देशभर के 1300 रेलवे स्टेशनों का होगा कायाकल्प, अगले 50 साल की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार हो रहा मास्टर प्लान
भारतीय रेलवे देश के रेलवे स्टेशनों को आधुनिक और यात्री सुविधाओं से लैस बनाने की दिशा में बड़े स्तर पर काम कर रहा है। इसके तहत देशभर के करीब 1300 रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास किया जा रहा है। रेलवे की यह योजना केवल पुराने स्टेशन भवनों की मरम्मत या उनका बाहरी स्वरूप बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की रेल यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए स्टेशनों की पूरी संरचना को आधुनिक बनाने की है। खास बात यह है कि इन स्टेशनों का विकास अगले 50 वर्षों में संभावित यात्री संख्या, रेलगाड़ियों की आवाजाही और यात्रियों की बदलती जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को जयपुर में इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि देशभर में लगभग 1300 रेलवे स्टेशनों पर पुनर्विकास का काम चल रहा है। इनमें से करीब 400 स्टेशनों का काम पूरा हो चुका है। रेलवे की इस परियोजना में सुरक्षा, यात्री सुविधाओं, स्टेशन की क्षमता और स्थानीय वास्तुकला को विशेष महत्व दिया जा रहा है। इस पूरी योजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह भी है कि पुनर्विकास के दौरान स्टेशनों पर रेलगाड़ियों का संचालन बंद नहीं किया जा रहा है। यानी निर्माण कार्य के साथ-साथ यात्रियों की आवाजाही और रेल परिचालन भी जारी रखा जा रहा है।
अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत बदल रही स्टेशनों की तस्वीर
रेलवे स्टेशनों के इस व्यापक कायाकल्प का प्रमुख आधार केंद्र सरकार की अमृत भारत स्टेशन योजना है। इस योजना की शुरुआत दिसंबर 2022 में की गई थी। इसका उद्देश्य देश के रेलवे स्टेशनों को चरणबद्ध तरीके से आधुनिक सुविधाओं से लैस करना और उन्हें शहरों के विकास केंद्र के रूप में तैयार करना है। इसके तहत स्टेशनों के लिए अलग-अलग मास्टर प्लान बनाए जाते हैं। प्रत्येक स्टेशन की जरूरत, वहां आने-जाने वाले यात्रियों की संख्या, उपलब्ध जमीन, भविष्य में यातायात बढ़ने की संभावना और स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर विकास कार्य तय किए जाते हैं। योजना के शुरुआती चरण में 1,337 स्टेशनों की पहचान की गई थी। बाद में यह संख्या बढ़कर 1,340 हो गई। जुलाई 2026 में जारी सरकारी जानकारी के मुताबिक, इस योजना के तहत 261 स्टेशनों का पुनर्विकास पूरा किया जा चुका था। वहीं, रेल मंत्री के जयपुर में दिए गए ताजा बयान में लगभग 400 स्टेशनों का काम पूरा होने की जानकारी सामने आई है। इन आंकड़ों में योजना के अलग-अलग चरणों और व्यापक पुनर्विकास कार्यों का अंतर हो सकता है। इस परियोजना का उद्देश्य केवल स्टेशन भवनों को आकर्षक बनाना नहीं, बल्कि यात्रियों के पूरे सफर को सुविधाजनक बनाना है। इसके लिए स्टेशन के प्रवेश और निकास द्वारों को बेहतर बनाने, यात्रियों के आने-जाने के रास्तों को व्यवस्थित करने, प्रतीक्षालयों का विस्तार करने और प्लेटफॉर्म पर सुविधाएं बढ़ाने जैसे काम किए जा रहे हैं।
स्टेशन पर मिलेंगी आधुनिक यात्री सुविधाएं
