बिहार के रोहतास जिले के सरेया गांव स्थित श्रीहनुमत् धाम में हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें काशी क्षेत्र के सह-प्रांत कार्यवाह और काशी विद्यापीठ के अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर डॉ. राकेश ने मुख्य वक्ता के रूप में भाग लिया। अपने संबोधन में उन्होंने सनातन धर्म और हिंदुत्व को भारत के सामाजिक और सांस्कृतिक आधार के रूप में प्रस्तुत करते हुए उसकी राष्ट्रीय भूमिका पर प्रकाश डाला।
“जब सनातन कमजोर हुआ, भारत ने विभाजन झेला”
डॉ. राकेश ने कहा कि इतिहास में जब-जब हिंदू समाज कमजोर और विभाजित हुआ, तब-तब भारत भुगतता रहा। उन्होंने पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह सब विभाजन की परिणामस्वरूप हुए हैं। उन्होंने महर्षि अरविंद के उद्धरण को दोहराते हुए कहा, “सनातन गिरेगा तो भारत गिरेगा, और सनातन उठेगा तो भारत उठेगा।”
सनातन धर्म केवल आस्था नहीं, राष्ट्रीय उत्तरदायित्व
प्रोफेसर राकेश ने स्पष्ट किया कि सनातन धर्म का संगठन महज धार्मिक या सांस्कृतिक आवश्यकता नहीं है। यह भारत को एक सशक्त राष्ट्र और विश्व में मार्गदर्शक बनाने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म और हिंदुत्व न केवल भारत की आत्मा हैं, बल्कि वैश्विक कल्याण की भावना भी उसी में निहित है।
हिंदुत्व का दर्शन: ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’
डॉ. राकेश ने कहा कि हिंदुत्व की मूल भावना ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः’ पर आधारित है, जो पूरे विश्व के कल्याण की कामना करता है। यह एक समावेशी विचारधारा है, जो किसी भेदभाव को स्थान नहीं देती और सबके सुख की आकांक्षा रखती है।
युवाओं को राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनाने पर जोर
अपने संबोधन में प्रो. राकेश ने युवाओं में हिंदुत्व के मूल्य, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्रभक्ति की भावना जागृत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवा वर्ग ही राष्ट्र का भविष्य है और उन्हें विचार, आचरण और कर्तव्य के प्रति सजग बनाना बेहद आवश्यक है।
संघ की भूमिका: व्यक्ति निर्माण से समाज संगठन तक
डॉ. राकेश ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तीन प्रमुख कार्यक्षेत्रों—व्यक्ति निर्माण, सेवा कार्य और समाज संगठन—का उल्लेख करते हुए कहा कि संघ के स्वयंसेवक शिक्षा, सामाजिक, आर्थिक तथा सुरक्षा के क्षेत्रों में निस्वार्थ सेवा कर राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रहे हैं।
हिंदुत्व के पांच स्तंभों पर आधारित समाज सशक्तिकरण का संकल्प
उन्होंने सनातन और हिंदुत्व के पांच आधार स्तंभ—सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्य और ‘स्व’ आधारित जीवन शैली—का उल्लेख करते हुए इन्हें समाज संगठन की दिशा में आवश्यक बताया। उन्होंने समाज को इन मूल्यों पर संगठित करने का आह्वान किया।
सम्मेलन में व्यापक भागीदारी और सम्मान समारोह
इस कार्यक्रम का आयोजन श्रीमंगलम सेवा ट्रस्ट एवं श्रीहनुमत् धाम सरकार द्वारा किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों, युवाओं और नागरिकों ने भाग लिया। कार्यक्रम में हिन्दुस्थान समाचार के राष्ट्रीय मुख्य समन्वयक डॉ. राजेश तिवारी ने मंच पर उपस्थित अतिथियों का अंगवस्त्र भेंट कर सम्मान किया। उपस्थित जनसमूह ने सनातन धर्म आधारित सेवा व राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया।