रंगों का त्योहार होली उल्लास और उत्साह लेकर आता है, लेकिन बाजार में बिक रहे सस्ते और केमिकल युक्त रंग स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। विशेषज्ञों ने आंख, त्वचा, श्वास तंत्र और मधुमेह रोगियों के लिए विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
बाजार के सस्ते रंगों में छिपा खतरा
होली पर गहरे और चमकीले रंग आकर्षित जरूर करते हैं, लेकिन इनमें मिलाए जाने वाले रसायन शरीर के लिए घातक साबित हो सकते हैं। चिकित्सकों के अनुसार कई सस्ते रंगों में लेड ऑक्साइड, मरकरी सल्फाइड, क्रोमियम आयोडाइड, कॉपर सल्फेट और इंडस्ट्रियल डाई जैसे हानिकारक तत्व पाए जाते हैं। ये रसायन त्वचा में एलर्जी, आंखों में जलन और संक्रमण का कारण बन सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन रंगों से होने वाला नुकसान कभी-कभी स्थायी भी हो सकता है। बच्चों और संवेदनशील त्वचा वाले लोगों पर इसका प्रभाव अधिक तेजी से पड़ता है। इसलिए खुले में बिकने वाले सस्ते रंगों से परहेज करना जरूरी है।
आंखों पर सबसे ज्यादा खतरा, लापरवाही बन सकती है भारी
होली के बाद अस्पतालों में आंखों की शिकायत लेकर आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। नेत्र विशेषज्ञों का कहना है कि आंख में केमिकल रंग जाने से जलन, लालिमा, सूजन, कॉर्नियल इंफेक्शन और धुंधला दिखना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
यदि समय पर इलाज न मिले तो रेटिना और कॉर्निया को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है। गंभीर मामलों में दृष्टि कमजोर होने या अंधेपन का खतरा भी रहता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रंग खेलते समय सनग्लास पहनें और आंख में रंग चला जाए तो तुरंत साफ पानी से धोकर डॉक्टर से संपर्क करें।
त्वचा और बालों को भी होता है गंभीर नुकसान
त्वचा रोग विशेषज्ञों के अनुसार केमिकल युक्त रंग एलर्जिक डर्मेटाइटिस, रैशेज, खुजली, जलन, एक्जिमा और छाले तक पैदा कर सकते हैं। हाल ही में फेशियल, केमिकल पील, लेजर या वैक्सिंग कराने वालों की त्वचा अधिक संवेदनशील होती है, ऐसे लोगों को रंग खेलने से बचना चाहिए। बालों में ये रंग डैंड्रफ, हेयर फॉल और स्कैल्प इंफेक्शन बढ़ा सकते हैं। लंबे समय तक रंग लगे रहने से त्वचा पर स्थायी दाग भी पड़ सकते हैं। यदि पूरे शरीर में लाल चकत्ते, पानी भरे छाले, खून रिसना या चेहरे और पलकों में सूजन हो तो तुरंत चर्म रोग विशेषज्ञ से मिलना चाहिए।
अस्थमा और श्वास रोगियों के लिए ‘कलर बम’ खतरनाक
इस बार बाजार में पिन खींचने या जमीन पर पटकने से फटने वाले कलर बम और धुएं वाले गुलाल की बिक्री बढ़ी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इनसे निकलने वाला बारीक रंगीन धुंआ अस्थमा और श्वास रोगियों के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। यदि सांस फूलने लगे, सीने में जकड़न या घरघराहट हो, लगातार खांसी आए या इनहेलर लेने के बाद भी राहत न मिले, तो तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए। नाखून नीले पड़ना गंभीर संकेत है।
बेहतर होगा कि ऐसे लोग भीड़ और सूखे रंग से दूर रहें तथा एन-95 मास्क का उपयोग करें।
मधुमेह रोगियों के लिए दोहरी सावधानी जरूरी
होली पर मिठाइयां, नशीले पेय और अनियमित खानपान शुगर लेवल को असंतुलित कर सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार रंगों में मौजूद रसायन और भांग या शराब का सेवन मधुमेह रोगियों के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
यदि अत्यधिक कमजोरी, चक्कर, बेहोशी, बहुत ज्यादा प्यास, बार-बार पेशाब, उल्टी, तेज सिरदर्द या घाव में सूजन दिखे तो तुरंत चिकित्सक से मिलें। शुगर स्तर 70 एमजी/डीएल से कम या 300 एमजी/डीएल से ज्यादा होने पर यह आपात स्थिति हो सकती है। दवाएं और इंसुलिन समय पर लें, पर्याप्त पानी, नींबू पानी, नारियल पानी या छाछ का सेवन करें और नशीले पदार्थों से दूरी बनाए रखें।
सुरक्षित होली के लिए डॉक्टरों की खास सलाह
1. केवल हर्बल या प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करें।
2. होली खेलने से पहले त्वचा पर नारियल या सरसों का तेल लगाएं।
3. होंठों पर लिप बाम, नाखूनों पर वैसलीन और पूरे कपड़े पहनें।
4. रंग हटाने के लिए हल्के गुनगुने पानी और माइल्ड साबुन का प्रयोग करें, जोर से स्क्रब न करें।
5. नहाने के बाद मॉइस्चराइजर और बालों में कंडीशनर लगाएं।
6. बच्चों को खुले और सस्ते रंगों से दूर रखें।
होली खुशियों का पर्व है। थोड़ी सी सावधानी अपनाकर इसे सुरक्षित और स्वस्थ तरीके से मनाया जा सकता है। रंगों की उमंग बनी रहे, लेकिन सेहत की कीमत पर नहीं।