पुनर्विकसित रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की सुविधा के लिए कई तरह की व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं। इनमें आधुनिक प्रतीक्षालय, साफ-सुथरे शौचालय, बेहतर बैठने की व्यवस्था, पीने के पानी की सुविधा और व्यवस्थित टिकट एवं यात्री सूचना प्रणाली शामिल हैं। इसके अलावा यात्रियों की संख्या के अनुसार फुट ओवरब्रिज और भूमिगत रास्तों को चौड़ा करने की योजना भी शामिल है। बड़े स्टेशनों पर एयर कॉन्कोर्स यानी छत से ढके विशाल यात्री परिसर विकसित किए जा रहे हैं। इससे यात्रियों को प्लेटफॉर्म पर पहुंचने से पहले एक ही स्थान पर बैठने, प्रतीक्षा करने और अन्य जरूरी सुविधाओं का लाभ मिल सकता है। कुछ स्टेशनों पर कार्यकारी प्रतीक्षालय, बेहतर प्रकाश व्यवस्था, आधुनिक संकेतक और व्यावसायिक सुविधाओं को भी विकसित किया जा रहा है। स्टेशन परिसर में लिफ्ट, एस्केलेटर और दिव्यांग यात्रियों के लिए रैंप जैसी सुविधाओं पर भी जोर दिया जा रहा है। दृष्टिबाधित यात्रियों की सुविधा के लिए स्पर्श आधारित मार्ग और बेहतर संकेत व्यवस्था विकसित करने का प्रावधान है। प्लेटफॉर्म पर यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए शेड, बेहतर सतह तथा प्रकाश व्यवस्था को भी उन्नत किया जा रहा है।
स्थानीय संस्कृति और वास्तुकला को भी मिलेगी पहचान
रेलवे की पुनर्विकास योजना में एक महत्वपूर्ण पहलू स्थानीय संस्कृति और वास्तुकला को शामिल करना है। देश के अलग-अलग हिस्सों की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान अलग है। ऐसे में सभी स्टेशनों को एक जैसी इमारत का स्वरूप देने के बजाय स्थानीय विशेषताओं को ध्यान में रखकर उनका विकास करने पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह है कि स्टेशन केवल रेल यात्रा का माध्यम न रहें, बल्कि संबंधित शहर और क्षेत्र की पहचान को भी प्रदर्शित करें। स्टेशन के डिजाइन में स्थानीय स्थापत्य शैली, सांस्कृतिक प्रतीकों और क्षेत्रीय विशेषताओं को जगह दी जा सकती है। इससे यात्रियों को स्टेशन पर पहुंचते ही उस क्षेत्र की पहचान का अनुभव होगा। इसी क्रम में ‘वन स्टेशन वन प्रोडक्ट’ पहल के तहत स्थानीय उत्पादों की बिक्री के लिए भी स्थान उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इससे स्थानीय कारीगरों, छोटे कारोबारियों और पारंपरिक उत्पाद बनाने वाले लोगों को अपने सामान के प्रदर्शन और बिक्री का अवसर मिल सकता है। स्टेशन परिसर में स्थानीय उत्पादों की उपलब्धता से यात्रियों को भी क्षेत्रीय वस्तुएं खरीदने का मौका मिलेगा।
शहर के विकास केंद्र के रूप में तैयार होंगे स्टेशन
रेलवे की सोच अब स्टेशन को केवल ट्रेन पकड़ने और उतरने की जगह तक सीमित रखने की नहीं है। पुनर्विकास योजना में स्टेशन को शहर के दोनों हिस्सों से जोड़ने और अन्य परिवहन साधनों के साथ बेहतर तालमेल बनाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। कई शहरों में रेलवे स्टेशन के एक तरफ बाजार और दूसरी तरफ आवासीय क्षेत्र होते हैं। स्टेशन परिसर के बेहतर विकास से दोनों तरफ के हिस्सों के बीच आवागमन आसान बनाया जा सकता है। इसके लिए प्रवेश मार्ग, सड़क संपर्क, पार्किंग और यातायात प्रबंधन को बेहतर करने की योजना है। बहु-माध्यम परिवहन व्यवस्था के तहत रेलवे स्टेशन को बस सेवा, मेट्रो, टैक्सी और अन्य सार्वजनिक परिवहन साधनों से जोड़ने पर भी जोर है। इससे यात्रियों को ट्रेन से उतरने के बाद अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए अलग-अलग साधनों के बीच आसानी से बदलाव करने में मदद मिलेगी। बड़े स्टेशनों पर पार्किंग और वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित करने की व्यवस्था भी की जा रही है। रेलवे के मुताबिक, विकास कार्यों में पर्यावरण के अनुकूल उपायों और टिकाऊ सुविधाओं को भी जरूरत तथा उपलब्धता के अनुसार शामिल किया जाएगा।
ट्रेन संचालन बंद किए बिना चल रहा निर्माण कार्य
