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January 5, 2026

‘I Love You’ मुझे माफ कर दो, बेटे को आखिरी शब्द बोलकर सिरसा में जेल वार्डन ने किया सुसाइड

The CSR Journal Magazine
हरियाणा के सिरसा जिले में जिला जेल के वार्डन सुखदेव सिंह ने कथित मानसिक प्रताड़ना और ड्यूटी संबंधी तनाव से परेशान होकर आत्महत्या कर ली। वार्डन ने अपने दो सुसाइड नोट में DSP और LO पर लगातार परेशान करने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के लिए दबाव डालने का आरोप लगाया।

बेटे को फोन कर बताया “दरिंदों से हार गया”

सुखदेव सिंह ने अपनी मौत से पहले बेटे को फोन किया और बताया कि वे जेल में दोनों अधिकारियों की प्रताड़ना से तंग आ गए हैं। उन्होंने कहा कि वे जहरीला पदार्थ निगल रहे हैं और अपने बैग में जेल महानिदेशक और सुपरिंटेंडेंट के नाम लिखा सुसाइड नोट रखा है। उन्होंने बेटे से कहा: “बेटा, मैं दरिंदों से हार गया। अपना और मां का ख्याल रखना। मुझे माफ कर देना। आई लव यू।” वार्डन के परिवार ने हुडा पुलिस चौकी में DSP और LO के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।

सुसाइड नोट में गंभीर आरोप

वार्डन ने अपने सुसाइड नोट में लिखा कि वे पिछले सात साल से जिला जेल सिरसा में वार्डन के पद पर कार्यरत थे और पिछले छह साल से दिल की बीमारी से पीड़ित थे। 14 दिसंबर को उन्होंने रात की ड्यूटी से छूट मांगी, जिस पर पुलिस उप-सुपरिंटेंडेंट सिक्योरिटी ने धमकी दी कि “आपको कोट मीना दीवार के नीचे ही रखेंगे।” सुखदेव ने बताया कि उन्हें लगातार 15 दिन तक मानसिक प्रताड़ना दी गई, 31 दिसंबर को गाली दी गई और नए साल पर माफी मांगने के बावजूद DSP और LO ने उन्हें ड्यूटी से रोका और पूरा दिन खड़ा रखा।

माफी देने के बावजूद निराशा

दूसरे नोट में वार्डन ने लिखा कि सुबह उन्होंने जेल सुपरिंटेंडेंट से नए साल की शुभकामनाएं दी और सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। सभी गार्ड्स ने माफी स्वीकार कर ली। इसके बावजूद, एलओ ने उन्हें ड्यूटी पर नहीं लिया और लगातार परेशान किया। सुखदेव ने लिखा: “अब शाम को निराश होकर मैं इन दोनों अधिकारियों से तंग आकर आत्महत्या जैसा कदम उठा रहा हूं। मुझे माफ करें और मुझे इंसाफ दिलाएं।”

बेटे ने घटना की पूरी कहानी बताई

मीडिया से बातचीत में वार्डन के बेटे जसपाल और पिता दीप सिंह ने बताया कि गुरुवार शाम 5 बजे पिता ने उन्हें फोन किया, तब उन्होंने सल्फास निगल ली थी। पहले उन्हें सिविल अस्पताल और फिर प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया, जहां रात में उनकी मौत हो गई। जसपाल ने आरोप लगाया कि उनके पिता, जो हार्ट पेशेंट और दो स्टेंट के मरीज थे, उन्हें जातिसूचक गालियां भी दी गईं। यही कारण था कि पिता ने यह कदम उठाया।

पुलिस जांच में जुटी, परिवार ने जताई नाराजगी

वार्डन के परिवार ने चेतावनी दी है कि जब तक सिरसा पुलिस आरोपी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करती, वे शव नहीं उठाएंगे। पुलिस ने मामले की तफ्तीश शुरू कर दी है, लेकिन मीडिया के सामने अधिक जानकारी साझा करने से बच रही है। यह मामला जेल प्रशासन में अनुशासन और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोपों को उजागर करता है और हरियाणा पुलिस पर दबाव बढ़ा रहा है कि वे तुरंत कार्रवाई करें।
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