app-store-logo
play-store-logo
February 23, 2026

Delhi: JNU में हिंसा से गूंज उठे छात्र, वाम दलों और ABVP के बीच झड़प, कई घायल

The CSR Journal Magazine
दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में एक बार फिर हिंसक झड़प हुई है। रविवार रात, वामपंथी छात्र संगठनों और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के छात्रों के बीच टकराव हुआ। घटना उस समय हुई जब छात्र अध्ययन कर रहे थे और एक ग्रुप ने उन पर अचानक हमला कर दिया। इस झड़प में कई छात्रों के घायल होने की सूचना है।

खुदाई राजनीति का नया अध्याय

जेएनयू के छात्र नेताओं ने आरोप लगाया है कि हाल के दिनों में वामपंथी गुटों ने विशेष रूप से परिसर में हड़ताल की है। ABVP के नेता वैभव मीणा ने कहा, “पिछले 7-8 दिनों से वामपंथी गुटों का आतंक बढ़ गया था।” उन्होंने आरोप लगाया कि एक बड़ी संख्या में नकाबपोशों ने स्कूलों में घुसकर छात्रों को पढ़ाई से रोका।

कैंपस में मची अफरा-तफरी

हिंसा की इस घटना में ABVP और वामपंथी संगठनों के बीच एक-दूसरे पर पत्थरबाजी करने के आरोप लगे हैं। जानकारी के अनुसार, जब वामपंथी छात्र कुलपति के इस्तीफे की मांग कर रहे थे, तभी ABVP के छात्र भीड़ में शामिल हो गए। दोनों गुटों के बीच झड़प ने कैंपस में अफरा-तफरी मचा दी। कई छात्रों को गंभीर चोटें आई हैं।

विभाजन की नई रेखा

ABVP की ओर से यह आरोप भी लगाया गया कि वामपंथी छात्रों ने बिना कारण के आम छात्रों पर हमला किया। दूसरी ओर, वामपंथी संगठनों ने ABVP पर पहले हमला करने का आरोप लगाया है। इस तरह की स्थिति ने एक बार फिर जेएनयू के कैंपस में विभाजन को प्रकट कर दिया है।

जवाबदेही की मांग

जेएनयू के मीडिया कन्वीनर विजय जयसवाल ने यह भी कहा कि, “झड़प के दौरान दिल्ली पुलिस और यूनिवर्सिटी सिक्योरिटी भी मौजूद थी, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया।” छात्र नेताओं ने प्रशासन से मांग की कि हिंसा में शामिल सभी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। यह भी कहा गया कि झड़प प्री-प्लान्ड थी।

विद्यार्थियों के भविष्य का सवाल

जेएनयू जैसा प्रमुख शिक्षा संस्थान छात्रों के लिए एक सुरक्षित जगह होनी चाहिए, लेकिन इस तरह की घटनाएं छात्रों को असुरक्षित महसूस कराती हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इस स्थिति को सुधारने के लिए क्या कदम उठाता है। छात्र संगठन एक बार फिर से अपनी मांगों को उठाने की तैयारी में हैं, जिससे कि ऐसी घटनाएं भविष्य में न हों।

क्या है अब आगे का रास्ता?

जेएनयू की इन घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या विश्वविद्यालय प्रशासन इस प्रकार की हिंसा को रोकने में सक्षम है। छात्रों ने संगठन के माध्यम से अपने अधिकारों के लिए लड़ाई जारी रखने का प्रण लिया है। ऐसे में, सभी की निगाहें इस बात पर होंगी कि क्या छात्रों की आवाज को सुना जाएगा या फिर ये घटनाएँ सिर्फ एक और अध्याय बनकर रह जाएंगी।
Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!
App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 
Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos