दरभंगा एयरपोर्ट का नया टर्मिनल: 71% काम पूरा, बनेंगे 30 लाख यात्रियों के लिए सुविधाएं

The CSR Journal Magazine
दरभंगा एयरपोर्ट पर नए टर्मिनल का निर्माण तेजी से चल रहा है। एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के अनुसार, लगभग 71.1% कार्य पूरा हो चुका है। इस नए टर्मिनल की लागत करीब 642.43 करोड़ रुपये है और इसका क्षेत्रफल 62,800 वर्ग मीटर है। इसके तैयार होने के बाद यात्रियों को अधिक सुविधाएं प्राप्त होंगी। नए टर्मिनल की मौजूदा संरचना से यात्रियों की अनुभव में सुधार होगा और सालाना यात्रियों की संख्या लगभग 30 लाख होगी।

एक्सपेंशन और आधुनिक सुविधाएं

टर्मिनल में 5 एयरोब्रिज और 40 चेक-इन काउंटर बन रहे हैं। यात्रियों को आसानी से चेक-इन करने और विमान तक पहुंचने की सुविधा मिलेगी। दूसरी मंजिल पर चेक-इन प्रक्रिया के बाद एयरोब्रिज के माध्यम से सीधे विमान तक पहुंचा जाएगा। इससे यात्रियों को खुले एप्रन में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जो यात्रा को और भी आरामदायक बनाएगा।

रनवे विस्तार की प्रक्रिया

दरभंगा एयरपोर्ट के अंतरराष्ट्रीय सुविधाओं को जोड़ने के लिए रनवे विस्तार एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके लिए 90 एकड़ जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। डीएम कौशल कुमार के अनुसार, भूमि अधिग्रहण के लिए लगभग 290 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना है और इसमें से अधिकांश राशि का भुगतान हो चुका है। यह विस्तार एएआई को बाउंड्री वॉल सहित आगे की प्रक्रियाएं पूरी करने में मदद करेगा।

लॉजिस्टिक पार्क: एक नया अवसर

एयरपोर्ट के पास करीब 50 एकड़ जमीन पर लॉजिस्टिक पार्क के लिए अधिग्रहण शुरू हो चुका है। यह परियोजना कृषि उत्पादों और कारोबार को बढ़ावा देने में सहायक होगी। लॉजिस्टिक पार्क और एयरपोर्ट के विकास से मिथिलांचल और उत्तर बिहार के व्यापारियों को लाभ होगा।

पर्यटन और रोजगार के नए अवसर

नया टर्मिनल, रनवे विस्तार और प्रस्तावित लॉजिस्टिक पार्क पर्यटन, कारोबार और रोजगार के लिए महत्व रखता है। बेहतर हवाई संपर्क से मिथिलांचल और उत्तर बिहार में पर्यटन और कृषि उत्पादों की आवाजाही में वृद्धि हो सकती है। एनएच-27 से जुड़ी सड़क कनेक्टिविटी पर भी काम चल रहा है। इससे क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं खुलेंगी।

दरभंगा एयरपोर्ट का ऐतिहासिक सफर

दरभंगा एयरपोर्ट का इतिहास राज परिवार से जुड़ा रहा है। एक समय था जब दरभंगा राज के पास अपने विमान थे और यहां से यात्रियों के साथ कार्गो सेवा भी संचालित होती थी। महाराजा रामेश्वर सिंह के समय से यह क्षेत्र विमानन व्यवसाय में सक्रिय रहा है। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान दरभंगा राज ने डगलस डीसी-3 विमान खरीदे थे।

मिथिलांचल का दौरा: आज और कल

आज के समय में दरभंगा एयरपोर्ट से यात्री दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और अन्य शहरों के लिए उड़ान भर रहे हैं। यह एयरपोर्ट न केवल यात्रा के लिए बल्कि मिथिलांचल की कृषि उत्पादों जैसे शाही लीची, मखाना और मालदह आम के लिए भी महत्वपूर्ण हो गया है। हवाई कनेक्टिविटी से अब यात्रियों और उत्पादों की आवाजाही में तेजी आई है।

आधुनिक समय में नागरिक उड्डयन

2020 में नागरिक उड़ान की शुरूआत के बाद दरभंगा एयरपोर्ट ने एक नई दिशा हासिल की। यह अब उत्तर बिहार के हवाई संपर्क का महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है। नए टर्मिनल, रनवे विस्तार और लॉजिस्टिक पार्क जैसी योजनाओं के साथ दरभंगा एयरपोर्ट की प्रगति स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। यह पुरानी विमानन विरासत को आधुनिकता के साथ जोड़ने का प्रयास है।

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