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February 26, 2026

अरब मीडिया में पीएम मोदी की इसराइल यात्रा की गूंज, बदले क्षेत्रीय समीकरणों पर चर्चा

The CSR Journal Magazine
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इसराइल यात्रा और इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के साथ उनकी नज़दीकी पर अरब मीडिया में व्यापक चर्चा हो रही है। अल जज़ीरा, गल्फ़ न्यूज़ और द न्यू अरब जैसे मीडिया संस्थानों ने इस यात्रा को केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित न रखकर, इसे मध्य पूर्व की बदलती राजनीति और भारत की नई विदेश नीति के संदर्भ में देखा है।

क्षेत्रीय ध्रुवीकरण की ओर संकेत

अरब विश्लेषकों का मानना है कि पीएम मोदी की यह यात्रा एक गहरे रणनीतिक बदलाव का संकेत देती है।

अल जज़ीरा में इसराइल-फिलिस्तीन मामलों के जानकारों के हवाले से कहा गया कि भारत-इसराइल साझेदारी मध्य पूर्व में नए क्षेत्रीय ध्रुवीकरण को जन्म दे सकती है। रिपोर्टों के अनुसार, भारत और इसराइल के बीच बढ़ते रक्षा और रणनीतिक सहयोग को पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब जैसे देशों के संभावित गठजोड़ के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि भारत जैसे परमाणु शक्ति संपन्न देश के साथ साझेदारी इसराइल को क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर रणनीतिक मजबूती देती है।

ग़ज़ा युद्ध और नरसंहार के आरोपों पर फोकस

अरब मीडिया ने ग़ज़ा में इसराइली कार्रवाई और उस पर लगे नरसंहार के आरोपों को भी प्रमुखता से उठाया।

कई रिपोर्टों में यह उल्लेख किया गया कि ग़ज़ा युद्ध के बीच मोदी की यात्रा राजनीतिक रूप से संवेदनशील समय में हुई। अल-ख़लीज ने इसराइली संसद क्नेसेट में पीएम मोदी के संबोधन को प्रमुखता दी, जिसमें उन्होंने 7 अक्टूबर 2023 के हमले का जिक्र करते हुए नागरिकों की हत्या की निंदा की और इसराइल के साथ एकजुटता व्यक्त की। साथ ही, अरब मीडिया ने भारत के विपक्षी नेताओं की टिप्पणियों को भी शामिल किया, जिनमें ग़ज़ा के हालात के मद्देनज़र इस यात्रा पर सवाल उठाए गए।

हिंदू राष्ट्रवाद और घरेलू राजनीति का संदर्भ

कुछ अरब विश्लेषणों में मोदी सरकार की विचारधारा को भी इस यात्रा से जोड़ा गया। अल जज़ीरा ने लिखा कि भारत में हिंदू राष्ट्रवाद की राजनीति और इसराइल के साथ वैचारिक साम्यता को भी इस रिश्ते की मजबूती के संदर्भ में देखा जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, भारत इस साझेदारी को पाकिस्तान के साथ अपने क्षेत्रीय तनाव और एशिया में अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखता है। इस संदर्भ में इसराइल की सैन्य तकनीक और वायुसेना क्षमता को भारत के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।

बदलती भारतीय विदेश नीति पर बहस

गल्फ़ न्यूज़ ने लिखा कि नेतन्याहू द्वारा पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत दोनों देशों के गहरे होते संबंधों का संकेत है। यह भारत की पारंपरिक विदेश नीति से अलग रुख को भी दर्शाता है। भारत ऐतिहासिक रूप से फिलिस्तीन का समर्थक रहा है और 1992 तक इसराइल के साथ उसके पूर्ण राजनयिक संबंध नहीं थे। लेकिन हाल के वर्षों में रक्षा, कृषि, साइबर सुरक्षा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि भारत ने हाल ही में वेस्ट बैंक में इसराइली विस्तारवादी नीतियों की आलोचना करने वाले 100 से अधिक देशों के साथ अपना नाम जोड़ा है, जिससे उसकी संतुलनकारी नीति भी झलकती है।

वैश्विक दक्षिण के संदर्भ में मोदी की भूमिका

द न्यू अरब और अरबी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने लिखा कि 7 अक्टूबर के बाद कई पश्चिमी नेता इसराइल का दौरा कर चुके हैं, लेकिन ग्लोबल साउथ के नेताओं की यात्राएं सीमित रही हैं। ऐसे में मोदी की यात्रा को विशेष महत्व दिया जा रहा है। रिपोर्टों में यह भी उल्लेख किया गया कि नेतन्याहू ने मोदी को दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक बताया। विश्लेषकों का मानना है कि यह यात्रा इसराइल को अंतरराष्ट्रीय समर्थन दिलाने की कोशिश का हिस्सा भी हो सकती है, खासकर उस समय जब कई यूरोपीय देशों ने ग़ज़ा में इसराइली कार्रवाई की आलोचना की है।

अरब मीडिया में पीएम मोदी की इसराइल यात्रा को केवल एक कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि व्यापक भू-राजनीतिक बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। यह भारत की हित-आधारित विदेश नीति, क्षेत्रीय रणनीति और वैश्विक भूमिका के विस्तार की कहानी भी कहता है। हालांकि, ग़ज़ा युद्ध और फिलिस्तीन मुद्दे के चलते यह यात्रा बहस और आलोचना के केंद्र में भी बनी हुई है।

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