अब PhD के लिए थिसिस जरूरी नहीं, IIT ला रहा नया सिस्टम

The CSR Journal Magazine
सालों से यह माना जाता रहा है कि पीएचडी का मतलब है सैकड़ों पन्नों की रिसर्च और एक लंबी थीसिस। लेकिन अब IIT रोपड़ ने इस धारणा को बदलने का फैसला किया है। नए सिस्टम के तहत, छात्र बिना किसी भारी-भरकम थीसिस के भी डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त कर सकेंगे। यह कदम भारत में शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लाने वाला है।

थीसिस के बिना कैसे मिलेगी डिग्री?

परंपरागत रूप से, पीएचडी के लिए छात्रों को एक विस्तृत रिसर्च पेपर लिखने की आवश्यकता होती है, जो कई सालों की मेहनत का परिणाम होता है। लेकिन IIT रोपड़ ने एक नया दृष्टिकोण अपनाया है। अब छात्रों को एक ऐसा प्रोडक्ट या तकनीक विकसित करनी होगी, जो वास्तविक जीवन की समस्याओं को हल कर सके। यह बदलाव छात्रों के लिए अधिक प्रैक्टिकल और उपयोगी अनुभव प्रदान करेगा।
IIT रोपड़ के निदेशक प्रोफेसर राजीव आहूजा ने ‘इनोवेशन-ड्रिवन’ PhD का विचार पेश किया है। इस नए मॉडल के तहत, डॉक्टोरल रिसर्च के जरिए छात्र एक प्रोडक्ट, तकनीक या स्टार्टअप तैयार कर सकते हैं। यह प्रणाली छात्रों को उनके विचारों को वास्तविकता में बदलने का अवसर देती है।

डिग्री पाने के लिए तीन मुख्य रास्ते

प्रोफेसर आहूजा के अनुसार, इस नए मॉडल के तहत छात्रों के पास डिग्री प्राप्त करने के तीन मुख्य विकल्प होंगे। पहला, छात्र अपनी रिसर्च का पेटेंट करवा सकते हैं। दूसरा, वे एक नया स्टार्टअप शुरू कर सकते हैं और उससे कमाई कर सकते हैं। तीसरा, छात्र अपनी विकसित की गई तकनीक को किसी कंपनी को ट्रांसफर कर सकते हैं।

स्टार्टअप और कमाई का विकल्प

प्रोफेसर ने कहा, “आपके पास पूरी आजादी है। आपका बस एक ही लक्ष्य है। आप कोई प्रोडक्ट बेचें, 10 लाख रुपये कमाएं और मुझे दिखाएं। आपको PhD मिल जाएगी।” यह विकल्प छात्रों को उद्यमिता की दिशा में प्रेरित करेगा और उन्हें अपने विचारों को बाजार में लाने का मौका देगा।
छात्र अपनी विकसित तकनीक को किसी कंपनी को ट्रांसफर कर सकते हैं। इससे न केवल उन्हें रॉयल्टी मिलेगी, बल्कि कंपनियों को भी नए उत्पादों के निर्माण में मदद मिलेगी। यह प्रक्रिया छात्रों के लिए एक नया करियर बनाने का अवसर प्रदान करती है।

चीन की तर्ज पर नया सिस्टम

भारत पहला देश नहीं है जो पीएचडी को थीसिस से ज्यादा प्रैक्टिकल से जोड़ रहा है। हाल ही में चीन ने भी एक ऐसा सिस्टम शुरू किया है, जिसमें डॉक्टोरल स्टूडेंट्स को व्यावहारिक उपलब्धियों के आधार पर अपनी डिग्री पूरी करने की अनुमति दी गई है।

भारत में प्रैक्टिकल पीएचडी का भविष्य

फरवरी 2026 में, ‘नेचर’ पत्रिका ने चीन की पहली प्रैक्टिकल PhD के बारे में जानकारी दी। इसमें एक सिविल इंजीनियरिंग स्कॉलर का जिक्र था, जिसने लिखित थीसिस के बजाय एक ‘ब्रिज-पायलॉन’ प्रोडक्ट के आधार पर अपनी PhD पूरी की। अब भारत में भी इस तरह की प्रैक्टिकल पीएचडी का विचार अमल में लाया जा सकता हैI
यह नया सिस्टम छात्रों के लिए बेहतर करियर के कई दरवाजे खोलेगा। प्रैक्टिकल दृष्टिकोण से पीएचडी करने वाले छात्र न केवल अपने ज्ञान को बढ़ाएंगे, बल्कि उन्हें अपने विचारों को वास्तविकता में बदलने का भी मौका मिलेगा। यह बदलाव भारतीय शिक्षा प्रणाली में एक नई दिशा प्रदान करेगा।

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