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February 7, 2026

ग़ाज़ियाबाद में तीन नाबालिग बहनों की मौत पुलिस जांच, कोरियाई कल्चर, मोबाइल एडिक्शन और पैरेंटिंग पर उठे गंभीर सवाल

The CSR Journal Magazine
उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ियाबाद की एक रिहायशी सोसाइटी में तीन नाबालिग बहनों की ऊंची इमारत से गिरकर हुई मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। पुलिस इस मामले को आत्महत्या के एंगल से जांच रही है। शुरुआती जांच में मोबाइल फोन छिनना, कोरियाई संस्कृति के प्रति जुनून, पारिवारिक तनाव और लंबे समय से स्कूल न जाना अहम वजहें मानी जा रही हैं। इस घटना ने बच्चों में फोन एडिक्शन और पैरेंटिंग को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

क्या हुआ उस रात पुलिस जांच में क्या सामने आया

ग़ाज़ियाबाद के शालीमार गार्डन इलाके में चार फरवरी की रात करीब सवा दो बजे पुलिस को सूचना मिली कि टीला मोड़ थाना क्षेत्र के भारत सिटी में एक दर्दनाक घटना हुई है। मौके पर पहुंची पुलिस को पता चला कि तीन नाबालिग बच्चियों की ऊंची इमारत से गिरने के कारण मौत हो चुकी है।
ट्रांस हिंडन ग़ाज़ियाबाद के उपायुक्त निमिष पाटिल के मुताबिक, बच्चियों को 108 एम्बुलेंस के ज़रिए लोनी के एक अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि मौत की वजह ऊंचाई से गिरने के कारण गंभीर चोटें और अत्यधिक रक्तस्राव है।
फिलहाल पुलिस ने कोई एफआईआर दर्ज नहीं की है और जांच जारी है कि यह आत्महत्या का मामला था या इसके पीछे कोई और वजह।
मोबाइल, कोरियाई संस्कृति और बदलती पहचान
पुलिस जांच में सामने आया है कि तीनों बच्चियां कोरियाई संगीत, ड्रामा, हस्तियों, जापानी फिल्मों और कार्टूनों की शौकीन थीं। वे इस संस्कृति से इतनी प्रभावित थीं कि उन्होंने अपने नाम तक बदल लिए थे।
निमिष पाटिल का कहना है कि ‘ब्लू व्हेल’ जैसे किसी टास्क-आधारित गेम को घटना का मुख्य कारण नहीं माना जा सकता, लेकिन डिजिटल कंटेंट और फोन की भूमिका को नज़रअंदाज़ भी नहीं किया जा सकता।
पुलिस के अनुसार, आर्थिक दबाव के चलते बच्चियों के पिता ने पहले एक और फिर घटना से 10–15 दिन पहले दूसरा मोबाइल भी बेच दिया था। माना जा रहा है कि फोन छिनने से बच्चियां मानसिक रूप से परेशान थीं। सुसाइड नोट में ‘सॉरी पापा’ लिखा मिला है, हालांकि उसमें मारपीट का जिक्र पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से मेल नहीं खाता।

परिवार और सोसाइटी क्या कह रही है

मृत बच्चियों के पिता चेतन कुमार, जो पेशे से स्टॉक ब्रोकर हैं, का कहना है कि उन्हें व्यापार में नुकसान हुआ था, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि बच्चे ऐसा कदम उठाएं। उन्होंने बताया कि बच्चियां भारत से चिढ़ने लगी थीं और कोरिया जाने की बात करती रहती थीं। सोसाइटी के लोगों के मुताबिक, घटना की रात तेज धमाके जैसी आवाज आई, जिसके बाद नीचे तीनों बच्चियों के शव पड़े मिले। सोसाइटी सचिव राहुल कुमार झा ने बताया कि जिस कमरे से बच्चियों के कूदने की बात कही जा रही है, वह अंदर से बंद था और पुलिस ने दरवाज़ा तोड़ा।
कमरे में परिवार की तस्वीरें बिखरी थीं और वहीं सुसाइड नोट भी मिला। घटना के बाद सोसाइटी में डर का माहौल है। कई माता-पिता अपने बच्चों की मानसिक स्थिति को लेकर चिंतित हैं।

फोन एडिक्शन और पैरेंटिंग पर विशेषज्ञों की राय

बाल मनोचिकित्सक डॉ. नीलेश देसाई कहते हैं कि फोन एडिक्शन रासायनिक नशे की तरह होता है। किशोरावस्था में जब अचानक फोन छीन लिया जाता है, तो बच्चे ‘केमिकल विदड्रॉल’ जैसी स्थिति में चले जाते हैं। दिल्ली की मनोचिकित्सक डॉ. भावना बर्मी बताती हैं कि लंबे समय तक स्कूल न जाना बच्चों में सामाजिक और मानसिक कमजोरियां पैदा करता है। स्कूल सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि बच्चों को एक ढांचा और संतुलन देता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अभिभावकों को बच्चों का फोन एकदम से छीनने के बजाय धीरे-धीरे सीमाएं तय करनी चाहिए, खुद भी रोल मॉडल बनना चाहिए और बच्चों से संवाद बनाए रखना चाहिए। ग़ाज़ियाबाद की यह घटना एक चेतावनी है कि तकनीक के इस दौर में बच्चों की मानसिक सेहत, डिजिटल आदतें और पारिवारिक संवाद कितने अहम हैं।

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