गुजरात सरकार ने शिक्षा को बनाया कमाई का जरिया, नए स्कूल खोलने में मिली आज़ादी

The CSR Journal Magazine
गुजरात सरकार ने शिक्षा को ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ की श्रेणी में शामिल कर दिया है। इससे नए मिडिल और हायर सेकंडरी स्कूल खोलने की प्रक्रिया में ढील दी गई है। यह कदम शिक्षा को एक बड़े व्यवसाय के रूप में देखने की दिशा में उठाया गया है। अब नए स्कूल खोलने के लिए जटिल नियमों और लंबी कागजी कार्रवाई से बचा जा सकेगा।

नए स्कूल खोलने की प्रक्रिया में सरलता, CSR के तहत स्कूल खोलने की सुविधा

गुजरात सरकार ने हाल ही में नए स्कूल खोलने के लिए भूमि से जुड़े नियमों में छूट दी है। इससे नए स्कूल खोलने वालों को कोई परेशानी नहीं होगी। पहले के सख्त नियमों के कारण नए स्कूलों की संख्या में कमी आई थी, लेकिन अब यह प्रक्रिया आसान हो गई है। गुजरात माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने पुराने नियमों को फिर से लागू करने का फैसला किया है। नए नियमों के तहत कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) गतिविधियों के तहत नए स्कूल खोलने वालों को भूमि पट्टे के नियमों में छूट दी गई है। पहले किसी इलाके में स्कूल खोलने के लिए वहां की जरूरतों और शर्तों का ध्यान रखा जाता था, लेकिन अब यह शर्त हटा दी गई है। इससे इलाके में अपनी मर्जी से कई स्कूल खोले जा सकेंगे।

छत को खेल का मैदान बनाने की अनुमति, छोटे क्लासरूम की अनुमति

गुजरात सरकार ने स्कूलों को अपनी छत को खेल का मैदान बनाने की अनुमति दी है। हालांकि, स्कूलों को बच्चों की सुरक्षा गाइडलाइंस का पालन करना होगा। इसके अलावा, अगर स्कूल की जमीन पर मैदान बनाने की जगह नहीं है, तो वे स्कूल के मेन गेट से 500 मीटर के दायरे में मैदान का उपयोग कर सकते हैं। नए नियमों के तहत अब छोटे क्लासरूम को भी क्लासरूम में तबदील किया जा सकता है। पहले नए स्कूलों के क्लासरूम का साइज कम से कम 400 वर्गफुट होना अनिवार्य था, लेकिन अब इस नियम को हटा दिया गया है। हालांकि, क्लास में 60 बच्चों की लिमिट अभी भी बरकरार है।

नए स्कूलों की संख्या में गिरावट का कारण, स्कूलों में वेलनेस टीम का गठन

गुजरात सरकार ने नए स्कूलों की खुलने की संख्या में गिरावट को देखते हुए नियमों में ढील देने का फैसला लिया है। 2019-20 में नए स्कूलों की संख्या में करीब 80% की गिरावट दर्ज की गई थी। इस सेशन में नए स्कूल खोलने के लिए 443 आवेदन आए थे, लेकिन सख्त नियमों के चलते सिर्फ 47 को ही मंजूरी मिली थी। गुजरात बोर्ड से संबद्ध क्लास 9 से 12 तक के बच्चों के लिए हर शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में स्कूल वेलनेस टीम बनाने का नियम लागू किया गया है। यह टीम छात्रों के मानसिक तनाव को पहचानने और जरूरत पड़ने पर सहायता उपलब्ध कराने का काम करेगी। इस टीम में प्रिंसिपल, शिक्षक, काउंसलर और छात्र प्रतिनिधि शामिल होंगे।

छोटे स्कूलों के लिए मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की व्यवस्था

नए नियमों के अनुसार, 100 या उससे अधिक छात्रों वाले स्कूलों में कम से कम एक काउंसलर या प्रशिक्षित सामाजिक कार्यकर्ता नियुक्त करना अनिवार्य होगा। छोटे स्कूलों को बाहरी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों और नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों से संपर्क की व्यवस्था करनी होगी। यह कदम छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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