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February 10, 2026

हरियाणा सरकार ने 100 करोड़ रुपये का बजट न खर्च करने पर 20 अधिकारियों को चार्जशीट करने का निर्णय लिया है।

The CSR Journal Magazine
हरियाणा की नायब सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए स्वच्छ भारत मिशन के तहत केंद्र से मिले 100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि को न खर्च करने के कारण 20 अधिकारियों को चार्जशीट करने के आदेश दिए हैं। यह निर्णय 5 फरवरी को चंडीगढ़ में हुई शहरी निकाय विभाग की बजट मीटिंग में लिया गया। इस मीटिंग में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने संबंधित अधिकारियों से काफी नाराजगी जताई थी।

बजट मीटिंग में अधिकारी थे असहज

सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने जब अधिकारियों से पूछा कि स्वच्छता मिशन के लिए मिली करोड़ों रुपये की राशि क्यों बची हुई है और इस राशि को खर्च करने के लिए अब तक क्या योजना बनाई गई है, तो सभी अधिकारी चुप रहे। शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल ने इस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए चार्जशीट की प्रक्रिया शुरू की। इसमें पहले राज्य मिशन डायरेक्टर HCS अधिकारी जयदीप कुमार का भी नाम शामिल है।

भविष्य के प्रोजेक्ट्स की तेजी से तैयारी

अब चार्जशीट के आदेश होते ही स्वच्छता योजनाओं को बनाने में तेजी आ गई है। हरियाणा राज्य को 2025 तक स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत कुल 342 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था। यह बजट केंद्रीय और राज्य सरकार द्वारा अप्रूव्ड एनुअल इम्प्लीमेंटेशन प्लांस और विशेष परियोजनाओं के आधार पर था।

मंत्री का फोन भी नहीं उठा

पिछले घटनाक्रम के बाद से सभी विभाग के अधिकारी चुप रह गए हैं। दैनिक भास्कर की टीम ने मंत्री विपुल गोयल से बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। इसके बाद एक मैसेज भी भेजा गया, जिसका कोई उत्तर नहीं आया। अब सभी की नजर इस मामले पर है।

स्वच्छ भारत मिशन का उद्देश्य

स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत 2 अक्टूबर 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर की गई थी। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य देश को स्वच्छ बनाना और खुले में शौच की प्रथा को समाप्त करना है। इसके तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर शौचालयों का निर्माण किया गया।

सफाई के लिए जनआंदोलन की कोशिश

स्वच्छ भारत मिशन का एक प्रमुख लक्ष्य हर घर में शौचालय उपलब्ध कराना और उनका नियमित उपयोग सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही, कचरे के प्रबंधन पर भी ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारियों की असमर्थता और सवालों के जवाब न देने से यह साफ हो गया है कि स्वच्छता के इस मिशन में सुधार की आवश्यकता है।

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