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March 6, 2026

पार्ट-टाइम जॉब और QR कोड स्कैम से ₹641 करोड़ की ठगी, ED ने 2 CA को दबोचा

The CSR Journal Magazine
Delhi: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हाल ही में ₹641 करोड़ के साइबर फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दो चार्टर्ड अकाउंटेंट, अशोक कुमार शर्मा और भास्कर यादव, को गिरफ्तार किया है। ये लोग पार्ट-टाइम जॉब के ऑफर, QR कोड स्कैम और फिशिंग जैसे तरीकों से आम लोगों से ठगी कर रहे थे। इस ठगी का संचालन देशभर में फैला हुआ था, जहां ये शेल कंपनियों और क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से पैसा विदेश भेज रहे थे। ED ने 28 फरवरी 2026 को PMLA 2002 के तहत इनकी गिरफ्तारी की।

कैसे हुआ यह ठगी का खेल?

जांच में पता चला कि लोगों को निवेश के नाम पर ठगने के लिए कई ट्रिक्स अपनाई जाती थीं। पार्ट-टाइम जॉब ऑफर और QR कोड स्कैम के जरिए जनता को लालच दिया जाता था। ये लोग ठगी के पैसों को सबसे पहले म्यूल बैंक खातों में डालते थे, जो टेलीग्राम ग्रुप के जरिए संचालित होते थे। फिर, इस पैसे को शेल कंपनियों के जरिए घुमा कर उसकी पहचान छुपाई जाती थी।

क्रिप्टो से की मजदूरी की रकम की सफाई

जांच में खुलासा हुआ कि ठगी से जुटाई गई रकम को भारत के बैंक डेबिट कार्ड जैसे VISA और MasterCard के माध्यम से UAE की एक फिनटेक कंपनी PYYPL के वॉलेट में भेजा जाता था। वहां से पैसे को दुबई में एटीएम और POS के जरिए निकाला जा सकता था। इसके अलावा, इन्हें क्रिप्टो एक्सचेंज Binance के जरिए क्रिप्टोकरेंसी में बदला जाकर अन्य डिजिटल वॉलेट में ट्रांसफर किया जाता था, जिससे पैसे का ट्रेल छुपाया जा सके।

पेशेवरों का रैकेट, कई कंपनियों का संचालन

ED की जांच में खुलासा हुआ कि इस ठगी का पूरा रैकेट शिक्षित पेशेवरों द्वारा संचालित किया जा रहा था। अशोक कुमार शर्मा, भास्कर यादव, अजय और विपिन यादव जैसे चार्टर्ड अकाउंटेंट इसमें शामिल थे। दिल्ली के बिजवासन इलाके में इन्होंने एक ही पते से 20 से ज्यादा कंपनियों का संचालन किया था, जिसमें सबके पार्टनर, मोबाइल नंबर और KYC दस्तावेज आपस में जुड़े हुए थे।

छापेमारी में मिला सबूत

ED ने 28 नवंबर 2024 को अशोक कुमार शर्मा और भास्कर यादव के ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान शर्मा मौके से फरार हो गया और ED अधिकारियों से हाथापाई की। उसके खिलाफ कपसहेड़ा थाने में FIR दर्ज हुई। भास्कर यादव ने भी छापे की खबर मिलते ही भाग जाने का प्रयास किया। छापेमारी के दौरान कई फर्जी कंपनियों से जुड़े एटीएम कार्ड और चेक बुक भी बरामद किए गए।

दो साल का लंबा पीछा और फिर गिरफ्तारी

दोनों आरोपी नवंबर 2024 से फरार थे और गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत की कोशिश कर रहे थे। हालांकि, स्पेशल कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। भास्कर यादव ने सुप्रीम कोर्ट में भी अपील की, लेकिन वहां से भी उसे कोई राहत नहीं मिली। अंत में, इन्होंने कोर्ट में सरेंडर किया, जहां से ED ने उन्हें PMLA की धारा 19 के तहत गिरफ्तार कर लिया। अब तक इस मामले में 10 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

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