इस पूरी परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि रेलवे को पुराने और व्यस्त स्टेशनों का पुनर्विकास करते समय नियमित रेल परिचालन भी जारी रखना है। सामान्य तौर पर किसी बड़े रेलवे स्टेशन पर निर्माण कार्य करने के लिए यात्रियों की आवाजाही और परिचालन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। लेकिन भारतीय रेलवे का प्रयास है कि निर्माण कार्य के दौरान ट्रेनों का संचालन बंद न करना पड़े। इसके लिए निर्माण कार्य अलग-अलग चरणों में किया जा रहा है। जहां जरूरत है, वहां यात्रियों के आने-जाने के रास्तों को अस्थायी रूप से बदला जा रहा है। निर्माण क्षेत्र को परिचालन वाले हिस्से से अलग रखने, सुरक्षा घेरा बनाने और यात्रियों की आवाजाही को नियंत्रित करने जैसे उपाय किए जा रहे हैं। रेल मंत्री के मुताबिक, रेलवे बिना रेल परिचालन रोके स्टेशनों का पुनर्विकास कर रहा है। हालांकि, इस तरह के निर्माण कार्य में कई व्यावहारिक चुनौतियां भी हैं। पुराने स्टेशनों पर पानी और सीवर की पाइपलाइन, बिजली की लाइन, संचार केबल और सिग्नल व्यवस्था जैसी मौजूदा सुविधाओं को सुरक्षित रखते हुए निर्माण करना पड़ता है। इसके अलावा जमीन की उपलब्धता, यात्री सुरक्षा और विभिन्न विभागों से जरूरी मंजूरियां भी परियोजना की गति को प्रभावित कर सकती हैं। रेलवे की प्राथमिकता है कि निर्माण के दौरान यात्रियों और रेल कर्मचारियों की सुरक्षा से समझौता न हो। इसीलिए निर्माण कार्यों को स्टेशन की परिचालन जरूरतों के अनुसार चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है।
त्योहारों में 18 हजार विशेष ट्रेनों का संचालन
रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास के साथ ही त्योहारों के दौरान बढ़ने वाली यात्री भीड़ को संभालना भी रेलवे के सामने एक बड़ी चुनौती है। दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ के अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में बड़ी संख्या में लोग अपने घरों और गांवों की ओर यात्रा करते हैं। खासकर दिल्ली, मुंबई, सूरत, अहमदाबाद और दूसरे बड़े औद्योगिक शहरों से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल जाने वाले यात्रियों की संख्या काफी बढ़ जाती है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस वर्ष दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ के अवसर पर करीब 18,000 विशेष ट्रेनें चलाई जा रही हैं। पिछले वर्ष इसी त्योहार अवधि में लगभग 12,000 विशेष ट्रेनों का संचालन किया गया था। इस तरह रेलवे ने यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए विशेष रेल सेवाओं में उल्लेखनीय वृद्धि की है। विशेष ट्रेनों का संचालन नियमित ट्रेनों में उपलब्ध सीटों के अतिरिक्त यात्रा की सुविधा देने के लिए किया जाता है। रेलवे अलग-अलग मार्गों पर यात्रियों की मांग, उपलब्ध रेल डिब्बों और परिचालन क्षमता के अनुसार इन ट्रेनों की व्यवस्था करता है। पिछले वर्षों के आंकड़े भी त्योहारों के दौरान विशेष रेल सेवाओं की बढ़ती जरूरत को दर्शाते हैं। दिसंबर 2025 में संसद में दिए गए रेल मंत्रालय के जवाब के मुताबिक, दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ के लिए अक्टूबर और नवंबर 2025 के दौरान 12,300 से अधिक विशेष ट्रेनें चलाई गई थीं। इससे पहले 2024 में इन त्योहारों के लिए लगभग 7,990 विशेष ट्रेन सेवाएं संचालित की गई थीं।
बड़े स्टेशनों पर भीड़ प्रबंधन पर विशेष ध्यान
