इस साल होलिका दहन 2 मार्च, सोमवार की रात को मनाया जाएगा। इस दिन शाम 6 बजकर 22 मिनट से रात 8 बजकर 53 मिनट तक होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रहेगा। परंपरा के अनुसार इस दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक स्वरूप अग्नि प्रज्वलित की जाती है। होलिका के पास दीपक जलाकर तीन या सात परिक्रमा करनी चाहिए और इसमें चना, मटर, गेहूं, अलसी, कपूर जैसी वस्तुएं डालनी चाहिए। इससे घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
भक्त प्रहलाद और भगवान विष्णु की पूजा
होलिका दहन से पहले भगवान विष्णु और भक्त प्रहलाद की पूजा विशेष महत्व रखती है। घर के मंदिर में विष्णु-लक्ष्मी की मूर्तियां स्थापित करें और केसर मिश्रित दूध से अभिषेक करें। पीले चमकीले वस्त्र अर्पित करें और तुलसी के पत्तों के साथ मिठाई का भोग लगाएं। इस दिन ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करना शुभ माना जाता है।
होली और चंद्र ग्रहण का मेल
इस साल फाल्गुन पूर्णिमा 2 मार्च को है, लेकिन 3 मार्च को चंद्र ग्रहण लगने वाला है। यह ग्रहण दोपहर 3:21 बजे से शाम 6:47 बजे तक रहेगा। ग्रहण और सूतक के कारण 3 मार्च को रंग-गुलाल खेलना शुभ नहीं माना जाता। ग्रहण के दौरान मंत्र जाप और दान-पुण्य करना चाहिए। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान और घर-मंदिर की सफाई करके होली का उत्सव 4 मार्च को मनाना शुभ रहेगा।
होलिका दहन में डालने योग्य सामग्री
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कपूर और इलायची: स्वास्थ्य और वातावरण की पवित्रता के लिए
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गेहूं की बालियां: नई फसल और अन्न की समृद्धि के लिए
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सूखा नारियल और चावल-चीनी: धन लाभ और मां लक्ष्मी की कृपा के लिए
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काला तिल, हल्दी, लौंग, पीली सरसों, खीर-पूरी: शुभता और समृद्धि लाने के लिए
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गोबर के उपले: घर में सुख-शांति और आर्थिक राहत के लिए

