उत्तराखंड की ऊंची पहाड़ियों में स्थित सिखों के पवित्र तीर्थ हेमकुंड साहिब और लोकपाल तीर्थ के कपाट शनिवार को विधि-विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। दोपहर 2 बजे कपाट बंद होने के ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने के लिए 5,000 से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। इस दौरान गुरुद्वारे में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए और सेना के बैंड की मधुर धुनों के बीच गुरु ग्रंथ साहिब को सचखंड साहिब में विराजमान किया गया। मौसम के बदलते मिजाज के बीच भी हेमकुंड घाटी ‘जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’ के जयकारों से गूंजती रही। पंजाब, उत्तर प्रदेश और दिल्ली समेत देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु इस अवसर पर पहुंचे। विदेश से आए श्रद्धालुओं ने भी बंदी उत्सव में हिस्सा लिया। पाकिस्तान के पेशावर से पहुंचा 40 सदस्यीय जत्था इस आयोजन का खास आकर्षण रहा।
5 हजार से अधिक श्रद्धालु बने बंदी उत्सव के साक्षी
हेमकुंड साहिब के कपाट बंद होने के अवसर पर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिला। गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्र जीत सिंह बिंद्रा ने बताया कि बंदी उत्सव में शामिल होने के लिए देश के अलग-अलग राज्यों के साथ विदेश से भी श्रद्धालु घांघरिया पहुंचे थे। ट्रस्ट के सीईओ सरदार सेवा सिंह के अनुसार, पाकिस्तान के पेशावर से जत्थेदार पापेंद्र सिंह के नेतृत्व में 40 श्रद्धालु यहां आए थे। मौसम में बदलाव और बर्फबारी की संभावना के बावजूद श्रद्धालुओं में उत्साह बना रहा। शनिवार तड़के श्रद्धालुओं के जत्थे घांघरिया से हेमकुंड साहिब के लिए रवाना हुए। सुबह करीब 8 बजे श्रद्धालु पवित्र धाम पहुंचे, जहां दिनभर धार्मिक कार्यक्रमों के बाद कपाट बंद करने की प्रक्रिया पूरी की गई।
सुबह 5 बजे शुरू हुई यात्रा, दोपहर 2 बजे बंद हुए कपाट
कपाट बंद होने के अवसर पर दिनभर धार्मिक परंपराओं के अनुसार कार्यक्रम आयोजित किए गए। श्रद्धालु सुबह जल्दी ही हेमकुंड साहिब के लिए रवाना हो गए थे। इसके बाद गुरुद्वारे में पाठ, शबद-कीर्तन और अंतिम अरदास का आयोजन हुआ।
कार्यक्रम का पूरा क्रम इस प्रकार रहा:
- सुबह 5 बजे: श्रद्धालु घांघरिया से हेमकुंड साहिब के लिए रवाना हुए।
- सुबह 8 बजे: श्रद्धालु हेमकुंड साहिब पहुंचे।
- सुबह 10 बजे: सुखमणी साहिब का पाठ हुआ।
- सुबह 11:20 बजे: शबद-कीर्तन का आयोजन किया गया।
- दोपहर 12:30 बजे: यात्रा सीजन की अंतिम अरदास हुई।
- दोपहर 1 बजे: हुक्मनामा लेने के बाद गुरु ग्रंथ साहिब को पंज प्यारों की अगुआई में सेना के बैंड की धुनों के बीच दीवान हॉल से सचखंड साहिब में विराजमान किया गया।
- दोपहर 2 बजे: हेमकुंड साहिब और लोकपाल तीर्थ के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए।