त्योहारों के दौरान केवल अतिरिक्त ट्रेनें चलाना ही पर्याप्त नहीं होता। रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की भीड़ को व्यवस्थित करना भी जरूरी होता है। इसके लिए बड़े स्टेशनों पर प्रवेश और निकास व्यवस्था, प्रतीक्षालय, प्लेटफॉर्म तक पहुंचने के रास्ते और यात्री सूचना प्रणाली को बेहतर बनाने की जरूरत होती है। विशेष रूप से उन स्टेशनों पर अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ती है, जहां से त्योहारों के समय बड़ी संख्या में यात्री यात्रा शुरू करते हैं। यात्रियों को ट्रेन की जानकारी देने, भीड़ को अलग-अलग स्थानों पर व्यवस्थित रखने और प्लेटफॉर्म पर अनावश्यक भीड़ जमा होने से रोकने के लिए रेलवे प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ती है। नई स्टेशन संरचनाओं में चौड़े फुट ओवरब्रिज, बेहतर यात्री प्रतीक्षालय और व्यवस्थित प्रवेश-निकास व्यवस्था इसी जरूरत को ध्यान में रखकर विकसित की जा रही है। भविष्य में यात्रियों की संख्या बढ़ने पर भी स्टेशन की व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव न पड़े, इसके लिए पर्याप्त जगह और सुविधाओं का प्रावधान करने की कोशिश की जा रही है।
अगले 50 वर्षों की जरूरतों पर आधारित है योजना
रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास की सबसे महत्वपूर्ण बात इसका दीर्घकालिक दृष्टिकोण है। रेलवे केवल आज की यात्री संख्या को ध्यान में रखकर निर्माण नहीं कर रहा, बल्कि आने वाले दशकों में रेल यात्रियों की संभावित संख्या और सुविधाओं की बढ़ती मांग को भी योजना में शामिल कर रहा है। भारत में शहरीकरण, औद्योगिक विकास और लोगों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है। ऐसे में रेलवे स्टेशनों पर भी यात्रियों का दबाव बढ़ने की संभावना है। भविष्य में अधिक ट्रेनें, बेहतर संपर्क सुविधाएं और आधुनिक यात्री सेवाओं की जरूरत पड़ सकती है। इसी कारण स्टेशन भवन, प्लेटफॉर्म, प्रतीक्षालय, पार्किंग और यातायात व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि, सभी स्टेशनों के लिए एक जैसी समयसीमा या एक समान निर्माण मॉडल नहीं है। प्रत्येक स्टेशन की भौगोलिक स्थिति, यात्री संख्या, उपलब्ध भूमि और निर्माण की जटिलता के आधार पर काम आगे बढ़ाया जा रहा है।
रेलवे के सामने बड़ी चुनौती और अवसर
देशभर के करीब 1300 रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास भारतीय रेलवे के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने की बड़ी पहल है। इससे यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलने के साथ-साथ रेलवे स्टेशनों की परिचालन क्षमता बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है। स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने, शहरों से बेहतर संपर्क बनाने और दिव्यांग यात्रियों के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराने जैसे प्रयास भी इस योजना को व्यापक बनाते हैं। हालांकि, परियोजना की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता के साथ कितनी तेजी से पूरे होते हैं और नई सुविधाओं का नियमित रखरखाव किस तरह किया जाता है। साथ ही, निर्माण के दौरान यात्रियों को होने वाली असुविधा कम करना भी रेलवे के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। कुल मिलाकर, रेलवे की यह पहल केवल स्टेशनों की सूरत बदलने का अभियान नहीं है, बल्कि आने वाले कई दशकों के लिए देश की रेल परिवहन व्यवस्था को अधिक सक्षम, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने की कोशिश है। यदि योजनाओं को तय मानकों के अनुसार पूरा किया जाता है, तो इसका लाभ देशभर के करोड़ों रेल यात्रियों को मिल सकता है।
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