मुंबई में एक मंच पर जुटे फडणवीस और ठाकरे भाई, मुख्यमंत्री बोले-2019 के बाद उद्धव जी का फोन नहीं आया, आज भी है इंतजार

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ठाकरे भाइयों के साथ मंच पर मुख्यमंत्री फडणवीस का बड़ा बयान: ‘2019 तक उद्धव जी ने जब भी फोन किया, मैं गया; उसके बाद उन्होंने कभी नहीं बुलाया’

महाराष्ट्र की राजनीति में कड़वाहट और खींचतान के बीच मुंबई में एक ऐसी खुशनुमा और हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है, जिसने राज्य के सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे के साथ एक ही मंच साझा किया। राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार कर तीनों नेता न केवल एक साथ बैठे, बल्कि उनके बीच जमकर हंसी-मजाक और तीखे सियासी तीर भी चले। इस दौरान मुख्यमंत्री फडणवीस ने उद्धव ठाकरे पर सीधा और बेहद दिलचस्प तंज कसते हुए कहा, “साल 2019 तक उद्धव जी ने मुझे जब भी बुलाया, मैं हमेशा गया। लेकिन 2019 के बाद उन्होंने कभी नहीं बुलाया, वरना मैं तब भी जाता। मैं तो आज भी उनके बुलावे का इंतजार कर रहा हूँ।” फडणवीस के इस बयान पर मंच पर बैठे ठाकरे भाई और सामने बैठी जनता जोर-जोर से हंसने लगी।

किस मौके पर जुटे तीनों दिग्गज?

यह ऐतिहासिक और दुर्लभ नजारा मुंबई में आयोजित एक विशेष पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में देखने को मिला। वरिष्ठ व्यंगचित्रकार प्रशांत कुलकर्णी द्वारा संपादित पुस्तक ‘महाराष्ट्राची हास्यरेषा’ (महाराष्ट्र की हास्य रेखाएं) के विमोचन समारोह के अवसर पर ये तीनों बड़े नेता एक मंच पर आए। यह पुस्तक मराठी व्यंगचित्र कला (कार्टूनिंग) के गौरवशाली 100 वर्षों के सफर को समेटती है। चूंकि शिवसेना के संस्थापक दिवंगत बाल ठाकरे खुद एक बेहद मशहूर कार्टूनिस्ट थे और राज ठाकरे भी इसी कला में माहिर हैं, इसलिए इस कला से जुड़े कार्यक्रम में दोनों भाइयों का आना स्वाभाविक था। वहीं, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को इस ऐतिहासिक पुस्तक के विमोचन के लिए मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था।

फडणवीस की गुदगुदाने वाली खोपड़खली और पुराना दर्द

कार्यक्रम के दौरान भाजपा नेता आशीष शेलार ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि जब भी राज ठाकरे फोन करते हैं, देवेंद्र फडणवीस तुरंत चले आते हैं। शेलार की इसी बात को लपकते हुए फडणवीस ने माइक संभाला और उद्धव ठाकरे की तरफ देखते हुए कहा, “आशीष जी ने कहा कि राज जी के बुलाने पर मैं आता हूँ। लेकिन आशीष जी, सच तो यह है कि 2019 तक जब भी उद्धव जी ने मुझे फोन किया, मैं उनके पास गया। 2019 के बाद उन्होंने मुझे बुलाया ही नहीं। मैं तो राह देख रहा था कि कब फोन आएगा, पर फोन आया ही नहीं। अगर वो बुलाते, तो मैं आज भी जाता।” गौरतलब है कि साल 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद के बंटवारे को लेकर भाजपा और अविभाजित शिवसेना के रास्ते अलग हो गए थे। उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर महाविकास अघाड़ी (MVA) सरकार बना ली थी, जिसके बाद से दोनों दलों और नेताओं के बीच भारी कड़वाहट आ गई थी। फडणवीस ने इसी पुराने राजनीतिक घटनाक्रम को याद करते हुए मंच से यह मजाकिया लेकिन गहरा तंज कसा।

‘बाकी सब लेफ्ट चले गए, इसलिए मैं राइट आ गया’

मंच पर बैठने की व्यवस्था को लेकर भी देवेंद्र फडणवीस ने एक बेहद सटीक और मजाकिया टिप्पणी की। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “मंच पर बैठने के दौरान मैंने देखा कि बाकी सब लोग लेफ्ट (वामपंथी/विपक्ष) की तरफ चले गए हैं, इसीलिए राजनीतिक संतुलन बनाए रखने के लिए मैं राइट (दक्षिणपंथी) में आकर बैठ गया हूँ।” फडणवीस की इस हाजिरजवाबी ने कार्यक्रम में मौजूद दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। इसके साथ ही, उन्होंने राज ठाकरे की उस टिप्पणी का भी जवाब दिया, जिसमें राज ठाकरे ने आशीष शेलार से मजाक में कहा था कि फडणवीस को साल 2029 तक मुख्यमंत्री पद पर बनाए रखें। फडणवीस ने इस पर चुटकी लेते हुए कहा, “राज ठाकरे एक बेहतरीन कार्टूनिस्ट हैं, उन्हें कार्टून बनाने पर ध्यान देना चाहिए। उद्धव ठाकरे एक बेहतरीन फोटोग्राफर हैं, उन्हें तस्वीरें खींचनी चाहिए। इन दोनों को अपने-अपने कला क्षेत्र में काम करना चाहिए और मुझे आराम से राजनीति करने देनी चाहिए।”

कार्टूनिस्टों के लिए गैलरी बनाने का ऐलान

राजनीतिक छींटाकशी से इतर मुख्यमंत्री फडणवीस ने कला और संस्कृति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी जताई। उन्होंने घोषणा की कि महाराष्ट्र सरकार मुंबई में व्यंगचित्रकारों (कार्टूनिस्टों) के लिए एक समर्पित और आधुनिक गैलरी (दालन) स्थापित करने के लिए पूरी गंभीरता से प्रयास करेगी। उन्होंने मंच से ही ठाकरे भाइयों से अपील की, “इस भव्य परियोजना को साकार करने के लिए मैं राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे दोनों की मदद और मार्गदर्शन लूंगा।”

उद्धव ठाकरे ने यादों को किया ताजा

इस मौके पर शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी अपने विचार साझा किए और पुरानी यादों को ताजा किया। उन्होंने अपने पिता बाल ठाकरे के कार्टूनिस्ट वाले दौर को याद करते हुए कहा कि बालासाहेब के व्यंगचित्रों में बहुत तीखे और सीधे फटकारे (प्रहार) हुआ करते थे। उद्धव ठाकरे ने व्यंगचित्र कला की बारीकियों को समझाते हुए कहा, “एक व्यंगचित्रकार को सबसे पहले एक उत्कृष्ट चित्रकार होना बेहद जरूरी है। सिर्फ टेढ़ी-मेढ़ी लकीरें खींच देने या कुछ भी आड़ा-तिरछा बना देने का मतलब व्यंगचित्र नहीं होता। इसमें एक गहरी सोच और कलात्मकता होनी चाहिए।”

प्रशांत कुलकर्णी की पुस्तक की सराहना

समारोह में मौजूद सभी गणमान्य हस्तियों ने प्रशांत कुलकर्णी द्वारा संपादित पुस्तक ‘महाराष्ट्राची हास्यरेषा’ की जमकर सराहना की। फडणवीस ने पुस्तक की तारीफ करते हुए कहा कि व्यंगचित्र एक ऐसी अद्भुत और प्रभावशाली कला है, जिसमें बिना एक भी शब्द बोले बहुत बड़ी और तीखी बात आसानी से कही जा सकती है। कार्टून समाज और राजनीति का आईना होते हैं और यह पुस्तक महाराष्ट्र के पिछले 100 साल के सामाजिक-राजनीतिक इतिहास को कला के माध्यम से बेहद खूबसूरती से बयां करती है।

सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज

महाराष्ट्र में आगामी राजनीतिक समीकरणों और हालिया चुनावों के बाद महायुति और महाविकास अघाड़ी के बीच चल रही कड़वाहट के बीच इस तरह की घटना बेहद दुर्लभ मानी जा रही है। यद्यपि यह पूरी तरह से एक गैर-राजनीतिक और सांस्कृतिक मंच था, लेकिन दो धुर विरोधी भाइयों (उद्धव और राज ठाकरे) का एक साथ आना और धुर विरोधी प्रतिद्वंद्वी (देवेंद्र फडणवीस) का उनके साथ बैठकर ठहाके लगाना, महाराष्ट्र की समृद्ध राजनीतिक संस्कृति की बानगी पेश करता है। विश्लेषकों का मानना है कि मंच पर भले ही माहौल दोस्ताना और खुशनुमा रहा हो, लेकिन देवेंद्र फडणवीस के ‘2019 के बाद न बुलाने’ वाले बयान के गहरे सियासी मायने हैं और यह आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति को एक नया मोड़ दे सकता है।

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