गुजरात: बनास BIO-CNG से ‘ग्रीन गुजरात’ मिशन को मिलेगा बल, हर साल 6,750 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी

The CSR Journal Magazine
ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में गुजरात की नई पहल ने सबका ध्यान खींचा है। बनास BIO-CNG प्लांट यह साबित करता है कि कैसे स्थानीय संसाधनों का उपयोग करके स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन किया जा सकता है। इस मॉडल में हर साल करीब 6,750 टन CO2e (कार्बन डाइऑक्साइड इक्विवेलेंट) ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने की क्षमता है। जलवायु परिवर्तन के खिलाफ यह कदम गुजरात की महत्वपूर्ण भागीदारी को दर्शाता है।

नवीनतम वित्तीय समर्थन

गुजरात सरकार ने इस अभिनव BIO-CNG पहल के लिए ₹60 करोड़ का आवंटन किया है। मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल के नेतृत्व में यह वित्तीय सहायता सहकारी दुग्ध उत्पादक संघों के नए प्लांट स्थापित करने के लिए की गई है। शुद्ध ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए इस योजना के तहत राज्य में लगभग 10 BIO-CNG प्लांट स्थापित करने की योजना प्रस्तावित है। यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

किसान और उद्योग के लाभ

बनासकांठा में 40 मीट्रिक टन प्रतिदिन गोबर प्रसंस्करण की क्षमता वाले इस BIO-CNG प्लांट की सफलता ने अन्य स्थानों पर भी इसी तरह के प्लांट लगाने की प्रेरणा दी है। वर्तमान में यहां पाँच और BIO-CNG प्लांट्स पर काम चल रहा है। हर संयंत्र प्रतिदिन लगभग 100 मीट्रिक टन गोबर को प्रयोगशाला स्तर पर प्रोसेस करता है। यह मॉडल दिखाता है कि कैसे पर्यावरण और अर्थव्यवस्था का संकल्प एक साथ संभव है।

पशुपालकों के लिए नई आय के स्रोत

बनासकांठा के BIO-CNG संयंत्र से जुड़े लगभग 20 किलोमीटर के दायरे में 20-25 गांवों के पशुपालक परिवार शीर्ष लाभान्वित हो रहे हैं। उन्हें गोबर के लिए ₹1 प्रति किलोग्राम की दर से भुगतान किया जाता है। इससे लगभग 400-450 पशुपालक परिवारों को अतिरिक्त आय हो रही है। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दे रही है।

एकीकृत आर्थिक मॉडल

बनास BIO-CNG संयंत्र बहु-उत्पाद आधारित आर्थिक मॉडल पर कार्य कर रहा है। प्रतिदिन लगभग 1,800 किलोग्राम कंप्रेस्ड बायोगैस (CNG) का उत्पादन होता है, जिसे मार्केट में लगभग ₹75 प्रति किलोग्राम बेचा जाता है। इसके अलावा, ठोस और तरल जैविक उर्वरक का उत्पादन भी होता है, जिनसे संयंत्र को प्रतिदिन ₹3 लाख से अधिक का राजस्व प्राप्त होता है। यह पहल प्रदूषण कम करने और किसानों की समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है।

पर्यावरणीय पहल का महत्व

गुजरात की यह परियोजना न केवल ऊर्जा क्षेत्र में, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह न केवल स्थानीय किसानों के जीवन में सुधार कर रही है, बल्कि ‘ग्रीन गुजरात’ के संकल्प को भी मजबूती प्रदान कर रही है। स्वच्छ ईंधन और जैविक उर्वरक का यह सृजन, जलवायु परिवर्तन के खिलाफ गुजरात की बड़ी भूमिका को उजागर करता है।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos