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February 15, 2026

जम्मू-कश्मीर में खुला साइबर फ्रॉड का भंडार: 8000 बेनामी अकाउंट्स से आतंकी फंडिंग का खुलासा

The CSR Journal Magazine
जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों ने हाल ही में बेनामी बैंक अकाउंट्स का उपयोग कर मनी लॉन्ड्रिंग और साइबर फ्रॉड करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। इनमें 8000 ऐसे अकाउंट शामिल हैं, जिन्हें पिछले तीन साल में फ्रीज किया गया है। इन ‘म्यूल अकाउंट्स’ का इस्तेमाल आतंकी फंडिंग के लिए भी होने की आशंका जताई जा रही है। सुरक्षा बलों ने बताया कि ये गुमनाम अकाउंट अंतरराष्ट्रीय फ्रॉड करने वाले गैंग के ‘हथियारों’ में से एक हैं।

म्यूल अकाउंट्स की पहचान

ऑफिशियल सूत्रों के अनुसार, ये बेनामी अकाउंट साइबर फ्रॉड की दुनिया में ‘सबसे कमजोर, लेकिन सबसे अहम कड़ी’ माने जा रहे हैं। इन अकाउंट का उपयोग कर क्रिमिनल मनी को क्रिप्टोकरेंसी में बदलना मुश्किल होता है। ये म्यूल अकाउंट्स साइबर दूरदर्शियों के लिए एक ताना-बाना तैयार करते हैं, जिससे वो बचकर निकल सकते हैं।

धोखाधड़ी के तरीके

जब साइबर फ्रॉड करने वाले अपने नाम से अकाउंट का इस्तेमाल नहीं करते हैं, तो वे आमतौर पर तीसरे व्यक्ति के अकाउंट का सहारा लेते हैं। अक्सर इन धोखेबाजों की शिकार कोई आम इंसान होता है, जिसे कमीशन या फायदे का लालच दिया जाता है। इस तरह, मनी लॉन्ड्रिंग का काम आसानी से हो जाता है।

बेनामी लेनदेन को रोकने की कोशिशें

सेंट्रल सिक्योरिटी एजेंसी ने जम्मू-कश्मीर पुलिस को पहले ही चेतावनी दे दी है कि वे बैंकों के संपर्क में रहें ताकि बेनामी अकाउंट का बढ़ना रोका जा सके। एक बड़े ऑपरेशन के तहत इन अकाउंट्स के संचालकों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। इस प्रयास से बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग पर नियंत्रण पाने की कोशिश की जा रही है।

NIA का ऑपरेशन

2017 से, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने जम्मू-कश्मीर में गैर-कानूनी फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं। इन कार्रवाइयों के परिणामस्वरूप हवाला ट्रांजैक्शन में काफी कमी आई है। लेकिन अधिकारियों को डर है कि नए हालात में ‘डिजिटल हवाला’ का नया तरीका सामने आ सकता है।

VPN का खतरनाक इस्तेमाल

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इन अकाउंट्स पर निर्भरता से स्कैम का पूरा इकोसिस्टम चलता है। पैसे के लिए कोई डेस्टिनेशन न होने पर, अपराध खुद ही असफल हो जाता है। हाल ही में, अधिकारियों ने चीन, मलेशिया और अन्य देशों में ऐसे लोगों का पता लगाया है, जो जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को प्राइवेट क्रिप्टो वॉलेट बनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। ये वॉलेट अक्सर वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) का उपयोग करके बनाए जाते हैं।

जम्मू-कश्मीर पुलिस की कार्रवाई

जम्मू और कश्मीर पुलिस ने घाटी में VPN के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है, क्योंकि यह आतंकवादियों और अलगाववादियों को छिपने का एक आसान तरीका देता है। हालात को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षाबलों और पुलिस ने सक्रिय कदम उठाने का फैसला किया है। इस तरह की कार्रवाई से सुरक्षा हालात को सुधारने की उम्मीद है।
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