संभल हिंसा मामले में एएसपी अनुज चौधरी और 20 अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। यूपी सरकार और अनुज चौधरी ने अलग-अलग याचिकाएं दाखिल कर सीजेएम कोर्ट के आदेश के रद्द करने की मांग की है। यह सुनवाई आज सुबह होगी, और सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि हाईकोर्ट क्या निर्णय लेगा।
सुनवाई का महत्व और मामला
उत्तर प्रदेश के संभल हिंसा केस से संबंधित यह मामला काफी संवेदनशील बना हुआ है। 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा में मोहम्मद आलम पर गोली चलाने का आरोप पुलिस पर लगा है। सीजेएम कोर्ट ने अनुज चौधरी सहित 20 पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश जारी किया था। अब इस आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाएं इलाहाबाद हाईकोर्ट में रखी गई हैं।
सीजेएम कोर्ट का आदेश और उसकी चुनौती
सीजेएम चंदौसी द्वारा 156 (3) के तहत मुकदमा दर्ज कराने के आदेश को अनुज चौधरी और यूपी सरकार ने चुनौती दी है। ये याचिकाएं सुनवाई के लिए आज जस्टिस समित गोपाल की सिंगल बेंच के सामने होंगी। हाईकोर्ट के इस फैसले का परिणाम पुलिस के आचार-व्यवहार पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालेगा।
मोहम्मद आलम का आरोप और घटनाक्रम
मोहम्मद आलम की गोली लगने से हुई चोट का केस भी इस मामले में महत्वपूर्ण है। आलम के पिता, मोहम्मद यामीन ने सीजेएम कोर्ट में मामला दर्ज कराया, जिसमें आरोप लगाया गया कि पुलिस ने जानबूझकर उनके बेटे पर गोली चलाई। इस पर सीजेएम विभांशु सुधीर ने अनुज चौधरी समेत अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया था।
अनुज चौधरी की स्थिति
दिलचस्प बात यह है कि अनुज चौधरी को हाल ही में पदोन्नति दी गई है और वह अब फिरोजाबाद में एएसपी के पद पर तैनात हैं। दूसरी ओर, आदेश देने वाले सीजेएम का तबादला हो चुका है और वह वर्तमान में सुल्तानपुर में हैं। यह स्थिति इस केस की जांच को और भी जटिल बना देती है।
अग्रिम जमानत और अगली सुनवाई
इस मामले की सुनवाई में अन्य महत्वपूर्ण तथ्य भी सामने आए हैं। मोहम्मद आलम को इलाहाबाद हाईकोर्ट से 25 फरवरी तक के लिए अग्रिम जमानत मिल चुकी है। आज होने वाली सुनवाई में सभी की नजरें इस बात पर होंगी कि हाईकोर्ट संभल कोर्ट के FIR के आदेश के खिलाफ याचिका पर क्या निर्णय लेता है।
स्पेशल सुनवाई और आगे का रास्ता
आज की सुनवाई का परिणाम न केवल अनुज चौधरी की छवि पर असर डाल सकता है, बल्कि इससे संबंधित सभी पुलिसकर्मियों के भविष्य पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा। कानूनी प्रक्रिया के इस मोड़ पर आम जनता और मीडिया की नजरें हैं कि उच्च न्यायालय क्या निर्णय सुनाता है। यह मामला न केवल कानून को प्रभावित करेगा, बल्कि इसके सामाजिक और राजनीतिक परिणाम भी महत्वपूर्ण होंगे।