अमेरिका और इजराइल के हमलों में कई शीर्ष सैन्य और राजनीतिक नेताओं की मौत के बावजूद ईरान की सैन्य और रणनीतिक ताकत कमजोर नहीं पड़ी है। इसकी वजह है देश की बहुस्तरीय सत्ता संरचना, जहां धार्मिक नेतृत्व, सेना और राजनीतिक तंत्र मिलकर फैसले लेते हैं और युद्ध की दिशा तय करते हैं।
सुप्रीम लीडर अंतिम फैसले का केंद्र
ईरान की सत्ता का सबसे मजबूत स्तंभ अयातुल्ला अली खामेनेई हैं। देश की राजनीतिक और सैन्य व्यवस्था में उनका अंतिम अधिकार होता है। चाहे युद्ध की रणनीति हो या अंतरराष्ट्रीय नीति, हर बड़ा फैसला उन्हीं की मंजूरी से लागू होता है। मौजूदा संघर्ष में भी वे सभी संस्थाओं को एकजुट रखकर नेतृत्व दे रहे हैं। यही वजह है कि शीर्ष नेताओं के मारे जाने के बावजूद सिस्टम बिखरा नहीं।
IRGC जवाबी हमलों की रीढ़
ईरान की असली सैन्य ताकत Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) है, जो पारंपरिक सेना से भी ज्यादा प्रभावशाली मानी जाती है।
1. अहमद वाहिदी जैसे अनुभवी नेता इसकी रणनीति संभाल रहे हैं
2. मिसाइल, ड्रोन और साइबर युद्ध में IRGC की अहम भूमिका है
3. क्षेत्रीय प्रॉक्सी नेटवर्क के जरिए अप्रत्यक्ष हमले भी किए जाते हैं
IRGC की संरचना इतनी मजबूत है कि शीर्ष कमांडरों के नुकसान के बावजूद इसकी कार्यक्षमता पर ज्यादा असर नहीं पड़ा।
कुद्स फोर्स और गुप्त रणनीति
ईरान की बाहरी सैन्य रणनीति का जिम्मा कुद्स फोर्स के पास है, जिसका नेतृत्व इस्माइल क़ानी कर रहे हैं। वे मध्य पूर्व में ईरान के प्रभाव को बनाए रखने के लिए हिज़्बुल्लाह जैसे सहयोगी संगठनों के साथ समन्वय करते हैं।
1. गुप्त ऑपरेशन
2. खुफिया नेटवर्क
3. प्रॉक्सी युद्ध
इन सबके जरिए ईरान सीधे टकराव के बजाय रणनीतिक जवाब देता है। क़ानी की भूमिका पर्दे के पीछे रहकर युद्ध की दिशा तय करने में बेहद अहम मानी जाती है।
राजनीतिक नेतृत्व और कूटनीतिक मोर्चा
जहां एक तरफ सैन्य कार्रवाई जारी है, वहीं दूसरी तरफ ईरान कूटनीतिक संतुलन भी बनाए हुए है।
1. मसूद पेज़ेश्कियन एक सुधारवादी राष्ट्रपति के रूप में आर्थिक और सामाजिक मुद्दों पर काम कर रहे हैं
2. अब्बास अराकची अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ईरान का पक्ष रख रहे हैं
3. मोहम्मद बाकेर कालिबाफ नीति निर्माण और आंतरिक राजनीति में सक्रिय हैं
हालांकि ईरान में राष्ट्रपति की शक्तियां सीमित होती हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव को संभालने में इन नेताओं की भूमिका अहम है।
न्यायपालिका और आंतरिक नियंत्रण
युद्ध के दौरान देश के भीतर स्थिरता बनाए रखना भी बड़ी चुनौती होती है।
इस भूमिका को मोहसनी-एजेई निभा रहे हैं।
1. विरोध प्रदर्शनों पर नियंत्रण
2. सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय
3. कानून व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना
सरकार और न्यायपालिका मिलकर यह सुनिश्चित करती हैं कि बाहरी युद्ध का असर आंतरिक अस्थिरता में न बदले।
ईरान की ताकत उसकी जटिल लेकिन संगठित सत्ता संरचना में छिपी है। यहां केवल एक नेता या संस्था नहीं, बल्कि सुप्रीम लीडर, IRGC, कुद्स फोर्स, राजनीतिक नेतृत्व और न्यायपालिका मिलकर फैसले लेते हैं।
इसी सामूहिक नेतृत्व मॉडल के कारण भारी सैन्य नुकसान के बावजूद ईरान न केवल स्थिर बना हुआ है, बल्कि अमेरिका और इजराइल के खिलाफ जवाबी रणनीति भी लगातार जारी रखे हुए है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह संतुलन ईरान को युद्ध में कितनी मजबूती देता है और क्या वह कूटनीति के जरिए तनाव को कम करने में सफल हो पाता है।
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