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March 11, 2026

गौरव गोगोई का ओम बिरला पर हमला: ‘स्पीकर को होना चाहिए न्यूट्रल’

The CSR Journal Magazine
लोकसभा की गरिमा को बनाए रखने के लिए कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है। इस प्रस्ताव में गोगोई ने ओम बिरला पर निष्पक्षता न बरतने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि स्पीकर का कर्तव्य है कि वह सभी सदस्यों की आवाज सुनें और उन्हें समान अवसर दें। गोगोई के अनुसार, ओम बिरला ने संसदीय मर्यादाओं का उल्लंघन किया है और विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास किया है।

अनुच्छेद 96 और सुप्रीम कोर्ट का फैसला

गौरव गोगोई ने नबाम रेबिया बनाम डिप्टी स्पीकर मामले का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि जो भी स्पीकर की चेयर पर बैठता है, उसे न्यूट्रल होना चाहिए। अनुच्छेद 96 में कहा गया है कि जब अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को पद से हटाने का प्रस्ताव विचाराधीन है, तब तक वे फैसले नहीं ले सकते। यह विषय महत्वपूर्ण है कि सदन के संचालन में निष्पक्षता बनी रहे।

सूचना के अधिकार का उल्लंघन

गोगोई ने सवाल उठाया कि जब स्पीकर ने पैनल ऑफ चेयरपर्सन बनाया है, तो यह कैसे तय हुआ कि जगदंबिका पाल चेयर पर बैठेंगे? उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार यह सदन तय करता है लेकिन वास्तविकता कुछ और है। गोगोई ने यह भी बताया कि यह सदन पहले भी तीन बार अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से अपनी बात उठा चुका है।

सदन में माइक का उपयोग

गोगोई ने माइक को एक अस्त्र बताते हुए कहा कि इसका दुरुपयोग हो रहा है। उन्होंने बताया कि जब सदन में स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आता है, तो डिप्टी स्पीकर की भूमिका होती है, लेकिन आज डिप्टी स्पीकर मौजूद नहीं थे। गोगोई का कहना है कि माइक केवल सत्ता पक्ष को दिया जाता है जबकि विपक्ष को इससे वंचित रखा जाता है। इस तरह के कार्य सदन की मर्यादाओं का उल्लंघन कर रहे हैं।

लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प

गौरव गोगोई ने स्पीकर के खिलाफ लाए गए इस मोशन को लेकर कहा कि उनका यह कदम लोकसभा की मर्यादाओं को बनाए रखने के लिए है। उन्होंने आंबेडकर जी का उद्धरण देते हुए कहा कि संवैधानिक नैतिकता निष्पक्षता की मांग करती है। स्पीकर को सरकार की आवाज नहीं, बल्कि पूरे सदन के अधिकारों का संरक्षक होना चाहिए।

टोकने वाले विपक्ष के नेता

गोगोई ने यह भी कहा कि संसद में जितनी बार भी नेता प्रतिपक्ष ने राष्ट्रपति के भाषण का जिक्र किया, उन्हें 20 बार टोका गया। संसद में पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्टर किरेन रिजिजू पर आरोप लगाया गया कि वह सबसे ज्यादा टोकने वाले मंत्री हैं।

महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा न होना

गौरव गोगोई ने यह सवाल उठाया कि अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस में एक जांच चल रही है, जिसमें भारत के बड़े उद्योगपति और एक मंत्री का नाम शामिल है। ऐसे अहम विषयों पर चर्चा क्यों नहीं होती? उन्होंने कहा कि जब नेता विपक्ष ने इन विषयों पर बात करना चाहा, तो सत्ता पक्ष ने उनका विरोध किया। ऐसे में क्या जनता के मामलों पर चर्चा नहीं होनी चाहिए?

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