app-store-logo
play-store-logo
January 25, 2026

बिलासपुर में इंदौर जैसे हालात, 400 करोड़ खर्च के बाद भी 59 वार्डों में मलमूत्र मिश्रित, नालियों में डूबी पाइपलाइनें

The CSR Journal Magazine

बिलासपुर शहर की पेयजल व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। हालिया सर्वेक्षण में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि शहर के 59 वार्डों में पेयजल पाइपलाइनें नालियों और नालों के भीतर या उनके बीच से गुजर रही हैं। इससे मलमूत्र युक्त गंदे पानी के पेयजल में मिल जाने का गंभीर खतरा बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति डायरिया, उल्टी-दस्त और अन्य जलजनित बीमारियों को न्योता दे रही है।

तालापारा और तारबाहर में पहले भी फैल चुकी है बीमारी

शहर के तालापारा और तारबाहर जैसे इलाकों में पहले भी दूषित पानी की वजह से उल्टी-दस्त की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार पानी से बदबू आती है, फिर भी मजबूरी में उसी पानी का उपयोग करना पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग के लिए यह स्थिति चिंता का विषय है, क्योंकि ऐसी लापरवाही बड़े स्वास्थ्य संकट में बदल सकती है।

इंदौर की घटना ने बढ़ाई चिंता

मध्य प्रदेश के इंदौर नगर निगम क्षेत्र में हाल ही में उल्टी-दस्त से 16 लोगों की मौत के बाद बिलासपुर की स्थिति को भी गंभीर माना जा रहा है। इंदौर जैसी घटना दोहराए जाने की आशंका से प्रशासन अलर्ट मोड में है। शहर में अब भी 267 ऐसे स्थान चिन्हित किए गए हैं, जहां पेयजल पाइपलाइनें नालियों के संपर्क में हैं।

400 करोड़ खर्च, फिर भी शुद्ध पानी के लिए संघर्ष

नगर निगम ने पिछले 10 वर्षों में पेयजल व्यवस्था सुधारने के नाम पर 400 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं। वर्ष 2007 से 2017 के बीच जल आवर्धन योजना के तहत 81 करोड़ रुपये और अमृत मिशन के अंतर्गत 100 करोड़ रुपये खर्च कर करीब 276 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई गई। इसके बावजूद शहरवासियों को आज भी साफ और सुरक्षित पानी के लिए जूझना पड़ रहा है।

पुरानी और नई पाइपलाइनों का उलझाव बना बड़ी समस्या

शहर के कई हिस्सों में दो से तीन अलग-अलग योजनाओं की पाइपलाइनें एक ही स्थान पर बिछी हुई हैं। निगम कर्मचारियों के अनुसार, पुरानी जंग लगी पाइपलाइनों और नई पाइपलाइनों के आपसी उलझाव के कारण लीकेज सुधारने में घंटों लग जाते हैं। इससे न केवल जलापूर्ति बाधित होती है, बल्कि दूषित पानी के सप्लाई में मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है।

चार किलोमीटर पाइपलाइन बदले जाने का दावा

नगर निगम के कार्यपालन अभियंता अनुपम तिवारी का कहना है कि शहरी क्षेत्र में लगभग चार किलोमीटर लंबी उन पाइपलाइनों को बदला जा चुका है, जो नालियों और नालों से होकर गुजर रही थीं। अमृत मिशन के तहत अब तक 200 किलोमीटर से अधिक पाइपलाइन बदली जा चुकी है। हालांकि जमीनी हकीकत यह है कि अब भी कई संवेदनशील इलाके जोखिम में हैं।

बिरकोना प्लांट की खराबी से गहराया जल संकट

बिरकोना स्थित अमृत मिशन के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में वाल फटने से शहर की जलापूर्ति पूरी तरह प्रभावित हो गई। 31 दिसंबर की रात से शुरू हुई इस समस्या के कारण अशोक नगर और बिरकोना फिल्टर प्लांट से पानी की सप्लाई ठप है। नगर निगम फिलहाल 22 टैंकरों के जरिए करीब 40 हजार घरों तक पानी पहुंचा रहा है।

पुराने पम्प भी नहीं दे पा रहे राहत

वैकल्पिक व्यवस्था के तहत निगम ने 122 पुराने पम्प चालू किए, लेकिन जलस्तर गिरने और तकनीकी खराबी के कारण कई पम्पों से पानी की जगह हवा निकल रही है। इससे तालापारा, सरकंडा, जरहाभाठा, सिविल लाइन जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में जल संकट और गहरा गया है।

निगम आयुक्त का दावा – जल्द सुधरेगी स्थिति

नगर निगम आयुक्त प्रकाश सर्वे ने वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण कर अधिकारियों को वैकल्पिक जलापूर्ति और सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश दिए हैं। उनका कहना है कि वाल की मरम्मत कर ली गई है और दो से तीन दिनों में स्थिति पर काबू पा लिया जाएगा। हालांकि सवाल यह है कि क्या बिलासपुर भविष्य में इंदौर जैसी त्रासदी से बच पाएगा?

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates
App Store – https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540
Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos