बजट सत्र के सातवें दिन लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव खूब शोरगुल के बीच पास कर दिया गया। खास बात ये रही कि इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस प्रस्ताव पर कोई भाषण नहीं दिया। ऐसा नजारा 2004 के बाद पहली बार देखने को मिला है।
2004 में भी हुआ था बवाल
2004 में भी एक बार तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलने नहीं दिया गया था। उस वक्त बीजेपी ने सत्र में जमकर विरोध किया था, ठीक वैसे ही जैसे अब विपक्षी पार्टियों ने गुरुवार को विरोध जताया।
लोकसभा में सुबह से रहा हंगामा
गुरुवार को लोकसभा की कार्रवाई शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी। इसके जवाब में स्पीकर को पहले 65 सेकंड बाद और फिर पांच मिनट के अंदर कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। इसके बाद फैसला हुआ कि लोकसभा दोपहर 2 बजे फिर से शुरू होगी।
राज्यसभा में राहुल गांधी को लेकर बहस
राज्यसभा की कार्यवाही भी जोरदार हंगामे की गवाह बनी। विपक्ष ने राहुल गांधी को लोकसभा में बोलने की इजाजत न मिलने का मुद्दा उठाया। मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि राहुल पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे की किताब पर बोलना चाहते थे, लेकिन उन्हें मौका नहीं दिया गया।
सत्तापक्ष ने जताई सख्ती
राज्यसभा में उपसभापति ने खड़गे को रोकते हुए साफ किया कि लोकसभा के मुद्दे राज्यसभा में नहीं उठाए जा सकते। वहीं, संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने खड़गे से कहा कि राहुल गांधी बार-बार नियमों का उल्लंघन करते हैं, उन्हें आप समझाइए। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी तीखा बयान देते हुए कहा कि कांग्रेस को अबोध बच्चे की तरह बंधक न बनाएं।
वॉकआउट कर गए विपक्षी सांसद
इन बहसों और टकरावों के चलते राज्यसभा की कार्यवाही बाधित हो गई और अंत में विपक्षी सांसद सदन से वॉकआउट कर गए। अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्यसभा में शाम को क्या बोलते हैं, क्योंकि संभावना है कि वे वहां भाषण दे सकते हैं।
पहले भी हुआ था PM की कुर्सी का घेराव
बुधवार को लोकसभा में विपक्षी सांसदों ने प्रधानमंत्री की सीट के पास पहुंचकर विरोध जताया था। उस घटना ने संसद में तनाव का माहौल और बढ़ा दिया। संसद के दोनों सदनों में अब अगले कदमों पर सभी की निगाहें टिकी हैं।