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February 24, 2026

चंडीगढ़ IDFC बैंक घोटाले में बड़े अधिकारियों का हाथ? ACB ने पब्लिक सर्वेंट्स के खिलाफ दर्ज की FIR

The CSR Journal Magazine
IDFC फर्स्ट बैंक से जुड़ा 590 करोड़ रुपये का कथित घोटाला अब हरियाणा की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन गया है। हरियाणा सरकार का स्टेट विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) मामले की गंभीरता को देखते हुए FIR दर्ज कर चुकी है। इस FIR में बैंक अधिकारियों, पब्लिक सर्वेंट्स और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। ऐेसी शिकायत आई है जिसमें गंभीर धोखाधड़ी और बेईमानी के आरोप शामिल हैं।

कानूनी कार्रवाई की शुरुआत

गंभीर आरोपों के मद्देनजर FIR को प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट 1988 के तहत दर्ज किया गया है। इसमें भारतीय न्याय संहिता के अनुसार विभिन्न धाराओं का साक्ष्य प्रस्तुत किया गया है, जिसमें प्रॉपर्टी के देने या सिक्योरिटी को बदलने में धोखाधड़ी की शिकायत है।

मुख्यमंत्री का बयान

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विधानसभा में भरोसा दिलाया कि एंटी-करप्शन ब्यूरो मामले की पूर्ण जांच करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उन्होंने IAS अधिकारियों की एक हाई-लेवल कमेटी का गठन किया है, जो इस मामले की जांच करेगी।

डी-एम्पैनलिंग की प्रक्रिया

हरियाणा के मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार की अलर्टनेस के चलते इस मुद्दे का पर्दाफाश हुआ। इसके बाद सरकार ने तुरंत IDFC बैंक को डी-एम्पैनल्ड कर दिया। विपक्ष के हमलों का जवाब देते हुए सैनी ने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है कि सरकारी विभाग अलग-अलग बैंकों में पैसा जमा करते हैं। यह प्रक्रिया पहले भी होती रही है।

बैंक की प्रतिक्रिया

IDFC फर्स्ट बैंक ने कहा है कि इस मामले की जानकारी वह पहले ही बैंकिंग रेगुलेटर को दे चुका है। बैंक की फाइलिंग में कहा गया है कि चंडीगढ़ की एक खास ब्रांच के कुछ कर्मचारियों ने हरियाणा राज्य सरकार के खातों में धोखाधड़ी करने की कोशिश की है।

विपक्ष का बयान

हरियाणा विधानसभा में विपक्ष के नेता भूपिंदर हुड्डा ने इस मुद्दे को उठाया। इसके जवाब में मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि सरकार ने तुरंत कार्रवाई की और फंड को दूसरे फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन में ट्रांसफर करने का निर्णय लिया। इस बीच, उन्होंने यह भी कहा कि हरियाणा सरकार के फंड का एक बड़ा हिस्सा फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश किया गया था।

पैसा सुरक्षित है

मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि बैंक की गड़बड़ियों का पता लगने के बाद, पिछले रविवार को ही उचित कदम उठाए गए थे। सरकार ने तय किया कि सभी जमा राशि ब्याज के साथ एक नेशनलाइज्ड बैंक में ट्रांसफर की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक-एक रुपया वसूल किया जाएगा और पैसा पूरी तरह से सुरक्षित है।

भविष्य की जांच

IDFC फर्स्ट बैंक ने पुष्टि की है कि इस मामले में प्रारंभिक जांच की गई है और यह स्थिति चंडीगढ़ की एक विशेष ब्रांच के जरिए ही सीमित है। बैंक ने आश्वासन दिया है कि यह मामला अन्य कस्टमर्स तक नहीं फैला है। सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और सभी स्तरों पर जांच को आगे बढ़ाया जाएगा।
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