मनोज बाजपेयी की ‘गजब रात’, नया नाम, मजेदार ट्रेलर और OTT रिलीज डेट का ऐलान

The CSR Journal Magazine
मनोज बाजपेयी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ का नाम अब बदलकर ‘गजब रात’ रख दिया गया है। इस फिल्म का ऐलान फरवरी 2026 में हुआ था, लेकिन इसके पहले टीजर के बाद ही इसके नाम पर विवाद शुरू हो गया था। अब नेटफ्लिक्स इंडिया ने नए नाम के साथ फिल्म का ट्रेलर रिलीज किया है। स्क्रीनप्ले राइटर रितेश शाह की यह पहली फिल्म है, जिसे डायरेक्ट किया है।

ट्रेलर की मजेदार झलक

फिल्म का 2 मिनट 20 सेकंड का ट्रेलर दर्शकों के लिए एक शानदार झलक पेश करता है। ‘गजब रात’ एक क्राइम थ्रिलर है, जो नई दिल्ली में सेट है। ट्रेलर में एक लहूलुहान लड़की को चलती कार से बाहर फेंके जाने की घटना दिखाई गई है। पुलिस मौके पर पहुंचती है, लेकिन एम्बुलेंस तक नहीं बुलाती। सीनियर अधिकारी अजय दीक्षित (मनोज बाजपेयी) की एक मजेदार डायलॉग है, ‘जल्दी एम्बुलेंस बुलाओ, वरना लड़की के इलाज का सारा खर्च हमारे पुलिस स्टेशन को उठाना पड़ेगा।’

कहानी का दिलचस्प मोड़

ट्रेलर में दिखाया गया है कि लड़की की पहचान को लेकर कई दावे किए जा रहे हैं। कोई उसे रशियन बता रहा है, तो कोई आधी अंग्रेज और आधी भारतीय। अजय दीक्षित का किरदार इस जांच में ‘गुलाबी पत्ती’ यानी रिश्वत की बात करने में नहीं हिचकिचाता। लेकिन वह एक मुश्किल में फंस जाता है। उसके सामने अपने फर्ज और लालच का टकराव होता है।

OTT रिलीज डेट और कास्ट

मनोज बाजपेयी की यह फिल्म ‘गजब रात’ 23 अक्टूबर 2026 को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी। फिल्म में उनके साथ साकिब सलीम, दिव्या दत्ता, अक्षय ओबेरॉय, कीकू शारदा और श्रद्धा दास जैसे मंझे हुए कलाकार भी हैं।

पहले नाम पर विवाद और FIR

इससे पहले, जब नेटफ्लिक्स ने अपनी फिल्मों की लिस्ट जारी की थी, तब इस फिल्म का नाम ‘घूसखोर पंडत’ बताया गया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर भारी हंगामा मच गया। कई हिंदू संगठनों और राजनीतिक दलों ने इस नाम को जातिवादी और अपमानजनक करार दिया। इसके चलते उत्तर प्रदेश के हजरतगंज पुलिस स्टेशन में एक FIR भी दर्ज की गई।

मानवाधिकार आयोग का नोटिस

यह मामला केवल पुलिस तक सीमित नहीं रहा। एक शिकायत के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी सूचना और प्रसारण मंत्रालय को नोटिस जारी किया। बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव जैसे कई राजनीतिक नेताओं ने भी फिल्म के नाम की निंदा की।

निर्माता की सफाई

विरोध और विवाद बढ़ते देख, फिल्म के निर्माता नीरज पांडे ने सोशल मीडिया पर बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि फिल्म के टाइटल से दर्शकों के एक वर्ग को ‘ठेस’ पहुंची है। उन्होंने यह भी बताया कि यह एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा है और इसमें ‘पंडत’ शब्द का इस्तेमाल केवल एक काल्पनिक किरदार के नाम के तौर पर किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

इस विवाद का मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए, शीर्ष अदालत ने फिल्म पर रोक लगा दी और निर्माताओं को इसका टाइटल बदलने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि इस तरह का टाइटल रखकर समाज के एक वर्ग को नीचा दिखाना नैतिकता और सार्वजनिक व्यवस्था के खिलाफ है।

मनोज बाजपेयी की प्रतिक्रिया

मनोज बाजपेयी ने भी इस विवाद पर अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने कहा कि जब किसी चीज से लोगों को दुख पहुंचता है, तो आपको उनकी बात सुननी चाहिए। उनके लिए यह फिल्म एक ऐसे इंसान को दिखाने के बारे में है, जिसमें कमियां हैं और जो खुद को समझने के सफर पर है।

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