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March 6, 2026

इजरायली वीज़ा ने बदला माहौल, भारतीय पत्रकार को मिली 26 घंटे की पूछताछ

The CSR Journal Magazine
यूएई-ओमान सीमा पर एक भारतीय पत्रकार की यात्रा के दौरान पासपोर्ट में इजरायली वीज़ा देखने के बाद अचानक माहौल बदल गया। 26 घंटे की गहन पूछताछ ने कई सवाल खड़े कर दिए। मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच, यह घटना स्पष्ट करती है कि पत्रकारों को कैसे सुरक्षा एजेंसियों का सामना करना पड़ता है।

इमीग्रेशन चेकपॉइंट पर मिली कठिनाई

4 मार्च को, रात करीब 11 बजे जब मैं ओमान-UAE बॉर्डर के हत्ता इमीग्रेशन पॉइंट पर पहुंचा, वहां हालात सामान्य थे। मेरे सभी दस्तावेज़ ठीक थे और वीज़ा ऑन अराइवल की प्रक्रिया भी पूरी हुई थी। लेकिन जैसे ही अधिकारी ने मेरे पासपोर्ट पर लगे तीन इजरायली वीज़ा को देखा, माहौल अचानक बदल गया।

इंटेलिजेंस अधिकारियों की लम्बी पूछताछ

उसके बाद मेरा पासपोर्ट सुरक्षा अधिकारियों को सौंप दिया गया। कई इंटेलिजेंस अधिकारी आए और रात भर पूछताछ चलती रही। उनका एक ही सवाल था: “आप इजराइल क्यों गए थे?” मैंने बताया कि ये यात्रा भारत के प्रधानमंत्री की यात्रा को कवर करने के लिए थी, लेकिन सवालों का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा था।

ईरान का वीज़ा और बढ़ते सवाल

पूछताछ के दौरान, मुझे दिल्ली के ईरानी दूतावास की याद आई। कुछ समय पहले, भारतीय पत्रकारों के लिए ईरान यात्रा का कार्यक्रम बनाया गया था, जिसमें मैं शामिल नहीं था। उस समय का अफसोस अब इस घटना के बीच और भी बढ़ गया।

रूस-यूक्रेन युद्ध का सामना

इस पहले भी मैं रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान कई बार इसी तरह की पूछताछ का सामना कर चुका था। लेकिन उस रात एक सवाल मेरे मन में बार-बार आता रहा: यदि भारत, इजरायल और यूएई एक रणनीतिक गठबंधन में हैं, तो फिर इन सुरक्षा उपायों का क्या कारण है?

सुरक्षा एजेंसियों का डर और सूचना का प्रवाह

पूरे समय पूछताछ के दौरान, मुझे यह महसूस हुआ कि क्या सुरक्षा एजेंसियों को पत्रकारों से डर लगता है? आज के मोबाइल युग में, लोग सूचना का स्रोत बन गए हैं। जंग से जुड़ी खबरें और तस्वीरें अब किसी टीवी रिपोर्टर के माध्यम से नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों द्वारा साझा की जा रही हैं।

26 घंटे बाद मिली आज़ादी

पूरी रात की पूछताछ के बाद भी मामला खत्म नहीं हुआ। मेरा मोबाइल फोन 15 घंटे तक सुरक्षा अधिकारियों के पास रहा और उसे जांचा गया। 20 घंटे तक मुझे कोई भोजन नहीं दिया गया। 26 घंटे की गहन पूछताछ के बाद मुझे जाने की अनुमति दी गई। इस अनुभव ने मुझे यह समझने में मदद की कि UAE जैसे देशों के लिए इजरायल आज एक मित्र भी है और एक चिंता का विषय भी।

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