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March 15, 2026

कबाब के बहाने मणिशंकर अय्यर का बड़ा बयान, बोले– भारत-पाक को साथ बैठकर करनी चाहिए बातचीत

The CSR Journal Magazine
पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने भारत और पाकिस्तान के बीच संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के लोगों की भाषा, संस्कृति और सोच में समानता है, जो बातचीत को आसान बनाती है। जयपुर में एक कार्यक्रम के दौरान अय्यर ने कहा कि यदि भारत और पाकिस्तान साथ में बैठकर बात करें, तो यह दोनों के लिए फायदेमंद होगा। उन्हें यह भी चिंता है कि मौजूदा सरकार बातचीत में पर्याप्त इच्छाशक्ति नहीं दिखा रही है।

कबाब का उदाहरण और सहयोग का महत्व

अय्यर ने कबाब का उदाहरण देते हुए बताया कि भारतीय और पाकिस्तानी लोग एक-दूसरे से आसानी से जुड़ सकते हैं। उनका मानना है कि अगर कोई विदेशी व्यक्ति कबाब का जिक्र करे, तो वह नहीं समझेगा, लेकिन भारत और पाकिस्तान के लोग इसे भलीभांति समझते हैं। इस तरह के सामान्य विषयों पर बात करके दोनों देशों के लोग एक-दूसरे से जुगाड़ कर सकते हैं।

सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल

सर्जिकल स्ट्राइक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अगर सच में हिम्मत है, तो दोनों देशों को एक साथ बैठकर अपनी समस्याओं का समाधान करना चाहिए। अय्यर का कहना है कि बातचीत एक लंबी प्रक्रिया हो सकती है, जिसमें विभिन्न मतभेदों पर चर्चा की जाएगी। यह सिर्फ शिकायतों का निपटारा नहीं है, बल्कि संवाद के जरिए समाधान की ओर बढ़ने का तरीका है।

दूसरों पर निर्भरता का सवाल

अय्यर ने यह भी सवाल किया कि भारत अमेरिका और इज़राइल के निकट कैसे आ गया और रूस पर क्यों निर्भर है। उन्होंने कहा कि अगर 1947 में विभाजन नहीं होता, तो लोग एक ही देश के नागरिक होते। उनके अनुसार, यह स्थिति भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत की जरुरत को और बढ़ाती है।

समस्याओं का समाधान संवाद में है

अय्यर ने कहा कि अगर हमें एक-दूसरे के सामने बैठकर अपनी शिकायतें रखनी हैं, तो बातचीत का दौर जारी रखना चाहिए। यह बताना जरूरी है कि उनकी हर गलती और हमारे हर आरोप को स्वीकार करते हुए संवाद करना होगा। चाहिए जाता है कि इस प्रक्रिया में वक्त लगे, लेकिन यह जरूरी है।

संस्कृति और मित्रता का रिश्ता

मणिशंकर अय्यर ने यह भी कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच बेहतर संवाद संभव है क्योंकि दोनों देशों के संस्कृति और सोच में गहरी समानता है। वे इस बात पर जोर देते हैं कि इस संबंध को मजबूत करने के लिए जरूरी है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे को समझना जारी रखें।
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