app-store-logo
play-store-logo
February 11, 2026

भारत और चीन ने सीमा शांति, वीजा प्रक्रिया सुधार और कैलाश यात्रा पुनः शुरू करने पर चर्चा की।

The CSR Journal Magazine
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने मंगलवार को चीन के कार्यकारी उप विदेश मंत्री मा झाओशू के साथ भारत-चीन रणनीतिक संवाद किया। इस बैठक में सीमा पर शांति, यात्रा बहाली और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने के मुद्दों पर चर्चा हुई। हाल के समय में दोनों देशों के बीच संबंधों में जो ठहराव था, अब उसे आगे बढ़ाने के प्रयास दिखाई दे रहे हैं। दोनों देश फिर से संपर्क को मजबूत करने की दिशा में विचार कर रहे हैं।

वीजा प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रस्ताव

बैठक के दौरान वीजा प्रक्रिया को आसान बनाने पर भी बातचीत हुई। इसमें कहा गया कि यह कदम दोनों देशों के बीच संपर्क को और बढ़ाएगा। विदेश सचिव ने इस बात को प्रभावी ढंग से उठाया कि वीजा में सुधार से यात्रा में आसानी होगी। वहीं चाइनीज उप विदेश मंत्री ने BRICS शिखर सम्मेलन के लिए भारत के समर्थन की बात भी कही।

व्यापार और लंबित मुद्दों का समाधान

भारत और चीन दोनों ने सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखने को बेहद आवश्यक माना। बैठक में व्यापार और अन्य लंबित मुद्दों को सुलझाने पर सहमति जताई गई। दोनों पक्षों ने राजनीतिक दृष्टिकोण से इन मुद्दों पर कार्य करने की आवश्यकता पर जोर दिया, जिससे द्विपक्षीय रिश्तों की प्रगति में मदद मिलेगी। इसी दौरान द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान भी हुआ।

कैलाश यात्रा का विषय भी उठा

कैलाश यात्रा को लेकर भारत और चीन के बीच चर्चा ने भी ध्यान खींचा। इस विषय पर बातचीत करके दोनों देशों ने यात्रा पुनः शुरू करने पर सहमति जताई। स्थानीय लोगों के बीच सांस्कृतिक और धार्मिक संबंध बनाए रखना, दोनों देशों की प्राथमिकता में शामिल है। ऐसे में कैलाश यात्रा का मुद्दा एक सकारात्मक कदम साबित हो सकता है।

भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत

बैठक में भविष्य की योजनाओं पर भी चर्चा की गई। भारत की BRICS अध्यक्षता पर चर्चा करते हुए चीन ने इस साल आयोजित होने वाले शिखर सम्मेलन को सफल बनाने के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया। इससे यह संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच सहयोग का एक नया अध्याय शुरू होने वाला है।

संज्ञान में बदलाव, सहयोग का नया दौर

भारत-चीन द्विपक्षीय संबंध अब एक नए मोड़ पर हैं। दोनों देशों ने विचार-मंथन के जरिए कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों का समाधान निकालने का प्रयास किया है। इस प्रकार के संवाद से न केवल रिश्तों में सुधार होगा, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता भी बढ़ेगी। यह सभी पक्षों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।

राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण कदम

भविष्य में संवाद को बढ़ाने के तरीकों पर बातचीत की गई है। इस तेजी से बदलते परिदृश्य में, दोनों देशों के राजनीतिक नेताओं ने तय किया है कि वे लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए एकजुट होकर काम करेंगे। इससे न केवल व्यापारिक संबंध मजबूत होंगे, बल्कि लोगों के बीच बेहतर संपर्क भी स्थापित होगा।

Latest News

Popular Videos