साहित्य, विचार और संवाद का सबसे बड़ा मंच माने जाने वाला जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2026 आज से गुलाबी नगरी जयपुर में शुरू हो गया है। 15 से 19 जनवरी तक चलने वाले इस पांच दिवसीय आयोजन में देश-विदेश के लेखक, विचारक, नीति विशेषज्ञ, कलाकार और दिग्गज हस्तियां शिरकत कर रही हैं। सर्दियों की ठंड के बीच जयपुर अब विचारों की गर्माहट से सराबोर नजर आ रहा है।
देश-विदेश के दिग्गज वक्ताओं का जमावड़ा
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2026 के 19वें संस्करण में इस बार करीब 500 वक्ता हिस्सा ले रहे हैं। फेस्टिवल में कुल 266 सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें 43 देशों की भाषाओं, संस्कृतियों और विचारधाराओं का प्रतिनिधित्व देखने को मिलेगा।
इस मंच पर संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद रहेंगे। खास आकर्षण यह है कि इस बार चार नोबेल पुरस्कार विजेता, पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित लेखक और साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता रचनाकार अपने विचार साझा करेंगे।
गीतकार जावेद अख्तर, लेखिका किरण देसाई, अर्थशास्त्री एस्तेर डुफ्लो, समाजसेविका सुधा मूर्ति, वर्ल्ड वाइड वेब के जनक टिम बर्नर्स-ली, शतरंज ग्रैंडमास्टर विश्वनाथन आनंद और आध्यात्मिक वक्ता गौर गोपाल दास जैसे नाम इस फेस्टिवल की शोभा बढ़ा रहे हैं।

साहित्य के साथ टेक्नोलॉजी और वैश्विक मुद्दों पर संवाद
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल अब सिर्फ साहित्य तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह समकालीन दुनिया के जटिल मुद्दों पर संवाद का बड़ा मंच बन चुका है। इस साल साहित्य, कविता और पुस्तकों के साथ-साथ टेक्नोलॉजी, राजनीति, इतिहास, अर्थशास्त्र, विज्ञान, खेल और सिनेमा जैसे विषयों पर भी गहन चर्चा होगी।
फेस्टिवल में बांग्लादेश की हालिया राजनीतिक स्थिति, वेनेजुएला की उथल-पुथल, रूस-ईरान जैसे देशों से जुड़ी ऊर्जा सुरक्षा और जियो-पॉलिटिक्स पर विशेष सत्र रखे गए हैं। इसके अलावा भारत के पड़ोसी देशों में चल रहे कॉन्फ्लिक्ट और वैश्विक राजनीति में भारत की भूमिका पर भी विशेषज्ञ अपनी राय रखेंगे।
संगीत, किताबें और खुले संवाद की खास पहचान
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल की पहचान उसके खुले संवाद और सांस्कृतिक विविधता से है। यहां बुक स्टॉल्स पर देश-विदेश के लेखकों की नई और पुरानी किताबें पाठकों का इंतजार कर रही हैं। पाठकों को अपने पसंदीदा लेखकों से सीधे बातचीत करने का मौका भी मिलेगा।
इसके साथ ही म्यूजिक प्रोग्राम्स इस आयोजन को और खास बनाते हैं, जहां संगीत और साहित्य का खूबसूरत संगम देखने को मिलता है। शाम ढलते ही जयपुर की ठंडी फिज़ा में विचारों के साथ सुरों की मिठास घुल जाती है। हिंदी भाषा, राजस्थानी संस्कृति और क्षेत्रीय परंपराओं पर इस बार विशेष फोकस रखा गया है।


