सड़क हादसे में घायलों को मिलेगा ₹1.5 लाख तक का कैशलेस इलाज, जानिए PM-RAHAT योजना के नियम और लाभ
सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति के लिए शुरुआती कुछ मिनट और घंटे जीवन बचाने में निर्णायक साबित हो सकते हैं। लेकिन कई बार अस्पताल पहुंचने के बाद इलाज के खर्च, पैसे की व्यवस्था और औपचारिकताओं को लेकर परिवार परेशान हो जाता है। ऐसी स्थिति में समय पर चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री सड़क दुर्घटना पीड़ित अस्पताल में भर्ती एवं सुनिश्चित उपचार योजना (PM-RAHAT) शुरू की है। इस योजना के तहत मोटर वाहन से हुई सड़क दुर्घटना के पात्र पीड़ित को दुर्घटना की तारीख से अधिकतम सात दिनों तक, प्रति व्यक्ति 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य यह है कि घायल व्यक्ति को शुरुआती जरूरी इलाज के लिए अपनी जेब से तत्काल पैसे जुटाने की चिंता न करनी पड़े और आर्थिक परेशानी के कारण उपचार में देरी न हो।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 फरवरी 2026 को इस योजना की शुरुआत की थी। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय इसके लिए नोडल मंत्रालय है। योजना का आधार मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 162 है। इसमें आपातकालीन चिकित्सा सहायता, अस्पतालों के साथ समन्वय, पुलिस की पुष्टि और इलाज के खर्च का भुगतान करने की व्यवस्था को एकीकृत किया गया है।
PM-RAHAT योजना की 7 बड़ी बातें, जो हर वाहन चालक और आम नागरिक को जाननी चाहिए
1. सात दिनों तक ₹1.5 लाख तक कैशलेस इलाज
योजना के अंतर्गत पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ित को प्रति व्यक्ति अधिकतम ₹1.5 लाख तक उपचार की सुविधा मिलती है। यह सुविधा दुर्घटना की तारीख से अधिकतम सात दिनों के लिए है। इसका उद्देश्य शुरुआती चिकित्सा खर्च का बोझ कम करना है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि हर मरीज को स्वतः पूरी राशि मिल जाएगी। भुगतान निर्धारित उपचार पैकेज और पात्रता के अनुसार होगा।
2. आय या बीमा की पूर्व पात्रता पर निर्भर नहीं
यह योजना मोटर वाहन से हुई सड़क दुर्घटना के पीड़ितों के लिए है। इसका लाभ किसी एक आय वर्ग तक सीमित नहीं है और इसके लिए पहले से आयुष्मान भारत योजना का लाभार्थी होना आवश्यक नहीं है। हालांकि, उपचार योजना के निर्धारित नियमों और अस्पताल की संबद्धता के अधीन होगा।
3. दुर्घटना होने पर 112 पर करें फोन
दुर्घटना स्थल पर मौजूद व्यक्ति, घायल या मदद करने वाला नागरिक आपातकालीन सहायता के लिए 112 पर फोन कर सकता है। इस माध्यम से निकटतम योजना-संबद्ध अस्पताल की जानकारी और जरूरत पड़ने पर एंबुलेंस सहायता मांगी जा सकती है। दुर्घटना के बाद सहायता लेने के लिए पहले किसी कार्यालय में आवेदन करने की जरूरत नहीं है।
4. गंभीर मरीजों को 48 घंटे तक स्थिरीकरण उपचार
योजना में गैर-जीवन-घातक मामलों में 24 घंटे तक और जीवन-घातक मामलों में 48 घंटे तक स्थिरीकरण उपचार का प्रावधान है। इसका उद्देश्य मरीज की स्थिति को संभालना और जरूरी शुरुआती चिकित्सा उपलब्ध कराना है। पुलिस की पुष्टि के लिए भी निर्धारित समय-सीमा है। यह समय-सीमा सात दिनों की कुल उपचार सुविधा से अलग प्रावधान है।
5. पुलिस की पुष्टि और डिजिटल प्रक्रिया
दुर्घटना की सूचना और पुलिस की पुष्टि के लिए इलेक्ट्रॉनिक विस्तृत दुर्घटना रिपोर्ट (eDAR) मंच का इस्तेमाल होता है। अस्पताल उपचार और दावे से संबंधित प्रक्रिया राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के टीएमएस 2.0 मंच पर पूरी करता है। सामान्य मामलों में पुलिस को जवाब देने के लिए 24 घंटे और जीवन-घातक मामलों में 48 घंटे तक की समय-सीमा निर्धारित है।
6. इलाज का भुगतान मरीज नहीं, निर्धारित व्यवस्था से
अस्पतालों को योजना के तहत दिए गए उपचार का भुगतान मोटर वाहन दुर्घटना निधि (MVAF) से किया जाता है। दुर्घटना करने वाला वाहन बीमित होने पर सामान्य बीमा कंपनियों के योगदान से और बिना बीमा वाले वाहन अथवा हिट-एंड-रन मामलों में केंद्र सरकार के बजटीय प्रावधान से भुगतान किया जाता है। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा दावा मंजूर किए जाने के बाद भुगतान के लिए 10 दिनों की समय-सीमा निर्धारित है।
7. पात्र मरीज को इलाज से मना करने पर कार्रवाई
योजना के नियमों के अनुसार पात्र पीड़ित को भर्ती करने या उपचार देने से इनकार करना अनुपालन में कमी माना जा सकता है। संबंधित राज्य प्राधिकरण अस्पताल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई, संबद्धता निलंबित करने या योजना से बाहर करने जैसे कदम उठा सकते हैं। शिकायत की स्थिति में जिला सड़क सुरक्षा समिति द्वारा नामित शिकायत निवारण अधिकारी से संपर्क किया जा सकता है।
योजना का लाभ लेने के लिए घायल व्यक्ति को क्या करना चाहिए?
पहला कदम: आपातकालीन सहायता लें। दुर्घटना होने पर 112 पर फोन करें। दुर्घटना का स्थान, घायलों की संख्या और उनकी स्थिति की जानकारी दें।
दूसरा कदम: योजना से जुड़े अस्पताल पहुंचें। 112 से निकटतम निर्धारित अस्पताल की जानकारी और एंबुलेंस सहायता मांगी जा सकती है। अस्पताल पहुंचने पर दुर्घटना और उपचार संबंधी प्रक्रिया शुरू की जाती है।
तीसरा कदम: अस्पताल को योजना के बारे में बताएं। अस्पताल प्रशासन दुर्घटना की जानकारी दर्ज कर उपचार और पुलिस पुष्टि की डिजिटल प्रक्रिया शुरू करता है। उपलब्ध पहचान या दुर्घटना संबंधी दस्तावेज हों तो दें, लेकिन आपातकालीन सहायता लेने में दस्तावेज जुटाने के कारण देरी न करें।
चौथा कदम: शिकायत कहां करें? यदि पात्रता के बावजूद योजना के अंतर्गत इलाज देने से इनकार किया जाए या भुगतान संबंधी शिकायत हो, तो संबंधित जिला सड़क सुरक्षा समिति के शिकायत निवारण अधिकारी से संपर्क करें। जरूरत पड़ने पर मामला जिला कलेक्टर और राज्य सड़क सुरक्षा परिषद तक पहुंचाया जा सकता है।
क्या निजी अस्पताल में भी मिलेगा लाभ?
योजना का लाभ केवल सरकारी अस्पतालों तक सीमित नहीं है। योजना के लिए निर्धारित अस्पतालों में वे अस्पताल भी शामिल हो सकते हैं जो आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से संबद्ध हैं और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के संबंधित नियमों को पूरा करते हैं। इसके अलावा, राज्य सरकारें दिशा-निर्देशों के अनुसार अन्य अस्पतालों को भी योजना में शामिल कर सकती हैं। इसलिए किसी निजी अस्पताल में जाने से पहले यह सुनिश्चित करना उचित है कि वह PM-RAHAT के तहत निर्धारित अस्पताल है। यह भी ध्यान रखना चाहिए कि ₹1.5 लाख की सीमा योजना के अंतर्गत निर्धारित उपचार की है। इसे किसी भी अस्पताल में किए गए हर प्रकार के खर्च की असीमित प्रतिपूर्ति नहीं समझना चाहिए। योजना के उपचार पैकेज, अस्पताल की संबद्धता और पात्रता संबंधी नियम लागू होंगे।
अब तक कितने लोगों को मिला लाभ?
केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 12 अगस्त 2026 को राज्यसभा में दी गई जानकारी में बताया कि 31 जुलाई 2026 तक देश के 34 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 22,481 दुर्घटना पीड़ितों को योजना के अंतर्गत लाभ मिला था। इस अवधि तक राज्य स्वास्थ्य एजेंसियों ने अस्पतालों के दावों में से 12.59 करोड़ रुपये मंजूर किए थे, जिनमें से 10.56 करोड़ रुपये का भुगतान अस्पतालों को किया जा चुका था। महाराष्ट्र के लिए इसी सरकारी विवरण में कुल 300 मामले दर्ज किए गए थे। इनमें 49 मामले स्वीकृत थे, 197 मामले निर्धारित समय में पुलिस की प्रतिक्रिया न मिलने के बाद योजना से बाहर हुए और 54 जीवन-घातक मामले पुलिस की ओर से पात्र नहीं पाए गए। ये आंकड़े 31 जुलाई 2026 तक की स्थिति दर्शाते हैं; इन्हें वर्तमान तारीख के कुल आंकड़े नहीं माना जाना चाहिए। इन आंकड़ों से पता चलता है कि योजना शुरू होने के बाद हजारों लोगों तक सहायता पहुंची, लेकिन इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अस्पतालों की उपलब्धता, पुलिस की समय पर पुष्टि और दावों के भुगतान की प्रक्रिया महत्वपूर्ण बनी हुई है।
राह-वीर की भूमिका भी महत्वपूर्ण
सड़क दुर्घटना के समय घायल व्यक्ति की मदद करने वाले आम नागरिक को राह-वीर कहा जाता है। सरकार ने ऐसे मददगारों को अनावश्यक कानूनी परेशानी से सुरक्षा देने के लिए नियम बनाए हैं। सद्भावना से घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति को सामान्यतः अपनी पहचान सार्वजनिक करने या पुलिस के पास अनावश्यक रूप से रुकने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। वह गवाह बनने के लिए स्वेच्छा से आगे आ सकता है। सरकार की राह-वीर योजना के तहत पात्र व्यक्ति को घायल को दुर्घटना के पहले घंटे में चिकित्सा सहायता दिलाने में मदद करने पर ₹25,000 का पुरस्कार और प्रशंसा प्रमाणपत्र भी मिल सकता है। यह पुरस्कार PM-RAHAT के उपचार लाभ से अलग है।
समय पर इलाज और आर्थिक सुरक्षा, दोनों जरूरी
PM-RAHAT योजना का सबसे बड़ा उद्देश्य यह है कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को पैसे की कमी के कारण शुरुआती इलाज से वंचित न रहना पड़े। ₹1.5 लाख तक का कैशलेस उपचार, 112 से एंबुलेंस और अस्पताल की जानकारी, पुलिस तथा अस्पताल के बीच डिजिटल समन्वय और भुगतान की निर्धारित व्यवस्था इसके प्रमुख आधार हैं। हालांकि, योजना की सफलता केवल घोषणा या निर्धारित राशि से नहीं मापी जाएगी। इसके लिए जरूरी है कि अधिक से अधिक अस्पताल योजना से जुड़ें, पात्र मरीजों को समय पर उपचार मिले, पुलिस पुष्टि में अनावश्यक देरी न हो और शिकायतों का प्रभावी समाधान किया जाए। सड़क दुर्घटना के समय सबसे महत्वपूर्ण बात है कि घायल को जल्द से जल्द चिकित्सा सहायता मिले। दुर्घटना दिखे तो 112 पर फोन करें, मदद के लिए आगे आएं और आर्थिक चिंता के कारण उपचार में देरी न होने दें।
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