपंथी छात्रों के बीच तनाव बढ़ गया। प्रशासन का कहना है कि छात्र विकास पर हस्तक्षेप करने वाले एक ग्रुप ने सेंट्रल लाइब्रेरी को बंद कर दिया था और अन्य छात्रों को डराने की कोशिश की। इस तरह की घटनाएं न केवल शैक्षणिक माहौल को बिगाड़ती हैं, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति के प्रति भी अनादर दर्शाती हैं।

प्रशासन ने दी सख्त चेतावनी

जेएनयू प्रशासन ने अपने बयान में बेकाबू बर्ताव की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि यह अनुमन्य नहीं है कि किसी भी छात्र के शैक्षणिक हितों को बिगाड़ा जाए। प्रशासन ने सभी छात्रों को यह चेतावनी भी दी कि अगर उन्होंने गैर-जरूरी गतिविधियों में भाग लिया तो सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने सभी स्टेकहोल्डर्स से सहयोग की अपील की है ताकि कैंपस में शांति और भाईचारा बना रहे।

एबीवीपी का पक्ष

एबीवीपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह पूरी स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि वामपंथी छात्र पिछले एक हफ्ते से जेएनयू को लॉकडाउन करने की कोशिश कर रहे हैं। एबीवीपी के नेताओं का कहना है कि यह किसी भी छात्र के लिए स्वीकार्य नहीं है कि दुसरों को डराने-धमकाने के लिए भीड़ का सहारा लिया जाए। उन्होंने कहा कि वे छात्रों के हित में संवाद की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उन पर भी हमला किया गया।

वामपंथी छात्रों की प्रतिक्रिया

वामपंथी छात्रों ने एबीवीपी के आरोपों को खारिज किया है और कहा कि वे शांतिपूर्वक मार्च कर रहे थे। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय में चल रही गतिविधियों पर प्रशासन की नजर होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि एबीवीपी गुंडागर्दी कर रही है और इसकी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाया। छात्रों ने कहा कि अगर उनका शोषण हुआ तो उसकी जिम्मेदारी प्रशासन और पुलिस की होगी।

शांतिपूर्ण माहौल की आवश्यकता

जेएनयू जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में इस तरह के विवादों का खड़ा होना न केवल छात्रों के लिए, बल्कि समस्त शिक्षा प्रणाली के लिए चिंताजनक है। प्रशासन, एबीवीपी और लेफ्ट विंग के बीच चल रही बहस ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सभी पक्षों को शांति और सहयोग की आवश्यकता है। ऐसी परिस्थिति में सभी को एकजुट होकर काम करना होगा ताकि भविष्य में इसी तरह के टकराव न हों।
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