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February 20, 2026

भारत ने हिंद महासागर में ‘मिलन 2026’ अभ्यास आयोजित किया, 70 देशों ने भाग लिया, पाकिस्तान-चीन अनुपस्थित रहे

The CSR Journal Magazine
ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद, भारतीय नौसेना ने हिंद महासागर में ‘मिलन 2026’ नामक नौसैनिक अभ्यास का आयोजन किया है। इस बहुप्रतिनिधि अभ्यास में 70 से अधिक देशों का भाग लेना भारत को एक विश्वसनीय समुद्री साझेदार के रूप में स्थापित करता है। 19 से 20 देशों ने अपने जंगी जहाज भी भेजे हैं, और यह अभ्यास 19 से 25 फरवरी तक दो चरणों में आयोजित हो रहा है—हार्बर फेज और सी फेज।

क्यों खास है ‘मिलन 2026’?

इस अभ्यास की शुरुआत 1995 में अंडमान-निकोबार से हुई थी, जो अब इंडो-पैसिफिक में एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। इसका मुख्य उद्देश्य मित्र देशों के बीच तालमेल बढ़ाना, समुद्री चुनौतियों का सामना करना और ऑपरेशनल इंटरऑपरेबिलिटी को मजबूत बनाना है। हार्बर फेज में चर्चा, युद्ध सिमुलेशन और पेशेवर आदान-प्रदान किया जा रहा है। सी फेज में लाइव ड्रिल और अन्य सैन्य कार्य शामिल हैं।

भारतीय नौसेना की ताकत का प्रदर्शन

इस अभ्यास में भारतीय नौसेना के अत्याधुनिक जहाज और विमान हिस्सा ले रहे हैं, जैसे कि INS Visakhapatnam, जो ब्रह्मोस मिसाइल और उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम से लैस है। INS Shivalik और INS Jalashwa जैसे जहाज भी अपनी जरूरतों के अनुसार युद्धाभ्यास में भाग ले रहे हैं। इसके साथ-साथ, Boeing P-8I Poseidon जैसी लंबी दूरी की समुद्री निगरानी करने वाली तकनीक भी शामिल है।

पाकिस्तान-चीन का न होना एक संकेत

इस बार के ‘मिलन 2026’ अभ्यास में पाकिस्तान, चीन और तुर्किए के युद्धपोत शामिल नहीं हैं, जो अपने आप में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। हिंद महासागर में चीन की बढ़ती हरकतें, चाहे वह पनडुब्बी गश्त हो या बंदरगाह निवेश, भारत के लिए एक चिंता का विषय रही है। बहुपरकीय अभ्यास से भारत यह दिखा रहा है कि उसका कूटनीतिक और सैन्य नेटवर्क मजबूत है।

वैश्विक मंच पर धमक

इस अभ्यास में अमेरिका, रूस, जापान, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, ब्रिटेन और ईरान जैसे बड़े देश भी शामिल हुए हैं। इन देशों का एक साथ आना दर्शाता है कि भारत आज एक विश्वसनीय समुद्री साझेदार बन चुका है। क्वाड देशों की एकजुटता इंडो-पैसिफिक में साझा सुरक्षा रणनीति को भी दर्शाती है।

बंगाल की खाड़ी का सामरिक महत्व

बंगाल की खाड़ी, जो मलक्का जलडमरूमध्य की ओर जाने वाले प्रमुख समुद्री मार्ग का हिस्सा है, वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति का एक बड़ा मार्ग है। इस क्षेत्र में सैन्य अभ्यास कर, भारत अपनी पूर्वी समुद्री सीमाओं पर चौकसी और तैयारियों का संदेश दे रहा है।

शांति और सुरक्षा का संदेश

‘मिलन 2026’ केवल एक सैन्य अभ्यास नहीं है, बल्कि यह भारत की समग्र समुद्री कूटनीति और रणनीतिक शक्ति का प्रदर्शन है। पाकिस्तान और चीन की अनुपस्थिति और विश्व की बड़ी नौसेनाओं की मौजूदगी यह दर्शाती है कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत संतुलन और नेतृत्व की भूमिका निभा रहा है। यह अभ्यास एक मजबूत संदेश देता है कि भारत शांति चाहता है, पर सुरक्षा और सामरिक संतुलन के मामले में पूरी तरह तैयार है

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