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February 21, 2026

पत्नी को 1 थप्पड़ मारना क्रूरता नहीं, Gujarat High Court का चौंकाने वाला फैसला

The CSR Journal Magazine
गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में एक अद्वितीय फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि पति द्वारा पत्नी को मारा गया एक थप्पड़ क्रूरता नहीं माना जा सकता। यह फैसला देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि क्रूरता साबित करने के लिए ठोस और पर्याप्त सबूत होना आवश्यक है। यह मामला 1996 का है, जब पति दिलीपभाई मंगलाभाई वरली ने निचली अदालत के द्वारा दी गई सजा को चुनौती दी थी।

1996 का विवाद और सजा का मामला

दिलीपभाई की अपील इस बात पर आधारित थी कि 2003 में सेशंस कोर्ट ने उन्हें सात साल की सजा सुनाई थी। यह सजा उन्हें आत्महत्या के मामले में धारा 306 के तहत मिली थी। महिला पक्ष ने आरोप लगाया था कि पति उन्हें प्रतिदिन परेशान करता था और मारपीट करता था। इस दुर्व्यवहार से तंग आकर महिला ने आत्महत्या कर ली थी।

पति की आय और पारिवारिक झगड़े

पति, अपनी आय बढ़ाने के लिए रात में बैंजो बजाने जाता था, जो पत्नी को नापसंद था। यह उनकी बहसों का मुख्य कारण बना। जस्टिस गीता गोपी ने कोर्ट में यह कहा कि क्रूरता का मामला तब ही बनता है, जब लगातार और असहनीय मारपीट के साफ-साफ सबूत हों। इस केस में ऐसा कोई सबूत पेश नहीं किया गया।

एक थप्पड़ पर आया फैसला

इस मामले में कोर्ट ने एक थप्पड़ को लेकर जो स्थिति पेश की, वह काफी दिलचस्प थी। पति ने यह कहा कि पत्नी बिना बताए मायके चली गई थी, जिससे न केवल वह परेशान हुए बल्कि परिवार के अन्य सदस्य भी प्रभावित हुए थे। इस स्थिति में पति द्वारा पत्नी को एक थप्पड़ मारने की घटना को सामान्य मानते हुए कोर्ट ने इसे क्रूरता का मामला नहीं माना।

जनता की प्रतिक्रिया

गुजरात हाईकोर्ट के इस फैसले पर जनता की प्रतिक्रियाएँ अलग-अलग हैं। कुछ लोग इसे सही मानते हैं तो कुछ इसे गलत बताने से नहीं चूकते। इस फैसले ने एक बार फिर घरेलू हिंसा और क्रूरता के मुद्दे पर बहस छेड़ दी है। लोग इस पर अपनी-अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं कि क्या एक थप्पड़ को क्रूरता के रूप में देखा जा सकता है या नहीं।

कानून और सामाजिक धारणाएं

इस फैसले ने एक सवाल खड़ा किया है कि क्या कानून में बदलाव जरूरी है या वर्तमान स्थिति को स्वीकार करना चाहिए। समाज में ऐसे मामलों पर चर्चा अक्सर होती रहती है और यह मामला भी उसी का एक हिस्सा है। क्या पति-पत्नी के बीच विवाद को इस तरीके से हल किया जाना चाहिए या इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए, इस पर समाज में विभिन्न धाराएं हैं।
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